रोडवेज का चक्का जाम, कर्मचारियों ने दिया धरना
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सोमवार को बैठे धरने पर हरियाणा संयुक्त कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान दलबीर किरमारा और संघ के महासचिव हरबत पूनिया पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार रोडवेज विभाग को निजी हाथों में सौंपना चाहती है, लेकिन रोडवेज कर्मचारी ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की रोडवेज कर्मचारी अवहेलना नहीं कर रहे हैं। रोडवेज कर्मचारियों की लड़ाई सरकार की वादाखिलाफी से है, क्योंकि सरकार ने सहकारी परिवहन परमिट पॉलिसी रद्द करने का वादा किया था, लेकिन निजी बसों को परमिट जारी कर संचालित करवाना सरकार की कमजोर मानसिकता का उदाहरण है।
रोडवेज तालमेल कमेटी के प्रधान रामकुमार के अलावा रोडवेज कर्मचारी नेता भीम सिंह चक्का, चंद्रशेखर धम्मी, चिमनलाल स्वामी, रमेश कुमार और विनोद कुमार ने कहा कि प्रशासन ने तीन दिन पहले निजी बसों का संचालन रोकने की शर्त पर रोडवेज का चक्का जाम खुलवाया था। रोडवेज कर्मचारियों ने बीती 24 मई को भी रोडवेज बसों का चक्का जाम किया था। जिसे 24 घंटे बाद अगले दिन प्रशासन ने काफी जद्दोजहद करते हुए दो दिनों तक निजी बसों के संचालन पर रोक लगाते हुए रोडवेज चक्का जाम खुलवाया था।
रोडवेज के चक्का जाम होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगाें को बस अड्डे के बाहर प्राइवेट वाहनों को ढूंढना पड़ा। प्राइवेट वाहनों के चालक मनमर्जी का किराया वसूल रहे हैं। लोगाें को बस अड्डे के बाहर चिलचिलाती धूप में वाहनों का इंतजार करना पड़ा। पंजाब और राजस्थान की बसों को भी बस अड्डा परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया इस बस अड्डे के बाहर दूर तक वाहनों की कतार दिनभर रही। इस कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।