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Sirsa News: चौटाला माइनर में 20 फीट चौड़ी दरार, 30 एकड़ तक फसल जलमग्न
Mon, 24 Aug 2026 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 24 Aug 2026 01:03 AM IST
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डबवाली। चौटाला माइनर में आई दरार से बहता पानी। संवाद
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जंडवाला बिश्नोईया गांव के पास बुर्जी नंबर 40 के नजदीक टूटी माइनर
फोटो-- - 9,10
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। डबवाली क्षेत्र में मौजगढ़ हेड से निकलने वाली चौटाला माइनर रविवार अलसुबह जंडवाला बिश्नोईया गांव के पास बुर्जी नंबर 40 के नजदीक टूट गई। माइनर में करीब 20 फीट चौड़ी दरार आने के कारण करीब 20 से 30 एकड़ में खड़ी नरमा और धान की फसल जलमग्न हो गई।
पानी भरने से फसल के साथ-साथ खेतों में रखे कृषि उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। रविवार अलसुबह करीब 2:30 बजे माइनर के किनारे कटाव होने से पानी तेजी से खेतों की ओर बहने लगा।
एक किसान अपने खेत में पानी लगाने के लिए माइनर के ऊपर से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी नजर माइनर किनारे टूटे हुए शीशम के पेड़ के पास पड़े बड़े कटाव पर गई।
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किसान ने देखा कि माइनर में बह रहा पूरा पानी करीब 20 फीट चौड़ी दरार से निकलकर खेतों में प्रवेश कर रहा है। किसान ने बिना देरी किए मामले की सूचना माइनर के बेलदार जोगेंद्र सिंह को दी। जोगेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और मौजगढ़ हेड से माइनर का पानी बंद करवाया गया।
जल प्रवाह कम होने के बाद विभाग द्वारा जेसीबी की मदद से माइनर में आए कटाव को बांधने का कार्य शुरू किया गया। हालांकि, पानी का बहाव रोकने और कटाव को दुरुस्त करने तक काफी मात्रा में पानी खेतों में फैल चुका था जिससे कई एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई।
माइनर टूटने की घटना के बाद किसानों में रोष देखने को मिला। किसानों का कहना है कि माइनर के ऊपर लंबे समय से टूटे हुए पेड़ पड़े हुए हैं और इसकी नियमित रूप से उचित देखभाल नहीं होने के कारण जगह-जगह कमजोर स्थिति बनी रहती है।
किसानों के अनुसार, समय रहते माइनर की सफाई, किनारों की मजबूती और पेड़ों को हटाने का कार्य किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। किसानों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग द्वारा माइनर की स्थिति की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इसका खामियाजा हर बार माइनर से जुड़े किसानों को अपनी फसल खराब होने के रूप में भुगतना पड़ता है। किसानों ने विभाग से मांग की कि माइनर की पूरी तरह से जांच करवाकर कमजोर हिस्सों को मजबूत किया जाए और टूटे पेड़ों को हटाकर नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल, विभाग की ओर से जेसीबी की मदद से टूटे हिस्से को बांधने का कार्य किया गया है। वहीं, प्रभावित किसानों ने जलभराव के कारण खराब हुई फसल और कृषि उपकरणों के नुकसान का जायजा लेकर उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई है।
कोट्स
सूचना मिलते ही मशीनरी सहित मौके पर पहुंचा और दरार को पाट दिया। तटबंधों की मजबूती के लिए मिट्टी वगैरह डालकर उसे मजबूत किया जाएगा।
-रोहित शर्मा, जेई, सिंचाई विभाग
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। डबवाली क्षेत्र में मौजगढ़ हेड से निकलने वाली चौटाला माइनर रविवार अलसुबह जंडवाला बिश्नोईया गांव के पास बुर्जी नंबर 40 के नजदीक टूट गई। माइनर में करीब 20 फीट चौड़ी दरार आने के कारण करीब 20 से 30 एकड़ में खड़ी नरमा और धान की फसल जलमग्न हो गई।
पानी भरने से फसल के साथ-साथ खेतों में रखे कृषि उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। रविवार अलसुबह करीब 2:30 बजे माइनर के किनारे कटाव होने से पानी तेजी से खेतों की ओर बहने लगा।
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एक किसान अपने खेत में पानी लगाने के लिए माइनर के ऊपर से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी नजर माइनर किनारे टूटे हुए शीशम के पेड़ के पास पड़े बड़े कटाव पर गई।
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किसान ने देखा कि माइनर में बह रहा पूरा पानी करीब 20 फीट चौड़ी दरार से निकलकर खेतों में प्रवेश कर रहा है। किसान ने बिना देरी किए मामले की सूचना माइनर के बेलदार जोगेंद्र सिंह को दी। जोगेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और मौजगढ़ हेड से माइनर का पानी बंद करवाया गया।
जल प्रवाह कम होने के बाद विभाग द्वारा जेसीबी की मदद से माइनर में आए कटाव को बांधने का कार्य शुरू किया गया। हालांकि, पानी का बहाव रोकने और कटाव को दुरुस्त करने तक काफी मात्रा में पानी खेतों में फैल चुका था जिससे कई एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई।
माइनर टूटने की घटना के बाद किसानों में रोष देखने को मिला। किसानों का कहना है कि माइनर के ऊपर लंबे समय से टूटे हुए पेड़ पड़े हुए हैं और इसकी नियमित रूप से उचित देखभाल नहीं होने के कारण जगह-जगह कमजोर स्थिति बनी रहती है।
किसानों के अनुसार, समय रहते माइनर की सफाई, किनारों की मजबूती और पेड़ों को हटाने का कार्य किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। किसानों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग द्वारा माइनर की स्थिति की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इसका खामियाजा हर बार माइनर से जुड़े किसानों को अपनी फसल खराब होने के रूप में भुगतना पड़ता है। किसानों ने विभाग से मांग की कि माइनर की पूरी तरह से जांच करवाकर कमजोर हिस्सों को मजबूत किया जाए और टूटे पेड़ों को हटाकर नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल, विभाग की ओर से जेसीबी की मदद से टूटे हिस्से को बांधने का कार्य किया गया है। वहीं, प्रभावित किसानों ने जलभराव के कारण खराब हुई फसल और कृषि उपकरणों के नुकसान का जायजा लेकर उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई है।
कोट्स
सूचना मिलते ही मशीनरी सहित मौके पर पहुंचा और दरार को पाट दिया। तटबंधों की मजबूती के लिए मिट्टी वगैरह डालकर उसे मजबूत किया जाएगा।
-रोहित शर्मा, जेई, सिंचाई विभाग