फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   Sirsa News, Hindi News, loan, Sirsa

150 कर्जदार किसानों की जमीन कुर्क करने की तैयारी में बैंक!

Mon, 28 Mar 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Mon, 28 Mar 2016 12:59 AM IST
विज्ञापन
कृषि संकट के बीच द सिरसा जिला प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण बैंक की शाखा डबवाली कंगाली की कगार पर पहुंच गई है। पिछले तीन सालों से बैंक को नाबार्ड ने एक पैसा भी नहीं दिया है। माना जा रहा है कि पैसे की रिकवरी न होने के कारण नाबार्ड ने मुंह फेर लिया है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है। डबवाली क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ भूमि उपरोक्त बैंक के कब्जे में है। कर्ज अदा नहीं किया तो जमीन कुर्क हो सकती है।
विज्ञापन



बैंक की डबवाली स्थित शाखा के आंकड़ों पर नजर डालें तो गंभीर तथ्य सामने आते हैं। बैंक ने करीब चार सौ किसानों को अपनी डिफॉल्टर सूची में डाल दिया है। इन किसानों की ओर करीब साढ़े छह करोड़ रुपये बकाया है। करीब डेढ़ सौ किसानों पर अदालत में केस दायर है। डिफॉल्टिंग अमाऊंट ज्यादा होने के आसार हैं। क्योंकि सफेद मक्खी से कॉटन और ग्वार की फसल खत्म हो गई। बेमौसमी बरसात के साथ हुई ओलावृष्टि से लगातार तीसरी फसल सरसों पूरी तरह से नष्ट हो गई। गेहूं पर भी विपरीत असर पड़ा है। वर्ष 2015 की बात करें तो बैंक में कार्यरत फील्ड ऑफिसर को 11 करोड़ की रिकवरी का टारगेट मिला था।
विज्ञापन


फील्ड ऑफिसर को किसानों ने खराब फसल की बात कहकर लौटा दिया। दूसरी ओर नाबार्ड के दबाव के चलते बैंक को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। जमीन बैंक के पास रहन होने के चलते किसान मुश्किल में फंस गए। अदालत और जमीन की कुर्की होने के चलते किसानों ने जैसे-तैसे बैंक को कुछ कर्ज अदा किया। पिछले वर्ष बैंक लक्ष्य का महज 27 प्रतिशत ही कवर कर पाया, जबकि डिफॉल्टिंग अमाऊंट भी बढ़ गई। किसानों की माली हालत को देखते हुए फील्ड अधिकारी भी अनावश्यक दबाव डालने से बच रहे हैं। दूसरी ओर बैंक कंगाली के कगार पर पहुंच गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चूंकि बैंक की मार्फत नाबार्ड किसानों को लोन देने के लिए रकम देता है। यह रकम बैंक को रिकवरी के रूप में नाबार्ड को देनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नाबार्ड ने पिछले तीन साल से एक पैसा भी बैंक को किसानों के लिए नहीं दिया है।

लखुआना में 400 एकड़ जमीन किसकी
हरियाणा की राजनीति में दमखम रखने वाले एक राजनेता ने सांसद रहते हुए बेनामी संपत्ति का पहाड़ खड़ा कर लिया। डबवाली के गांव लखुआना में इस राजनेता की करीब 400 एकड़ बेनामी जमीन है। यह जमीन नाबार्ड के पैसे से सिंचित है। नेता का रिकॉर्ड में कहीं नाम तक नहीं है। पिछले दिनों डबवाली अदालत में वार्षिक निरीक्षण पर आए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस आरएस मलिक के सामने किसानों ने यह मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठाया था। किसानों की पुकार सुनने के बाद जस्टिस ने डबवाली शाखा के मैनेजर सरदीप कुमार के साथ बठिंडा रोड स्थित रेस्ट हाउस में बैठक भी की थी, लेकिन मैनेजर ने किसी भी नेता के नाम कर्जा होने की बात अस्वीकार की थी।

यह होती है प्रक्रिया
अगर किसी किसान ने कृषि कार्य के लिए कर्ज लेना है तो उसे अपनी जमीन बैंक को रहन करनी पड़ती है। ब्याज सहित कर्ज ली गई राशि अदा करनी पड़ती है। वर्तमान समय में ब्याज दर करीब सवा तेरह प्रतिशत है। अगर कोई किसान रेगुलर किश्त अदा करता है तो ब्याज दर आधी रह जाती है। अगर कर्ज अदा नहीं करता तो बैंक जमीन कुर्क करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है।

आत्महत्या को मजबूर किसान
कभी पंजाब में किसान आत्महत्या करते थे। अब वैसी ही स्थिति साथ लगते जिला सिरसा में पैदा हो गई है। विशेषकर डबवाली जैसे खुशहाल इलाके में कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन परिजन इज्जत की खातिर पुलिस में दिमागी परेशानी या फिर अन्य कारण बताते हैं। उस अनुसार कार्रवाई होती है।


किसानों की हालत से हम वाकिफ हैं। रिकवरी के लिए कागजी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर रहे हैं। अनावश्यक दबाव नहीं बना रहे। नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। करीब चार सौ किसानों की ओर साढ़े छह करोड़ बकाया हैं।
-सरदीप कुमार, प्रबंधक सिरसा जिला प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण बैंक, डबवाली
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed