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Sirsa News: प्रोफेसर ने चेयरमैन के खिलाफ भेजी शिकायत
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में आ गया है। बुधवार को विश्वविद्यालय के लॉ विभाग की एक महिला प्रोफेसर ने विभाग के चेयरमैन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत राज्यपाल, कुलपति, पुलिस अधीक्षक व राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से कर दी।
महिला प्रोफेसर ने शिकायत में चेयरमैन डॉ. अशोक मक्कड़ के खिलाफ केस दर्ज उसे तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। महिला प्रोफेसर राज्यपाल व कुलपति से गुहार लगाई है कि आरोपी को विधि विभागाध्यक्ष के पद से तुरंत हटाया जाए। प्रोफेसर ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि उसे सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए। विश्वविद्यालय ने उसे केवल एक मई 2025 से अवकाश प्रदान किया है, लेकिन इसमें सवेतन मातृत्व अवकाश का अनुमोदन नहीं किया है।
जानकारी के अनुसार, लॉ विभाग में पार्ट टाइम शिक्षक के पद पर महिला प्रो रवि कार्यरत है। उनके पति भी विभाग के अंदर अनुबंधित प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है। दोनों अग्रसेन कॉलोनी में रहते हैं। प्रो रवि के पति प्रो. राकेश सैनी ने बताया कि उनकी पत्नी ने विभाग के नए विभागाध्यक्ष को 23 अप्रैल को ही प्रेग्नेंसी लीव के आवेदन दे दिया था। हाजिरी की सारी कॉपी मेल के माध्यम से भेज दी गई थी। वह बार बार हाजिरी रजिस्टर के साथ विवि में आने का दबाव बना रहे थे। अप्रैल माह की उन्हें सैलरी तक नहीं दी गई है। 9 मई को लेटर भी थमा दिया गया है कि आपको बिना पे के मैटरनिटी लीव पर भेजा जाता है। इसके बाद भी मंगलवार को बार बार छात्रों को घर पर भेजकर हाजिरी रजिस्टर लेकर आने को कहा। किसी तरह से वह कार्यालय पहुंची तो चेयरमेन ने उन्हें बातें सुनानी शुरू कर दी। मानसिक तनाव के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई। सिविल अस्पताल में लाया गया।
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महिला प्रोफेसर ने शिकायत में ये लिखा
मैं डॉ. रवि विधि विभाग में पार्ट-टाइम-टीचर के पद पर 13 मार्च, 2023 से कार्यरत हूं। मैं अनुसूचित जाति से संबंध रखती हूं। 13 मई, 2025 को डॉ. अशोक मक्कड़, विभागाध्यक्ष विधि विभाग द्वारा मुझे जबरन दोपहर करीब 12:15 बजे विद्यार्थियों के हाजिरी रजिस्टर उनके कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जमा करवाने का दबाव बनाया गया। जबकि मैं विभाग को 8 मई 2025 को सूचित कर चुकी हूं कि मैं 8 माह की गर्भवती हूं। उसके बाद भी विभागाध्यक्ष ने मुझे उनके कार्यालय बुलाया और मुझे मानसिक प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उनके कार्यालय में जाने के पश्चात डॉ. अशोक मक्कड़ द्वारा मुझे मेरी अवस्था को देखते हुए बैठने के लिए भी नहीं कहा गया। लगभग 05 मिनट बाद पास खड़े विभाग के छात्रों ने मुझे बैठने के लिए कुर्सी दी और कहा कि मैडम आप बैठ जाओ। विभागाध्यक्ष ने मुझे कार्यालय में बुलाकर जलील किया क्योंकि मैं विभाग में अनुसूचित जाति से सम्बन्धित एकमात्र प्राध्यापिका हूं। विभागाध्यक्ष ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया उसके बाद मेरा स्वास्थ्य खराब हो गया। तत्पश्चात् मुझे मेरे पति डॉ. राकेश कुमार नागरिक अस्पताल सिरसा ले गए और इमरजेंसी वार्ड में मेरा इलाज शुरू करवाया। उसके बाद इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. साहब की सलाह पर मुझे स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास भेजा गया और वहां पर डॉ. राहुल गर्ग द्वारा मेरा उपचार शुरू किया गया। डॉ. साहब ने सलाह दी यदि आप निरंतर मानसिक तनाव लेते रहेंगे तो यह आपको और आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा और जान का खतरा भी बन सकता है। इसलिए उपचार के उपरांत मुझे लगभग 05 घंटों के बाद नागरिक अस्पताल सिरसा से घर पर लाया गया।
-- -- -- -- -- -किसी भी महिला प्रोफेसर को नहीं बुलाया है। एक छात्र की हाजिरी कम थी तो उस मामले में उनसे बात की गई थी। आरोप बेबुनियाद हैं।
- प्रो अशोक मक्कड़, चेयरमैन लॉ विभाग
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महिला प्रोफेसर ने शिकायत में चेयरमैन डॉ. अशोक मक्कड़ के खिलाफ केस दर्ज उसे तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। महिला प्रोफेसर राज्यपाल व कुलपति से गुहार लगाई है कि आरोपी को विधि विभागाध्यक्ष के पद से तुरंत हटाया जाए। प्रोफेसर ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि उसे सवेतन मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए। विश्वविद्यालय ने उसे केवल एक मई 2025 से अवकाश प्रदान किया है, लेकिन इसमें सवेतन मातृत्व अवकाश का अनुमोदन नहीं किया है।
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जानकारी के अनुसार, लॉ विभाग में पार्ट टाइम शिक्षक के पद पर महिला प्रो रवि कार्यरत है। उनके पति भी विभाग के अंदर अनुबंधित प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है। दोनों अग्रसेन कॉलोनी में रहते हैं। प्रो रवि के पति प्रो. राकेश सैनी ने बताया कि उनकी पत्नी ने विभाग के नए विभागाध्यक्ष को 23 अप्रैल को ही प्रेग्नेंसी लीव के आवेदन दे दिया था। हाजिरी की सारी कॉपी मेल के माध्यम से भेज दी गई थी। वह बार बार हाजिरी रजिस्टर के साथ विवि में आने का दबाव बना रहे थे। अप्रैल माह की उन्हें सैलरी तक नहीं दी गई है। 9 मई को लेटर भी थमा दिया गया है कि आपको बिना पे के मैटरनिटी लीव पर भेजा जाता है। इसके बाद भी मंगलवार को बार बार छात्रों को घर पर भेजकर हाजिरी रजिस्टर लेकर आने को कहा। किसी तरह से वह कार्यालय पहुंची तो चेयरमेन ने उन्हें बातें सुनानी शुरू कर दी। मानसिक तनाव के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई। सिविल अस्पताल में लाया गया।
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महिला प्रोफेसर ने शिकायत में ये लिखा
मैं डॉ. रवि विधि विभाग में पार्ट-टाइम-टीचर के पद पर 13 मार्च, 2023 से कार्यरत हूं। मैं अनुसूचित जाति से संबंध रखती हूं। 13 मई, 2025 को डॉ. अशोक मक्कड़, विभागाध्यक्ष विधि विभाग द्वारा मुझे जबरन दोपहर करीब 12:15 बजे विद्यार्थियों के हाजिरी रजिस्टर उनके कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जमा करवाने का दबाव बनाया गया। जबकि मैं विभाग को 8 मई 2025 को सूचित कर चुकी हूं कि मैं 8 माह की गर्भवती हूं। उसके बाद भी विभागाध्यक्ष ने मुझे उनके कार्यालय बुलाया और मुझे मानसिक प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उनके कार्यालय में जाने के पश्चात डॉ. अशोक मक्कड़ द्वारा मुझे मेरी अवस्था को देखते हुए बैठने के लिए भी नहीं कहा गया। लगभग 05 मिनट बाद पास खड़े विभाग के छात्रों ने मुझे बैठने के लिए कुर्सी दी और कहा कि मैडम आप बैठ जाओ। विभागाध्यक्ष ने मुझे कार्यालय में बुलाकर जलील किया क्योंकि मैं विभाग में अनुसूचित जाति से सम्बन्धित एकमात्र प्राध्यापिका हूं। विभागाध्यक्ष ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया उसके बाद मेरा स्वास्थ्य खराब हो गया। तत्पश्चात् मुझे मेरे पति डॉ. राकेश कुमार नागरिक अस्पताल सिरसा ले गए और इमरजेंसी वार्ड में मेरा इलाज शुरू करवाया। उसके बाद इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. साहब की सलाह पर मुझे स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास भेजा गया और वहां पर डॉ. राहुल गर्ग द्वारा मेरा उपचार शुरू किया गया। डॉ. साहब ने सलाह दी यदि आप निरंतर मानसिक तनाव लेते रहेंगे तो यह आपको और आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होगा और जान का खतरा भी बन सकता है। इसलिए उपचार के उपरांत मुझे लगभग 05 घंटों के बाद नागरिक अस्पताल सिरसा से घर पर लाया गया।
- प्रो अशोक मक्कड़, चेयरमैन लॉ विभाग