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Sirsa News: रचना भाला फेंक में राज्य स्तर के लिए चयनित
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सिरसा।रचना भाला फेंकने का अभ्यास करती हुई। कोच
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सिरसा। गांव पोहड़का की बेटी रचना ने खेलों में अपनी मेहनत और लगन से नया मुकाम हासिल किया है। रचना का चयन भाला फेंक प्रतियोगिता में राज्य स्तर के लिए हुआ है। यह उपलब्धि गांव के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार गांव से किसी खिलाड़ी का चयन भाला फेंक जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में राज्य स्तर पर हुआ है।
रचना पिछले तीन महीनों से लगातार भाला फेंक का अभ्यास कर रही हैं। खेल मैदान में रोजाना घंटों पसीना बहाने के बाद उसने यह सफलता पाई है। मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति लगन ही रचना को इस मुकाम तक लेकर आई है। गांव के लोग भी उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रचना ने न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है। अब गांव की अन्य बेटियां भी उनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़ेंगी। रचना का कहना है कि यह उपलब्धि उसके लिए एक शुरुआत है। उनका सपना है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन करें और देश के लिए पदक जीतें।
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साधारण परिवार से हैं रचना
गांव पोहड़का की रचना साधारण परिवार से हैं। दो बहनों में से रचना सबसे छोटी हैं। सीमित साधनों के बावजूद रचना ने अपनी मेहनत और लगन से खेलों में बड़ा मुकाम हासिल किया है।
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कोच दिव्यांग ज्ञान ने किया प्रेरित तो शुरू किया अभ्यास
रचना को अभ्यास के लिए प्रेरणा उनके कोच ज्ञान सिंह से मिली। एक दिन रचना कोच दिव्यांग सिंह से मिली। इस दौरान कोच ने रचना को भाला फेंक में तैयारी करने को कहा। इस दौरान तीन महीने से रचना अभ्यास कर रही हैं। अपने गांव से चार किलोमीटर दूर भूर्टवाला में कोच के पास अभ्यास करने आती हैं। दिव्यांग होने के बावजूद ज्ञान सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाला फेंक में पदक जीते हैं। उनके मार्गदर्शन से ही रचना ने भाला फेंक में कदम रखा।
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पिता टेंट हाउस का करते हैं काम
रचना के पिता टेंट हाउस का काम करते हैं। आर्थिक रूप से साधारण परिवार से होने के बावजूद पिता ने बेटी को खेलों में आगे बढ़ने का पूरा सहयोग दिया।
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19 मीटर भाला फेंकने में पाई उपलब्धि
महज तीन महीने की मेहनत में ही रचना ने 19 मीटर तक भाला फेंकने में सफलता हासिल कर ली है। यही उपलब्धि उन्हें राज्य स्तर तक ले गई। रचना का चयन राज्यस्तरीय स्कूली गेम हुआ है। रचना ने जिलास्तरीय प्रतियोगिता में 19 मीटर भाला फेंक कर पहला स्थान प्राप्त किया है। रचना ने इतिहास रचकर अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा का मार्ग खोल दिया है।
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रचना बहुत ही मेहनती बच्ची है। उसने सिर्फ तीन माह में यह उपलब्धि प्राप्त की है। रचना के परिवार में कोई भी खेल से जुड़ा नहीं है।
-- - ज्ञान सिंह, कोच व अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी, सिरसा
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रचना पिछले तीन महीनों से लगातार भाला फेंक का अभ्यास कर रही हैं। खेल मैदान में रोजाना घंटों पसीना बहाने के बाद उसने यह सफलता पाई है। मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति लगन ही रचना को इस मुकाम तक लेकर आई है। गांव के लोग भी उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि रचना ने न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया है। अब गांव की अन्य बेटियां भी उनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़ेंगी। रचना का कहना है कि यह उपलब्धि उसके लिए एक शुरुआत है। उनका सपना है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन करें और देश के लिए पदक जीतें।
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साधारण परिवार से हैं रचना
गांव पोहड़का की रचना साधारण परिवार से हैं। दो बहनों में से रचना सबसे छोटी हैं। सीमित साधनों के बावजूद रचना ने अपनी मेहनत और लगन से खेलों में बड़ा मुकाम हासिल किया है।
कोच दिव्यांग ज्ञान ने किया प्रेरित तो शुरू किया अभ्यास
रचना को अभ्यास के लिए प्रेरणा उनके कोच ज्ञान सिंह से मिली। एक दिन रचना कोच दिव्यांग सिंह से मिली। इस दौरान कोच ने रचना को भाला फेंक में तैयारी करने को कहा। इस दौरान तीन महीने से रचना अभ्यास कर रही हैं। अपने गांव से चार किलोमीटर दूर भूर्टवाला में कोच के पास अभ्यास करने आती हैं। दिव्यांग होने के बावजूद ज्ञान सिंह ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाला फेंक में पदक जीते हैं। उनके मार्गदर्शन से ही रचना ने भाला फेंक में कदम रखा।
पिता टेंट हाउस का करते हैं काम
रचना के पिता टेंट हाउस का काम करते हैं। आर्थिक रूप से साधारण परिवार से होने के बावजूद पिता ने बेटी को खेलों में आगे बढ़ने का पूरा सहयोग दिया।
19 मीटर भाला फेंकने में पाई उपलब्धि
महज तीन महीने की मेहनत में ही रचना ने 19 मीटर तक भाला फेंकने में सफलता हासिल कर ली है। यही उपलब्धि उन्हें राज्य स्तर तक ले गई। रचना का चयन राज्यस्तरीय स्कूली गेम हुआ है। रचना ने जिलास्तरीय प्रतियोगिता में 19 मीटर भाला फेंक कर पहला स्थान प्राप्त किया है। रचना ने इतिहास रचकर अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा का मार्ग खोल दिया है।
रचना बहुत ही मेहनती बच्ची है। उसने सिर्फ तीन माह में यह उपलब्धि प्राप्त की है। रचना के परिवार में कोई भी खेल से जुड़ा नहीं है।