{"_id":"5e94a5dc8ebc3e769a04436f","slug":"sewadar-making-clouthes-masks-sirsa-news-rtk5507082130","type":"story","status":"publish","title_hn":"कपड़े के मास्क बनाकर जरूरत पूरी कर रहीं संस्थाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कपड़े के मास्क बनाकर जरूरत पूरी कर रहीं संस्थाएं
विज्ञापन
कपड़े के मास्क तैयार करते हुए।
- फोटो : Sirsa
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना सक्रंमण को रोकने के लिए जिले को 24 मार्च से लॉकडाउन किया गया है। लॉकडाउन के चलते यहां समाजिक संस्थाएं जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री वितरण कर रही हैं। वहीं कई समाजिक संस्थाएं कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लोगों को मास्क और सैनिटाइजर बांट रही है। कई समाजिक संस्थाएं मास्क बनाने के लिए अपने स्तर पर जोन बनाकर मास्क का निर्माण कर रही है। ताकि लोगों को संक्रमण में आने से रोकने के लिए मास्क दिए जा सके। मास्क की एकदम से इतनी खपत को जब मेडिकल कंपनियां पूरा नहीं कर पाई तो शहर की संस्थाओं ने मास्क बनाकर लोगों में बांटने शुरू कर दिए।
लोगों द्वारा भारी मात्रा में सैनिटाइजर और मास्क की खरीद के चलते बाजार में इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई। पांच रुपये में मिलने वाला मास्क 20 रुपये का मिल रहा था तो सैनिटाइजर निर्धारित रेट से भी अधिक में मिल रहा था। लॉकडाउन के पहले दिन से ही श्री अमरनाथ सेवा समिति, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट और श्रीमति रेखा मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने डिस्पोजल मास्क का वितरण शुरू किया। ताकि शहरवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाया जा सके।
संक्रमण को रोकने के लिए बांटे जा रहे मास्क
संक्रमण से बचाव के लिए शहर की सामाजिक संस्थाएं श्री रेखा मेमोरियल ट्रस्ट, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट और श्री अमरनाथ सेवा समिति से जरूरतमंद लोगों के मास्क का वितरण पहले दिन से ही जारी रखा है। जिसके तहत श्री अमरनाथ सेवा समिति ने 22 हजार, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट ने 16 हजार और श्री रेखा मेमोरियल ट्रस्ट ने दस हजार मास्क का वितरण कर दिया है।
विज्ञापन
संस्था तैयार कर रही कपड़े के मास्क
शहर की अधिकतर संस्थाएं डिस्पोजल मास्क का वितरण कर रही है, ऐसे में वॉशेबल मास्क बनाने के लिए डेरा सच्चा सौदा की ग्रीन एस वेलफेसर फोर्स के सदस्यों ने कपड़े के मास्क बनाने का प्रपोजल डीएसपी राजेश चैची के आगे रखा तो उन्हें मास्क बनाने की अनुमति दे दी। जिसके बाद शहर को दस जोन में बांटकर मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया गया। सात अप्रैल से अब तक 21 हजार 700 मास्क बनाकर तैयार कर दिए गए हैं और प्रतिदिन वितरण किया जा रहा है।
अपने स्तर पर करवाया सैनिटाइजर का निर्माण
श्री तारा बाबा मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से जरूरतमंद लोगों को सैनिटाइज भी दिए गए। एकदम से सैनिटाइजर की खपत बढ़ गई थी जिससे आम लोगों के पास सैनिटाइजर नहीं पहुंच रहा था। ऐसे में ट्रस्ट की ओर से अपने स्तर पर सैनिटाइजर का निर्माण कर लोगों में बांटा गया।
विज्ञापन
लोगों द्वारा भारी मात्रा में सैनिटाइजर और मास्क की खरीद के चलते बाजार में इसकी कालाबाजारी शुरू हो गई। पांच रुपये में मिलने वाला मास्क 20 रुपये का मिल रहा था तो सैनिटाइजर निर्धारित रेट से भी अधिक में मिल रहा था। लॉकडाउन के पहले दिन से ही श्री अमरनाथ सेवा समिति, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट और श्रीमति रेखा मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने डिस्पोजल मास्क का वितरण शुरू किया। ताकि शहरवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाया जा सके।
विज्ञापन
संक्रमण को रोकने के लिए बांटे जा रहे मास्क
संक्रमण से बचाव के लिए शहर की सामाजिक संस्थाएं श्री रेखा मेमोरियल ट्रस्ट, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट और श्री अमरनाथ सेवा समिति से जरूरतमंद लोगों के मास्क का वितरण पहले दिन से ही जारी रखा है। जिसके तहत श्री अमरनाथ सेवा समिति ने 22 हजार, श्री तारा बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट ने 16 हजार और श्री रेखा मेमोरियल ट्रस्ट ने दस हजार मास्क का वितरण कर दिया है।
विज्ञापन
संस्था तैयार कर रही कपड़े के मास्क
शहर की अधिकतर संस्थाएं डिस्पोजल मास्क का वितरण कर रही है, ऐसे में वॉशेबल मास्क बनाने के लिए डेरा सच्चा सौदा की ग्रीन एस वेलफेसर फोर्स के सदस्यों ने कपड़े के मास्क बनाने का प्रपोजल डीएसपी राजेश चैची के आगे रखा तो उन्हें मास्क बनाने की अनुमति दे दी। जिसके बाद शहर को दस जोन में बांटकर मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया गया। सात अप्रैल से अब तक 21 हजार 700 मास्क बनाकर तैयार कर दिए गए हैं और प्रतिदिन वितरण किया जा रहा है।
अपने स्तर पर करवाया सैनिटाइजर का निर्माण
श्री तारा बाबा मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से जरूरतमंद लोगों को सैनिटाइज भी दिए गए। एकदम से सैनिटाइजर की खपत बढ़ गई थी जिससे आम लोगों के पास सैनिटाइजर नहीं पहुंच रहा था। ऐसे में ट्रस्ट की ओर से अपने स्तर पर सैनिटाइजर का निर्माण कर लोगों में बांटा गया।