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बीज और खाद देने से किया मना, दुकान की कुंडी लगा आराम फरमाने लगे कर्मचारी
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Wed, 16 Nov 2016 12:32 AM IST
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- फोटो : bureau
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भले ही सरकार के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने भी सरकारी और जरूरत वाले स्थानों पर 500 और 1000 के नोट चलाने के निर्देश जारी किए हों, लेकिन कुछ स्थानों पर निर्देशों की खिल्ली उड़ाई जा रही है।
ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सरकारी बीज और खाद की दुकान पर देखने को मिला। किसानों को बीज व खाद देने से मना कर दुकान की अंदर वाली कुंडी लगाकर कर्मचारी शाम तक आराम फरमाते रहे। गुस्साए किसानों ने दुकान के समक्ष नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया। शाम तक प्रशासन ने किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं किया।
जनता भवन रोड स्थित दि सिरसा को-ऑपरेटिव मार्केटिंग कम प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड की दुकान पर मंगलवार को पांच सौ और एक हजार के नोट लेने से इंकार कर दिया गया। इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन किया और मांग की कि सरकार के निर्देशों की पालना होनी चाहिए और किसानों को परेशान न किया जाए।
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गांव झोरड़ रोही के किसान भागीराम, रामस्वरूप, बली सिंह, गांव बरूवाली द्वितीय के किसान छिंद्र सिंह, दयासुख, फरवाईं के सागर, हांडीखेड़ा के निहाल सिंह, विजय कुमार सहित अनेक किसानों ने बताया कि वे सुबह से बीज और खाद लेने के लिए लाइन में लगे हुए थे।
दोपहर को जब उनका नंबर आया तो कर्मचारियों ने 500 और 1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया। कुछ किसान जैसे-तैसे कर नोट बदलवाकर लाए तो 100-100 के नोट देने पर भी बीज नहीं दिया गया। किसानों ने बताया कि कर्मचारियों ने दो बजे दुकान की अंदर से कुंडी लगा ली।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी शाम तक अपने परिचितों को पिछले दरवाजे से बीज-खाद देते रहे। किसानों का कहना है कि सरकार ने निर्देश जारी किए हुए हैं कि सरकारी दुकानों पर बीज व खाद लेने वाले किसानों से 24 नवंबर तक 500 और 1000 के नोट लिए जाएं, लेकिन यहां के कर्मचारियों को सरकार के निर्देशों की कोई परवाह नहीं है।
किसानों ने अपनी मांग को लेकर दुकान के आगे नारेबाजी भी की। इसके बाद शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची पर किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को भी फोन पर सूचित करना चाहा, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
किसानों ने चेतावनी दी है कि बुधवार को आरोपी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और 500 व 1000 के नोट नहीं चलाए गए तो आंदोलन शुरू होगा। इसको लेकर कुछ किसान संगठन भी रणनीति बना रहे हैं, ताकि आने वाले दिनों में किसानों को इस प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
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ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सरकारी बीज और खाद की दुकान पर देखने को मिला। किसानों को बीज व खाद देने से मना कर दुकान की अंदर वाली कुंडी लगाकर कर्मचारी शाम तक आराम फरमाते रहे। गुस्साए किसानों ने दुकान के समक्ष नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया। शाम तक प्रशासन ने किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं किया।
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जनता भवन रोड स्थित दि सिरसा को-ऑपरेटिव मार्केटिंग कम प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड की दुकान पर मंगलवार को पांच सौ और एक हजार के नोट लेने से इंकार कर दिया गया। इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन किया और मांग की कि सरकार के निर्देशों की पालना होनी चाहिए और किसानों को परेशान न किया जाए।
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गांव झोरड़ रोही के किसान भागीराम, रामस्वरूप, बली सिंह, गांव बरूवाली द्वितीय के किसान छिंद्र सिंह, दयासुख, फरवाईं के सागर, हांडीखेड़ा के निहाल सिंह, विजय कुमार सहित अनेक किसानों ने बताया कि वे सुबह से बीज और खाद लेने के लिए लाइन में लगे हुए थे।
दोपहर को जब उनका नंबर आया तो कर्मचारियों ने 500 और 1000 के नोट लेने से इंकार कर दिया। कुछ किसान जैसे-तैसे कर नोट बदलवाकर लाए तो 100-100 के नोट देने पर भी बीज नहीं दिया गया। किसानों ने बताया कि कर्मचारियों ने दो बजे दुकान की अंदर से कुंडी लगा ली।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी शाम तक अपने परिचितों को पिछले दरवाजे से बीज-खाद देते रहे। किसानों का कहना है कि सरकार ने निर्देश जारी किए हुए हैं कि सरकारी दुकानों पर बीज व खाद लेने वाले किसानों से 24 नवंबर तक 500 और 1000 के नोट लिए जाएं, लेकिन यहां के कर्मचारियों को सरकार के निर्देशों की कोई परवाह नहीं है।
किसानों ने अपनी मांग को लेकर दुकान के आगे नारेबाजी भी की। इसके बाद शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची पर किसानों की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को भी फोन पर सूचित करना चाहा, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
किसानों ने चेतावनी दी है कि बुधवार को आरोपी कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और 500 व 1000 के नोट नहीं चलाए गए तो आंदोलन शुरू होगा। इसको लेकर कुछ किसान संगठन भी रणनीति बना रहे हैं, ताकि आने वाले दिनों में किसानों को इस प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।