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Sirsa News: सीडीएलयू का पंजाबी विभाग भाषा संस्कृति व शोध में रच रहा नई इबारत
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के विद्यार्थी स्टाफ सदस्य के साथ।
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय (सीडीएलयू), सिरसा का पंजाबी विभाग भाषा, संस्कृति और शैक्षणिक शोध के क्षेत्र में निरंतर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। विभाग न केवल पंजाबी भाषा के शिक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, बल्कि इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध व नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को भी प्रोत्साहन दे रहा है।
विभाग की अध्यक्ष प्रो. रणजीत कौर ने बताया कि वर्तमान में विभाग दो वर्षीय एमए (पंजाबी) पाठ्यक्रम और एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स का संचालन कर रहा है, जो छात्रों को भाषा और संस्कृति के गहरे अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। एमए पंजाबी में 60 सीटों का प्रावधान है, जिसमें प्रवेश के लिए बीए ऑनर्स इन पंजाबी या 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री आवश्यक है।
वहीं, पंजाबी सर्टिफिकेट कोर्स की 30 सीटों पर बारहवीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। दोनों कोर्सों में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2025 निर्धारित की गई है। प्रो. कौर ने बताया कि विभाग तकनीक और पंजाबी अध्ययन के समन्वय की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहा है, जिससे छात्रों में समसामयिक भाषा कौशल और बहुसांस्कृतिक संवाद क्षमता विकसित हो सके।
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विभाग का विजन भाषा के संवर्धन के साथ-साथ नवाचार आधारित अध्यापन व शोध को बढ़ावा देना है। विभाग के सहायक प्रोफेसर गुरसाहिब सिंह ने बताया कि विभाग के कई विद्यार्थियों ने यूजीसी-नेट और जेआरएफ जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की हैं। अनेक पूर्व छात्र उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और डॉक्टोरल शोध में भी अग्रसर हैं।
विभाग समय-समय पर समकालीन विषयों पर राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और अतिथि व्याख्यानों का आयोजन करता रहा है, जिससे छात्रों को न केवल अकादमिक ज्ञान, बल्कि वास्तविक शोध अनुभव भी प्राप्त होता है। कुलपति प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन में विभाग निकट भविष्य में और भी अधिक संगोष्ठियों, सम्मेलन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बना रहा है।
यह स्पष्ट है कि सीडीएलयू का पंजाबी विभाग न केवल भाषा के संरक्षण और संवर्धन में बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे प्रयास भारतीय भाषाओं की महत्ता को स्थापित करते हुए उन्हें वैश्विक मंच पर स्थान दिलाने की दिशा में अहम कदम हैं
कॅरिअर के विकल्प
- शोध कार्य कर अकादमिक करियर को और आगे बढ़ाया जा सकता है।- सरकारी व निजी विद्यालयों/कॉलेजों में पंजाबी भाषा पढ़ाने का अवसर।
- राज्य और केंद्र सरकार की नौकरियों में पंजाबी भाषा अनुवादक या इंटरप्रेटर के रूप में कार्य।
- लेखक, कवि, साहित्यकार के रूप में पंजाबी साहित्य का सृजन।
- पंजाबी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो और टीवी चैनलों में संवाददाता, संपादक या अनुवादक के रूप में कार्य।
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विभाग की अध्यक्ष प्रो. रणजीत कौर ने बताया कि वर्तमान में विभाग दो वर्षीय एमए (पंजाबी) पाठ्यक्रम और एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स का संचालन कर रहा है, जो छात्रों को भाषा और संस्कृति के गहरे अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। एमए पंजाबी में 60 सीटों का प्रावधान है, जिसमें प्रवेश के लिए बीए ऑनर्स इन पंजाबी या 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री आवश्यक है।
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वहीं, पंजाबी सर्टिफिकेट कोर्स की 30 सीटों पर बारहवीं पास विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। दोनों कोर्सों में ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2025 निर्धारित की गई है। प्रो. कौर ने बताया कि विभाग तकनीक और पंजाबी अध्ययन के समन्वय की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहा है, जिससे छात्रों में समसामयिक भाषा कौशल और बहुसांस्कृतिक संवाद क्षमता विकसित हो सके।
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विभाग का विजन भाषा के संवर्धन के साथ-साथ नवाचार आधारित अध्यापन व शोध को बढ़ावा देना है। विभाग के सहायक प्रोफेसर गुरसाहिब सिंह ने बताया कि विभाग के कई विद्यार्थियों ने यूजीसी-नेट और जेआरएफ जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की हैं। अनेक पूर्व छात्र उत्तर भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और डॉक्टोरल शोध में भी अग्रसर हैं।
विभाग समय-समय पर समकालीन विषयों पर राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और अतिथि व्याख्यानों का आयोजन करता रहा है, जिससे छात्रों को न केवल अकादमिक ज्ञान, बल्कि वास्तविक शोध अनुभव भी प्राप्त होता है। कुलपति प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन में विभाग निकट भविष्य में और भी अधिक संगोष्ठियों, सम्मेलन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बना रहा है।
यह स्पष्ट है कि सीडीएलयू का पंजाबी विभाग न केवल भाषा के संरक्षण और संवर्धन में बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे प्रयास भारतीय भाषाओं की महत्ता को स्थापित करते हुए उन्हें वैश्विक मंच पर स्थान दिलाने की दिशा में अहम कदम हैं
कॅरिअर के विकल्प
- शोध कार्य कर अकादमिक करियर को और आगे बढ़ाया जा सकता है।- सरकारी व निजी विद्यालयों/कॉलेजों में पंजाबी भाषा पढ़ाने का अवसर।
- राज्य और केंद्र सरकार की नौकरियों में पंजाबी भाषा अनुवादक या इंटरप्रेटर के रूप में कार्य।
- लेखक, कवि, साहित्यकार के रूप में पंजाबी साहित्य का सृजन।
- पंजाबी समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो और टीवी चैनलों में संवाददाता, संपादक या अनुवादक के रूप में कार्य।