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गेहूं देने के बाद किसान को पीने के लिए मिलता है पानी!
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Tue, 19 Apr 2016 01:51 AM IST
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मंडी
- फोटो : Bureau
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अनाज मंडी में पीने के पानी के बदले किसानों को बेगार झेलनी पड़ती है। पानी पिलाने वाली महिलाएं किसानों से गेहूं वसूल करती हैं। अगर किसान गेहूं नहीं देते तो उन्हें एक बूंद पानी नसीब नहीं होता। सोमवार को गेहूं से ब्लॉक हुई अनाज मंडी का दौरा करने वाली एसडीएम संगीता तेत्रवाल व्यवस्था देखकर हतप्रभ रह गई।
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लाइव रिपोर्ट : एसडीएम संगीता तेत्रवाल कार्यालय जाने से पूर्व सुबह करीब साढ़े 10 बजे अनाज मंडी में पहुंची। मार्केट कमेटी के कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। अनाज मंडी के एक ब्लॉक में गेहूं से रास्ता बंद होने के कारण वे गाड़ी से नीचे उतर गई। गेहूं की तुलाई कर रहे मजदूरों से पूछा कि आप कितना गेहूं बैग में भरते हैं? क्या मजदूरी तय समय पर मिलती है? मजदूरों ने जवाब दिया कि 50 किलोग्राम की भराई की जाती है, समय पर मजदूरी मिलती है। फिर पूछा कोई तकलीफ तो नहीं? मजदूरों ने जवाब दिया कि उठान नहीं हो रही। ऐसे में रास्ते बंद हो गए हैं। इतनी देर में किसान मौके पर आ गए।
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किसानों ने शिकायत की कि अनाज मंडी में 70 से 80 ऐसी महिलाएं घूम रही हैं, जो मार्केट कमेटी कर्मचारी होने का दावा करके उन्हें पानी पिलाती हैं। इसके बदले में वे गेहूं मांगती हैं। अगर वे गेहूं नहीं देते तो उन्हें पीने के लिए पानी नहीं मिलता। एसडीएम ने ऐसी कुछ महिलाओं को पकड़ लिया। इस मामले में कार्यकारी सचिव हेतराम से जवाब तलबी की। लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। एसडीएम ने किसानों, मजदूरों के सामने ही कार्यकारी सचिव को लताड़ लगाते हुए पानी की समुचित व्यवस्था करने के आदेश दिए।
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कच्चा आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान प्रकाश चंद बांसल ने कमजोर लिफ्टिंग का मुद्दा उठाते हुए बताया कि गेहूं खरीद शुरू हुए करीब आठ दिन हो चुके हैं। पहले दिन खरीद की गई गेहूं का उठान आज तक नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि एजेंसियां शॉर्टेज की मांग करेंगी। जो बर्दाश्त नहीं होगी। पूर्व प्रधान ने कहा कि डीएफएससी 450 ग्राम वजन का बारदाना दे रही है। इसके बदले में 665 ग्राम शार्टेज मांग रही हैं। जोकि अनुचित है। दूसरी ओर अन्य एजेंसियां का बारदाना 540 ग्राम है, वे 580 ग्राम शॉर्टेज काटती हैं।
किसान भवन भी देखिए एक बार
किसानों ने एसडीएम को घेरते हुए कहा कि किसान भवन हमारे लिए बना है। लेकिन आराम कोई ओर फरमाता है। अनाज मंडी का निरीक्षण बीच में छोड़कर जा रही एसडीएम को रोकते हुए किसानों ने कहा कि वे एक बार किसान भवन में चलें। किसान भवन का दरवाजा बंद था। यहां तक की पहली मंजिल पर किसानों के आराम करने के लिए बना हाल कमरा भी बंद था। एसडीएम ने इसका कारण पूछा तो कार्यकारी सचिव ने पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। एसडीएम ने तुरंत ताले खुलवाए और किसानों के लिए व्यवस्थाएं करने के आदेश दिए। यह पहला मौका था, जब किसान भवन किसानों के लिए खुला हो।
आढ़ती बोले, गेहूं उठवाइए
आढ़तियों ने कहा कि उठान बहुत धीमा है। जो गेहूं आ रहा है, उसे ढेरी करने के लिए मंडी में स्थान नहीं है। ऐसे में मार्गों या फिर खाली प्लाटों में गेहूं ढेरी करनी पड़ रही है। एसडीएम संगीता तेत्रवाल ने कहा कि संभव है कि आज शाम से वेयर हाउस तथा डीएफएससी के स्थानीय गोदामों में गेहूं लगनी शुरू हो जाए। इसके अतिरिक्त गांव सांतवखेड़ा स्थित गोदाम में कांटे की वजह से दिक्कत आ रही है। अतिरिक्त कांटा लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके बाद समस्या नहीं रहेगी। एसडीएम ने मार्केट कमेटी के कार्यकारी सचिव हेतराम तथा सुपरवाईजर महावीर डुडी को साथ लेकर खरीद केंद्रों का दौरा भी किया। वे गांव सांवतखेड़ा में भी गई। ताकि गेहूं उठान में तेजी लाई जा सकें।
ऐसे हैं हालात
मार्केट कमेटी डबवाली ने अब तक 10 लाख 59 हजार 44 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की है। जिसमें से दो लाख 80 हजार क्विंटल गेहूं का उठान हुआ है। अब तक आठ लाख क्विंटल से अधिक गेहूं खरीद केंद्रों पर उठान की इंतजार में पड़ी है। सोमवार को हरियाणा के कई हिस्सों में बरसात हुई है। इसके बावजूद भी अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं।