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इस बार गेहूं उत्पादन का 11 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:02 AM IST
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मंडी
- फोटो : Bureau
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एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो जाएगी जो 15 मई तक जारी रहेगी। इसके लिए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने तमाम तैयारियां कर ली हैं। जिले के 57 खरीद केंद्रों पर पांच एजेंसियां गेहूं की खरीद सरकारी रेट पर करेंगी। गेहूं में नमी हुई तो नमी के अनुसार रेट में कटौती हो सकती है। विभाग ने भंडारन के लिए भी सभी गोदामों का जायजा ले लिया है।
फिलहाल एक करोड़ क्विंटल गेहूं भंडारण करने के लिए जिले के गोदामों में जगह है। जरूरत पड़ने पर पुराने गेहूं को उठाया जा सकता है क्योंकि गेहूं की खरीद डेढ़ माह तक चलेगी। गोदामों की मौजूदा क्षमता और उत्पादन के लक्ष्य के अनुसार फिलहाल स्थिति यह है कि भंडारण की कोई समस्या नहीं आएगी।
जिले में एफसीआई के अलावा हैफेड, फूड व एचडब्ल्यूसी विभाग के भी गोदाम हैं। गेहूं की आवक के मेनेजर सभी गोदामों में भंडारण के लिए स्पेस पर्याप्त है। एफसीआई के गोदामों में 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं के भंडारण की क्षमता है जिसमें से फिलहाल करीब पौने आठ लाख मीट्रिक टन का स्पेश उपलब्ध है। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के छह गोदामों में 39500 मीट्रिक टन, हैफेड के 10 गोदामों में 118500 मीट्रिक टन व एचडब्ल्यूसी के 10 गोदामों में 100900 मीट्रिक टन गेहूं के भंडारन के लिए स्पेश उपलब्ध है। डीएफएससी राजेश कुमार आर्य ने बताया कि इस बार जिले में 11 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य है जबकि गत वर्ष 10 लाख 61 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी। उत्पादन के अनुमान के अनुसार जिले के गोदामों में भंडारण के लिए पर्याप्त स्पेश है।
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उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए पांच एजेंसियों को जिम्मेवारी सौंपी गई हैं। सभी तैयारियां पूरी हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (1525 रुपये प्रति क्विंटल) खरीद एक अप्रैल से 15 मई तक होगी। परंतु संभावना यह जताई जा रही है कि गेहूं की आवक 10 अप्रैल के बाद ही शुरू होगी। गेहूं में नमी या अन्य कमी पाए जाने पर रेट में निर्धारित कटौती हो सकती है। इसी प्रकार अन्य रबी की फसलों का टारगेट भी निर्धारित हो चुका है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा गेहूं की खरीद एवं भंडारण को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं।
नीले धागे से होगी बोरी की सिलाई
इस बार सभी एजेंसियों द्वारा खरीदी गई बोरी की सिलाई नीले रंग के धागे से की जाएगी। डीएफएससी राजेश कुमार ने बताया कि इससे गोदामों में यह साफ रहेगा कि इस सीजन की खरीदी गई गेहूं के बैग कौन से हैं और पुराने बैग कौन से हैं। उन्होंने बताया कि गोदामों में भंडारण के बाद जब उठान का कार्य शुरू होगा तो सबसे पहले पुरानी गेहूं को उठाया जाएगा। हर वर्ष बोरी की सिलाई के धागे का रंग बदलने से पुरानी और नई गेहूं के मिक्स होने की संभावना नहीं रहती।
ओलावृष्टि से कम रह सकता है उत्पादन
इस बार हुई ओलावृष्टि से उत्पादन कम रह सकता है। हालांकि कृषि विभाग का मानना है कि नुकसान ज्यादा नहीं हुआ है पर किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल में जिले के अधिकतर हिस्सों में काफी नुकसान हुआ है। गत वर्ष भी गेहूं की फसल में ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ था जिसके बावजूद जिले में 10 लाख 61 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक रिकॉर्ड की गई थी जो प्रदेश में सबसे अधिक थी।
कृषि विभाग के अनुसार यह है जिले में उत्पादन का लक्ष्य
फसल बिजाई का रकबा उत्पादन का लक्ष्य न्यूनतम समर्थन मूल्य
गेहूं 292000 हेक्टेयर 1416000 मीट्रिक टन 1525 रुपये प्रति क्विंटल
चने 8000 हेक्टेयर 9000 मीट्रिक टन 3425 रुपये प्रति क्विंटल
जौं 7000 हेक्टेयर 28000 मीट्रिक टन 1225 रुपये प्रति क्विंटल
दलहन 300 हेक्टेयर 400 मीट्रिक टन 3325 रुपये प्रति क्विंटल
ऑयल सीड 50000 हेक्टेयर 93000 मीट्रिक टन 3350 रुपये प्रति क्विंटल
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फिलहाल एक करोड़ क्विंटल गेहूं भंडारण करने के लिए जिले के गोदामों में जगह है। जरूरत पड़ने पर पुराने गेहूं को उठाया जा सकता है क्योंकि गेहूं की खरीद डेढ़ माह तक चलेगी। गोदामों की मौजूदा क्षमता और उत्पादन के लक्ष्य के अनुसार फिलहाल स्थिति यह है कि भंडारण की कोई समस्या नहीं आएगी।
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जिले में एफसीआई के अलावा हैफेड, फूड व एचडब्ल्यूसी विभाग के भी गोदाम हैं। गेहूं की आवक के मेनेजर सभी गोदामों में भंडारण के लिए स्पेस पर्याप्त है। एफसीआई के गोदामों में 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं के भंडारण की क्षमता है जिसमें से फिलहाल करीब पौने आठ लाख मीट्रिक टन का स्पेश उपलब्ध है। इसके अलावा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के छह गोदामों में 39500 मीट्रिक टन, हैफेड के 10 गोदामों में 118500 मीट्रिक टन व एचडब्ल्यूसी के 10 गोदामों में 100900 मीट्रिक टन गेहूं के भंडारन के लिए स्पेश उपलब्ध है। डीएफएससी राजेश कुमार आर्य ने बताया कि इस बार जिले में 11 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य है जबकि गत वर्ष 10 लाख 61 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई थी। उत्पादन के अनुमान के अनुसार जिले के गोदामों में भंडारण के लिए पर्याप्त स्पेश है।
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उन्होंने बताया कि गेहूं की खरीद के लिए पांच एजेंसियों को जिम्मेवारी सौंपी गई हैं। सभी तैयारियां पूरी हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (1525 रुपये प्रति क्विंटल) खरीद एक अप्रैल से 15 मई तक होगी। परंतु संभावना यह जताई जा रही है कि गेहूं की आवक 10 अप्रैल के बाद ही शुरू होगी। गेहूं में नमी या अन्य कमी पाए जाने पर रेट में निर्धारित कटौती हो सकती है। इसी प्रकार अन्य रबी की फसलों का टारगेट भी निर्धारित हो चुका है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा गेहूं की खरीद एवं भंडारण को लेकर निर्देश जारी कर दिए हैं।
नीले धागे से होगी बोरी की सिलाई
इस बार सभी एजेंसियों द्वारा खरीदी गई बोरी की सिलाई नीले रंग के धागे से की जाएगी। डीएफएससी राजेश कुमार ने बताया कि इससे गोदामों में यह साफ रहेगा कि इस सीजन की खरीदी गई गेहूं के बैग कौन से हैं और पुराने बैग कौन से हैं। उन्होंने बताया कि गोदामों में भंडारण के बाद जब उठान का कार्य शुरू होगा तो सबसे पहले पुरानी गेहूं को उठाया जाएगा। हर वर्ष बोरी की सिलाई के धागे का रंग बदलने से पुरानी और नई गेहूं के मिक्स होने की संभावना नहीं रहती।
ओलावृष्टि से कम रह सकता है उत्पादन
इस बार हुई ओलावृष्टि से उत्पादन कम रह सकता है। हालांकि कृषि विभाग का मानना है कि नुकसान ज्यादा नहीं हुआ है पर किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल में जिले के अधिकतर हिस्सों में काफी नुकसान हुआ है। गत वर्ष भी गेहूं की फसल में ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ था जिसके बावजूद जिले में 10 लाख 61 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक रिकॉर्ड की गई थी जो प्रदेश में सबसे अधिक थी।
कृषि विभाग के अनुसार यह है जिले में उत्पादन का लक्ष्य
फसल बिजाई का रकबा उत्पादन का लक्ष्य न्यूनतम समर्थन मूल्य
गेहूं 292000 हेक्टेयर 1416000 मीट्रिक टन 1525 रुपये प्रति क्विंटल
चने 8000 हेक्टेयर 9000 मीट्रिक टन 3425 रुपये प्रति क्विंटल
जौं 7000 हेक्टेयर 28000 मीट्रिक टन 1225 रुपये प्रति क्विंटल
दलहन 300 हेक्टेयर 400 मीट्रिक टन 3325 रुपये प्रति क्विंटल
ऑयल सीड 50000 हेक्टेयर 93000 मीट्रिक टन 3350 रुपये प्रति क्विंटल