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पदवी या गद्दी का कोई मोह नहीं : ठाकुर दलीप सिंह
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Sun, 10 Apr 2016 12:33 AM IST
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दलीप सिंह नामध्ाारी
- फोटो : Bureau
नामधारी समुदाय के सतगुरु ठाकुर उदय सिंह महाराज के भाई ठाकुर दलीप सिंह ने कहा कि उन्हें उनकी मां चांदकौर के अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिए गए बल्कि उलटा उन पर ही उनके कत्ल का इल्जाम लगाया जा रहा है जो बेबुनियाद है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि उन्हें कत्ल में फंसाने के लिए पैसे के बल पर झूठे गवाह तैयार किए जा सकते हैं। अगर केंद्र और प्रदेश सरकार चाहे तो वह कान पकड़कर नामधारी समाज में एकता और शांति की बहाली करवा सकती है। उन्हें किसी पदवी या गद्दी का कोई मोह नहीं है वे भी समाज में एकजुटता चाहते हैं।
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वे शनिवार को नामधारी समुदाय के सतगुरु स्व. जगजीत सिंह महाराज की पत्नी चांद कौर की याद में श्रीजीवनगनगर गुरुद्वारे में आयोजित अंतिम अरदास से पूर्व पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान वे कई बार फूट फूटकर रोये। श्री जीवननगर में अंतिम अरदास रखे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब उन्हें मां चांद कौर के अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिए गए तो तो उन्हें भैणी साहिब कैसे जाने दिया जाएगा। उन्होंने मां की याद में ही यहां पर अंतिम अरदास रखी है। उन्होंने कहा कि माता चांद कौर उनकी ताई ही नहीं बल्कि मां थी जिन्होंने उन्हें पाल पोसकर बढ़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकुर उदय सिंह ने माता चांद कौर को कैद करके रखा हुआ था। उनके भाई ने माता पिता को पंथ से निकाल दिया था।
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उन्होंने कहा कि वे नामधारी पंथ को एकजुट देखना चाहते है पर उनके भाई और बहनोई जगतार सिंह ने पंथ को तोड़ा है। अगर मन में शांति होगी तो पंथ एक हो सकता है अगर मन में नफरत होगी तो शांति नहंीं आ सकती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हंसपाल सिंह, रिछपाल सिंह और जगतार सिंह पंथ में एकता नहीं होने देना चाहते हैं। वे तीनों पंथ का नुकसान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति एकता से होती है पर नामधारी समाज में तीन पीढ़ी से लड़ाई चल रही है। उनके पिता वीर सिंह जी को भी जेल जाना पड़ा था। इस लड़ाई में पंथ का बहुत नुकसान हुआ है। इस मौके पर श्रीनिर्मल आश्रम पुष्कर के संत डॉ. रामेश्वारानंद महाराज भी मौजूद थे।
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