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आरटीआई में खुलासा, दो आरटीआई में दो अलग-अलग मिले जवाब
ब्यूरो / अमर उजाला , सिरसा
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:49 AM IST
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आरटीआई से बड़े-बड़े घोटालों का खुलासा हुआ है। सरकार ने 2005 में सरकारी विभागों के कामों में पारदर्शिता लाने को यह एक्ट लागू किया था। लेकिन ज्यादातर देखने में आता है कि आरटीआई में अधिकारी गोल-मोल व आधी अधूरी जानकारी देकर कर्तव्यों से इतिश्री करना चाहते हैं। ऐसा ही एक मामला ओढां में एक व्यक्ति द्वारा बीडीपीओ कार्यालय से मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
जानकारी के अनुसार विजय नामक व्यक्ति ने मनरेगा के तहत करवाए गए कार्यों की कुछ जानकारियां मांगी थी तो वहीं सुखा सिंह ने जलघर में सफाई आदि के बाबत। बीडीपीओ कार्यालय ने इन दोनों ही मामले में अपना बचाव करते हुए गोलमोल से जवाब दिए। एक व्यक्ति को तो यह जानकारी मिली कि इसमें 10 लाख 88 हजार 731 रुपये खर्च हुआ, जबकि दूसरे को यह बताया कि 2013 के बाद जलघर आदि में सफाई कार्य हुआ ही नहीं। जानकारी से साफ जाहिर हो रहा है कि दो जवाब से घोटाला हुआ है।
ये मांगी थी, ये मिली जानकारी
1. विजय कुमार ने वर्ष 2010 से लेकर 2015 में मनरेगा के तहत हुए कार्यों की जानकारी मांगी थी, जिसमें ग्राम सचिव जगवीर सिंह से उसे जवाब मिला कि वर्ष 2010-11 में जलघर की सफाई पर 98 हजार 300 रुपये खर्च, वर्ष 2011-12 में जेएनवी में चार लाख 87 हजार रुपये की सफाई, वर्ष 2012-13 में वाटर वर्क्स की भूमि समतल पर एक लाख 43 हजार 379 रुपये, वर्ष 2013-14 में मोगा नंबर 26900 के खाल व जल घर की सफाई पर 10 लाख 88 हजार 731 रुपये खर्च हुए हैं।
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2. सुखा सिंह ने भी बीडीपीओ कार्यालय से हाल ही में जल घर की सफाई बारे जानकारी मांगी थी, जिसमें एबीपीओ द्वारा उसे सूचना दी गई कि वर्ष 2010-11 में 94 हजार 154 रुपये की सफाई की गई है। इस राशि व विजय कुमार को दी गई सूचना में भी अंतर है। वहीं उसे बताया गया कि 2013 के बाद जलघर में सफाई हुई ही नहीं जबकि विजय कुमार को दी गई सूचना में वर्ष 2014 में जलघर में 10 लाख 88 हजार 731 रुपये की सफाई दिखाई गई है।
देखिए विजय नामक व्यक्ति ने लंबी चौड़ी जानकारी मांगी थी जो मैंने रिकॉर्ड के अनुसार ही दी है फिर भी कहीं त्रुटि रह गई हो सकती है बाकि मैं रिकॉर्ड और देख लूंगा।
जगवीर सिंह, ग्राम सचिव
आरटीआई का जवाब दे दिया गया है अगर कोई फर्क नजर आ रहा है तो मैं इस विषय में कागज देख कर ही कुछ बता पाऊंगा।
बलराज सिंह मलेठिया, बीडीपीओ ओढां
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जानकारी के अनुसार विजय नामक व्यक्ति ने मनरेगा के तहत करवाए गए कार्यों की कुछ जानकारियां मांगी थी तो वहीं सुखा सिंह ने जलघर में सफाई आदि के बाबत। बीडीपीओ कार्यालय ने इन दोनों ही मामले में अपना बचाव करते हुए गोलमोल से जवाब दिए। एक व्यक्ति को तो यह जानकारी मिली कि इसमें 10 लाख 88 हजार 731 रुपये खर्च हुआ, जबकि दूसरे को यह बताया कि 2013 के बाद जलघर आदि में सफाई कार्य हुआ ही नहीं। जानकारी से साफ जाहिर हो रहा है कि दो जवाब से घोटाला हुआ है।
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ये मांगी थी, ये मिली जानकारी
1. विजय कुमार ने वर्ष 2010 से लेकर 2015 में मनरेगा के तहत हुए कार्यों की जानकारी मांगी थी, जिसमें ग्राम सचिव जगवीर सिंह से उसे जवाब मिला कि वर्ष 2010-11 में जलघर की सफाई पर 98 हजार 300 रुपये खर्च, वर्ष 2011-12 में जेएनवी में चार लाख 87 हजार रुपये की सफाई, वर्ष 2012-13 में वाटर वर्क्स की भूमि समतल पर एक लाख 43 हजार 379 रुपये, वर्ष 2013-14 में मोगा नंबर 26900 के खाल व जल घर की सफाई पर 10 लाख 88 हजार 731 रुपये खर्च हुए हैं।
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2. सुखा सिंह ने भी बीडीपीओ कार्यालय से हाल ही में जल घर की सफाई बारे जानकारी मांगी थी, जिसमें एबीपीओ द्वारा उसे सूचना दी गई कि वर्ष 2010-11 में 94 हजार 154 रुपये की सफाई की गई है। इस राशि व विजय कुमार को दी गई सूचना में भी अंतर है। वहीं उसे बताया गया कि 2013 के बाद जलघर में सफाई हुई ही नहीं जबकि विजय कुमार को दी गई सूचना में वर्ष 2014 में जलघर में 10 लाख 88 हजार 731 रुपये की सफाई दिखाई गई है।
देखिए विजय नामक व्यक्ति ने लंबी चौड़ी जानकारी मांगी थी जो मैंने रिकॉर्ड के अनुसार ही दी है फिर भी कहीं त्रुटि रह गई हो सकती है बाकि मैं रिकॉर्ड और देख लूंगा।
जगवीर सिंह, ग्राम सचिव
आरटीआई का जवाब दे दिया गया है अगर कोई फर्क नजर आ रहा है तो मैं इस विषय में कागज देख कर ही कुछ बता पाऊंगा।
बलराज सिंह मलेठिया, बीडीपीओ ओढां