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स्टाफ के टोटे व पेयजल आपूर्ति से जूझ रही आईटीआई ओढां
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Sun, 06 Nov 2016 12:19 AM IST
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चिनैनी पीएचई की निर्माणाधीन बिल्डिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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क्षेत्र की एकमात्र ओढां आईटीआई पिछले काफी समय से स्टाफ के टोटे से जूझ रही है जिसके चलते विद्यार्थियों का प्रशिक्षण बाधित होना स्वाभाविक है। आईटीआई में इस समय सर्वेयर, कंप्यूटर हार्डवेयर, कोपा, पलंबर, फीटर मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन व नेटवर्किंग मेंटेनेंस सहित सात ट्रेडों में 13 यूनिटें चल रही हैं जिन पर नियमानुसार 18 अनुदेशक होने चाहिए लेकिन यहां नौ अनुदेशक हैं जो विद्यार्थियों को शिक्षित कर रहे हैं। आईटीआई में इस समय टीचिंग स्टाफ सर्वेयर, कंप्यूटर हार्डवेयर व मोटर मैकेनिक का कोई भी अनुदेशक नहीं है तथा फीटर व प्लंबर की दो दो यूनिटों पर एक एक अनुदेशक है। अगस्त 2016 में नए सत्र में दाखिलों के बाद स्थिति ये थी कि मोटर मैकेनिक मेें दो यूनिटों पर मात्र एक अनुदेशक था जिसने हाल ही में तबादला करवा लिया जिसके चलते विद्यार्थियों का प्रशिक्षण प्रभावित होना स्वाभाविक है। क्षेत्र में मात्र एक आईटीआई होने के कारण यहां पर 308 स्वीकृत सीटों पर 275 विद्यार्थी हैं। बताया जा रहा है कि आईटीआई में स्टाफ की समस्या लंबे समय से हैं, लेकिन विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
पेयजल पर दो विभाग कर रहे इतिश्री
आईटीआई स्टाफ के साथ साथ पेयजल से भी जूझ रही है। हालांकि संस्थान के लिए तीन इंची स्पेशल पाइप लाइन का प्रावधान दिया गया है। लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर संवेदनशील न होकर आश्वासनों से सप्लाई देते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब ये आईटीआई निर्माणाधीन थी तो उस समय संस्थान के लिए स्पेशल पाइप लाइन की कंडीशन दी गई थी लेकिन बाद मेें निर्माण के दौरान कुछ नई हिदायतों को शामिल कर दिया गया। जिसके चलते संस्थान की पेयजल आपूर्ति बाधित होकर रह गई। बीएंडआर का कहना है कि उनका कार्य इमारत के अंदर का है बाहर जो भी सप्लाई का कार्य है वो जन स्वास्थ्य विभाग का है। तो वहीं जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामला डिपोजिट वर्क का है। बीएंडआर ने उनके विभाग के खाते में राशि डिपोजिट नहीं करवाई जिसके चलते ये समस्या दरपेश आ रही है। कार्य भले ही किसी विभाग का हो लेकिन आईटीआई की पेयजल सप्लाई दो विभागों के बीच में उलझ कर रह गई है। सर्दी के मौसम में भले ही पानी की खपत कम है लेकिन गर्मियों में स्थिति ये होती है कि संस्थान को पानी के टैंकर मंगवा कर काम चलाना पड़ता है। इसके लिए संस्थान की ओर से अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन सप्लाई पर दोनों विभाग एक दूसरे पर थोप कर इतिश्री कर रहे हैं।
देखिए स्टाफ की तो दिक्कत है जिसके लिए हमने विभाग को अवगत करवाया हुआ है। विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए दूसरे अनुदेशकों को कार्य सौंप कर काम चलाया जा रहा है। रही बात पेयजल आपूर्ति की तो इसके लिए हमने जन स्वास्थ्य विभाग व बीएंडआर को कई बार अवगत करवा दिया, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही।
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जयभगवान, प्राचार्य आईटीआई
हमारा काम इमारत के अंदर का था जो बाहर का सप्लाई कार्य है वो जन स्वास्थ्य विभाग का है। इसलिए इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं क्योंकि इसका बजट अलग से था।
जेई अंकुर कुमार, बीएंडआर विभाग
ये मेटर डिपोजिट का है क्योंकि बीएंडआर ने ही भवन का निर्माण करवाया था जब तक पेयजल आपूर्ति की राशि विभाग के खाते में डिपोजिट नहीं हो जाती तब तक आपूर्ति का कार्य नहीं हो सकता वैसे इस विषय में उक्त विभाग से बातचीत चल रही है।
भानीराम, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग डबवाली
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पेयजल पर दो विभाग कर रहे इतिश्री
आईटीआई स्टाफ के साथ साथ पेयजल से भी जूझ रही है। हालांकि संस्थान के लिए तीन इंची स्पेशल पाइप लाइन का प्रावधान दिया गया है। लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर संवेदनशील न होकर आश्वासनों से सप्लाई देते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जब ये आईटीआई निर्माणाधीन थी तो उस समय संस्थान के लिए स्पेशल पाइप लाइन की कंडीशन दी गई थी लेकिन बाद मेें निर्माण के दौरान कुछ नई हिदायतों को शामिल कर दिया गया। जिसके चलते संस्थान की पेयजल आपूर्ति बाधित होकर रह गई। बीएंडआर का कहना है कि उनका कार्य इमारत के अंदर का है बाहर जो भी सप्लाई का कार्य है वो जन स्वास्थ्य विभाग का है। तो वहीं जन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामला डिपोजिट वर्क का है। बीएंडआर ने उनके विभाग के खाते में राशि डिपोजिट नहीं करवाई जिसके चलते ये समस्या दरपेश आ रही है। कार्य भले ही किसी विभाग का हो लेकिन आईटीआई की पेयजल सप्लाई दो विभागों के बीच में उलझ कर रह गई है। सर्दी के मौसम में भले ही पानी की खपत कम है लेकिन गर्मियों में स्थिति ये होती है कि संस्थान को पानी के टैंकर मंगवा कर काम चलाना पड़ता है। इसके लिए संस्थान की ओर से अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन सप्लाई पर दोनों विभाग एक दूसरे पर थोप कर इतिश्री कर रहे हैं।
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देखिए स्टाफ की तो दिक्कत है जिसके लिए हमने विभाग को अवगत करवाया हुआ है। विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए दूसरे अनुदेशकों को कार्य सौंप कर काम चलाया जा रहा है। रही बात पेयजल आपूर्ति की तो इसके लिए हमने जन स्वास्थ्य विभाग व बीएंडआर को कई बार अवगत करवा दिया, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही।
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जयभगवान, प्राचार्य आईटीआई
हमारा काम इमारत के अंदर का था जो बाहर का सप्लाई कार्य है वो जन स्वास्थ्य विभाग का है। इसलिए इस बारे में जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं क्योंकि इसका बजट अलग से था।
जेई अंकुर कुमार, बीएंडआर विभाग
ये मेटर डिपोजिट का है क्योंकि बीएंडआर ने ही भवन का निर्माण करवाया था जब तक पेयजल आपूर्ति की राशि विभाग के खाते में डिपोजिट नहीं हो जाती तब तक आपूर्ति का कार्य नहीं हो सकता वैसे इस विषय में उक्त विभाग से बातचीत चल रही है।
भानीराम, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग डबवाली