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चूहों ने खोद डाली भाखड़ा नहर की पटरी, कटाव से डूबी फसलें
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2015 01:13 AM IST
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चूहों द्वारा भाखड़ा नहर की पटरी में बिल बनाने से रविवार रात पानी के दबाव से लखुआना के पास इस नहर में 45 फीट का कटाव आ गया।
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इससे आसपास के गांवों में करीब 1400 एकड़ में खड़ी कपास, ग्वार और धान की फसल डूब गई। पानी के बहाव से नलकूप तथा बिजली के पोल भी गिर गए। ग्रामीण सुबह उठे तो खेतों में भरा पानी देख उन्हें नहर के टूटने का पता चला।
करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की मदद से ग्रामीणों ने नहर को पाट दिया। नहरी विभाग के अधिकारी चूहों के बिल बनाने की वजह से नहर टूटने का दावा कर रहे हैं,जबकि ग्रामीण विभाग पर लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि 65 साल पुरानी यह नहर बनने का बाद से पहली बार टूटी है।
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गांव लखुआना में एक ढाणी निवासी किसान नरसी राम ने सुबह करीब पांच खेत में पानी भरा देखा तो वह एक किलोमीटर दूर बह रही भाखड़ा नहर के नजदीक पहुंचा।
वहां देखा कि नहर में कटाव आ गया है। इसके बाद उनसे गांव के एक धार्मिक स्थल से नहर टूटने की मुनादी करवाई। ग्रामीणों की सूचना पर नहरी विभाग के जेई राजेंद्र व नवीन मौके पर पहुंचे और नहर में पानी कम करवाया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और डेरा अनुयायी अपने स्तर पर नहर को पाटने में जुट गए।
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गांव को बचाने के लिए बनाई दीवार
ग्रामीणों ने लखुआना में सरकारी और निजी स्कूल बंद करवा दिए और अपने-अपने घरों के आगे मिट्टी से भरे बैग लगा लिए। गांव की ओर बढ़ते पानी को रोकने के लिए एक दीवार बनाते हुए करीब पांच किलोमीटर लंबा मिट्टी का बांध बना दिया। सुबह करीब 11 बजे नहरी विभाग के एक्सईएन एसपी परिहार तथा आत्माराम मौके पर पहुंचे। आखिर करीब आठ घंटे बाद नहर को पूरी तरह से पाट दिया गया।
ग्रामीण: विभाग की लापरवाही
ग्रामीणो ने आरोप लगाया कि पंद्रह दिनों की नहरबंदी होने के बावजूद विभाग ने सफाई नहीं करवाई। दो साल से गिरा सफेदा आज भी नहर के बीच पड़ा है, जो नहर टूटने का कारण बना। उनका कहना था कि उनकी बर्बादी के लिए नहरी विभाग ही जिम्मेदार हैं।
विभाग: आरोप निराधार
नहरबंदी के दौरान विभाग ने मशीन लगाकर नहर की सफाई करवाई थी। समय-समय पर यह अभियान चलता है। किसानों के आरोप निराधार हैं। हरियाणा, पंजाब के साथ-साथ सब जगह बारिश से जल स्तर ज्यादा हो गया है। चूहों द्वारा बनाए गए बिल की वजह से नहर टूट सकती है।
-आत्मा राम, कार्यकारी अभियंता, नहरी विभाग (सर्कल)
रात को नहर में 2700 क्यूसेक पानी चल रहा था। नहर टूटने की आशंका के चलते 500 क्यूसेक पानी कम करवाया था। जिस क्षेत्र में नहर टूटी है, वह इस्केप क्षेत्र है। इसको कभी मुख्य ब्रांच के तौर पर प्रयोग किया जाता था। नहर के पास चूहे बहुत हैं, जो पटरी में अपना बिल बना लेते हैं। इससे पटरी पानी का दबाव नहीं झेल पाई।
-एसपी परिहार, कार्यकारी अभियंता, नहरी विभाग