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नगर पालिका की एनओसी ना होने पर गुपचुप तरीके से करवाई थी रजिस्ट्री
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फ ऐलनाबाद स्थित तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर करके करवाई गई तीन रजिस्ट्री मामले में जांच के दौरान परतें खुलनी शुरू हो गई है। खुलासा हुआ है कि जो तीन रजिस्ट्री फर्जी हस्ताक्षर से की गई, उनके पास नगर पालिका की ना तो एनओसी थी और ना कि अन्य कागजात। अधूरे कागजात के साथ रजिस्ट्री करवा दी गई। इसलिए अब ना केवल पुलिस रजिस्ट्री करवाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी बल्कि रजिस्ट्री रद्द करवाने के लिए भी तहसील कार्यालय न्यायालय में जाएगा।
तहसील कार्यालय में हुए इस फर्जीवाड़े के बाद अधिकारियों ने पुराना रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है। रोटेशन अनुसार रजिस्ट्री की फाइलें मंगवाकर पता किया जा रहा है कि क्या सब कुछ सही है या नहीं। इसके अलावा जिन तीन रजिस्ट्री को नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर से किया गया, उनकी गहनता से जांच शुरू कर दी है। पता चला है कि तीनों रजिस्ट्री के दौरान प्रोपर्टी संबंधी कागजात अधूरे थे। इतना ही नहीं नगर पालिका से ली जाने वाली एनओसी भी साथ संलग्न नहीं थी। लेकिन समस्या ये है कि एक बार रजिस्ट्री हो जाने के बाद उसे रद्द करना आसान नहीं है। इसके लिए अब तहसील कार्यालय न्यायालय में जाएंगे और केस करना पड़ेगा।
ये है पूरा मामला
पिछले हफ्ते 10 सितंबर को ऐलनाबाद तहसील में रजिस्ट्री को लेकर बड़े बड़े गड़बड़ झाले का खुलासा हुआ। नायब तहसीलदार अजय कुमार की ओर से पुलिस में दी गई शिकायत में बताया गया कि 18 जून 2021 को वसीका नंबर 1503, 26 जुलाई 2021 को वसीका नंबर 2816 तथा 2817 पर उनके फर्जी हस्ताक्षर करके कंप्यूटर पर पंजीकरण करवाकर उन्हें बही नंबर-एक पर चस्पा कर दिया। डीसी अनीष यादव के संज्ञान में मामला सामने आते ही उन्होंने तुरंत प्रभाव ने प्राथमिक जांच करवाई। इसमें दो कर्मचारियों द्वारा अनियमितताएं किया जाना सामने आया तो डीसी ने तुरंत दोनों कर्मचारियों को ड्यूटी में अनियमितताएं बरतने पर सस्पेंड कर दिया। इतना ही नहीं अनुबंध के तौर पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने पर उसे भी अस्थायी रूप से हटा दिया है।
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वर्जन
एनओसी सहित अधूरे डॉक्यूमेंट्स की कमी मिली : नायब तहसीलदार
फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से की गई तीन रजिस्ट्री मामले में जो तीन रजिस्ट्री हुई है, उसकी जांच की गई है। पता चला है कि रजिस्ट्री के लिए फाइल में कागजात अधूरे थे और नगर पालिका से जारी होने वाली एनओसी भी नहीं थी। अब इन रजिस्ट्री को रद्द करने के लिए कोर्ट केस करना पड़ेगा। इसके अलावा हमने पुरानी रजिस्ट्री के रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है।
- अजय कुमार, नायब तहसीलदार, ऐलनाबाद।
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तहसील कार्यालय में हुए इस फर्जीवाड़े के बाद अधिकारियों ने पुराना रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है। रोटेशन अनुसार रजिस्ट्री की फाइलें मंगवाकर पता किया जा रहा है कि क्या सब कुछ सही है या नहीं। इसके अलावा जिन तीन रजिस्ट्री को नायब तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर से किया गया, उनकी गहनता से जांच शुरू कर दी है। पता चला है कि तीनों रजिस्ट्री के दौरान प्रोपर्टी संबंधी कागजात अधूरे थे। इतना ही नहीं नगर पालिका से ली जाने वाली एनओसी भी साथ संलग्न नहीं थी। लेकिन समस्या ये है कि एक बार रजिस्ट्री हो जाने के बाद उसे रद्द करना आसान नहीं है। इसके लिए अब तहसील कार्यालय न्यायालय में जाएंगे और केस करना पड़ेगा।
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ये है पूरा मामला
पिछले हफ्ते 10 सितंबर को ऐलनाबाद तहसील में रजिस्ट्री को लेकर बड़े बड़े गड़बड़ झाले का खुलासा हुआ। नायब तहसीलदार अजय कुमार की ओर से पुलिस में दी गई शिकायत में बताया गया कि 18 जून 2021 को वसीका नंबर 1503, 26 जुलाई 2021 को वसीका नंबर 2816 तथा 2817 पर उनके फर्जी हस्ताक्षर करके कंप्यूटर पर पंजीकरण करवाकर उन्हें बही नंबर-एक पर चस्पा कर दिया। डीसी अनीष यादव के संज्ञान में मामला सामने आते ही उन्होंने तुरंत प्रभाव ने प्राथमिक जांच करवाई। इसमें दो कर्मचारियों द्वारा अनियमितताएं किया जाना सामने आया तो डीसी ने तुरंत दोनों कर्मचारियों को ड्यूटी में अनियमितताएं बरतने पर सस्पेंड कर दिया। इतना ही नहीं अनुबंध के तौर पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका भी संदिग्ध पाए जाने पर उसे भी अस्थायी रूप से हटा दिया है।
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फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से की गई तीन रजिस्ट्री मामले में जो तीन रजिस्ट्री हुई है, उसकी जांच की गई है। पता चला है कि रजिस्ट्री के लिए फाइल में कागजात अधूरे थे और नगर पालिका से जारी होने वाली एनओसी भी नहीं थी। अब इन रजिस्ट्री को रद्द करने के लिए कोर्ट केस करना पड़ेगा। इसके अलावा हमने पुरानी रजिस्ट्री के रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है।
- अजय कुमार, नायब तहसीलदार, ऐलनाबाद।