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सीडीएलयू पीएचडी मामला: आपत्ति जताने वाले ने वापस ले ली थी शिकायत, फिर भी सीडीएलयू ने दोबारा करवा दी प्रवेश परीक्षा

Wed, 09 Mar 2022 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो भूपेंद्र पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
भूपेंद्र पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 09 Mar 2022 10:28 PM IST
सार

पीएचडी के कोर्स वर्क को लेकर अब नियम बदलने की तैयारी की बात सामने आ रही है। वीआईपी दाखिला को देखते हुए सीडीएलयू ऑनलाइन मोड में कोर्स वर्क योजना बना रही है।

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PhD case: The person who raised the objection withdrew the complaint, yet the CDLU got the entrance exam done again
सीडीएलयू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के सिरसा में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में पीएचडी के दाखिला को लेकर हुए घटनाक्रम में नए खुलासे हो रहे हैं। जिस विद्यार्थी ने प्रवेश परीक्षा के दौरान हिंदी में प्रश्न पत्र दिए जाने की शिकायत की थी, बाद में उसने अपनी आपत्ति वापस ले ली और जल्द रिजल्ट जारी करने की गुजारिश भी की।

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लेकिन सीडीएलयू ने उसकी नहीं सुनी और दोबारा प्रवेश परीक्षा करवा डाली। इतना ही नहीं सीडीएलयू ने बिना किसी डिमांड के एक नियम और बदल दिया जिसमें कहा गया कि जो विद्यार्थी पहली प्रवेश परीक्षा में गैरहाजिर रहे और अगर वह रद्द हो गई तो वे भी दूसरी बार ली जा रही परीक्षा में बैठ सकेंगे।
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पीएचडी को लेकर हुए दाखिले में वीआईपी दाखिले के दौरान पहली बार 17 फरवरी को प्रवेेश परीक्षा हुई। लेकिन परीक्षा के बाद हिसार के एक छात्र रविंद्र कुमार ने ई-मेल से शिकायत भेजकर कहा कि अंग्रेजी में पेपर आया है, जबकि हिंदी और अंग्रेजी दोनों विकल्प होने चाहिए थे। इस पर सीडीएलयू ने जनसंचार विभाग का परिणाम रोक अन्य विभागों के लिए हुई प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया।
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साथ ही वीसी प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने कमेटी का गठन कर दिया। कमेटी ने फैसला लेने में समय लगाया तो रविंद्र कुमार ने दोबारा सीडीएलयू को ई मेल भेजकर कहा कि वह अपनी शिकायत वापस लेता है और सीडीएलयू जल्द परिणाम जारी करे। लेकिन सीडीएलयू ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और दोबारा परीक्षा करवाने का शेड्यूल बना दिया।

लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इसके साथ ही सीडीएलयू ने एक और नियम जोड़ दिया। इसके अनुसार व्यवस्था की गई कि जो विद्यार्थी पहली बार परीक्षा में नहीं बैठ पाया, वह दूसरी बार की परीक्षा में बैठ पाएगा। इसके बाद 6 मार्च को हुई प्रवेश परीक्षा में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला शामिल हुए।  

अब पीएचडी ऑर्डिनेंस में बदलाव की तैयारी
सीडीएलयू के 16 विभागों में पीएचडी के लिए दाखिला हो चुके हैं। इससे पहले जो पीएचडी ऑर्डिनेंस तैयार किया गया, उसमें स्पष्ट रूप से नियम बनाया गया है कि पहले 6 महीने का कोर्स वर्क होगा। कोर्स वर्क के दौरान नियमित कक्षाएं लगेंगी। इसमें सभी शोधार्थियों को शामिल होना जरूरी है। लगातार 7 दिन तक जो शोधार्थी कक्षा से गैरहाजिर रहेगा, उसका नाम काट दिया जाएगा।

सीडीएलयू के सूत्र बताते हैं कि वीआईपी शोधार्थियों को राहत देने के लिए अब सीडीएलयू पीएचर्डी ऑर्डिनेंस में ही बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कोर्स वर्क के लिए ऑफलाइन कक्षाओं के बजाय ऑनलाइन मोड से दिए जाने की सुविधा देने की तैयारी है।

इससे वीआईपी शोधार्थियों को लाभ दिया जा सकेगा। इस संबंध में डीन ऑफ एकेडमिक प्रो. सुरेश गहलावत से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि पीएचडी ऑर्डिनेंस में बदलाव संभव है लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है और न ही कोई प्रस्ताव आया है।

रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर शेयर की अमर उजाला की खबर, सरकार पर उठाए सवाल
सीडीएलयू में पीएचडी प्रवेश को लेकर प्रकाशित अमर उजाला के समाचार को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। उन्होंने सीडीएलयू में डिप्टी सीएम के पीएचडी में दाखिले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लिखा कि पर्ची, खर्ची, मेरिट, नियम, कायदे, बस हरियाणा के मारे-मारे फिरते युवाओं के लिए हैं, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के लिए नहीं।

साथ ही उन्होंने लिखा है कि क्या खट्टर सरकार जवाब देगी- एक परीक्षा के लिए दो बार पेपर क्यों? क्या दुष्यंत पहली परीक्षा में बैठे? मेरिट सूची का स्वरूप क्यों बदला? ये सवाल उठाते हुए रणदीप सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

 

पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर शिकायत आई थी कि हिंदी में भी विकल्प होना चाहिए था। लेकिन जब तक आपत्ति वापस लेने का पत्र आया, तब तक परीक्षा का शेड्यूल बना चुके थे और प्रश्न पत्र भी दोबारा छपवा चुके थे। इसलिए परीक्षा रद्द करना संभव नहीं था। साथ ही सभी विद्यार्थियों के लिए नई सुविधा भी दी गई थी कि जो पहली परीक्षा में नहीं बैठ पाए, वे भी दूसरी बार की परीक्षा में बैठ सकते थे। - प्रो. राजकुमार सलार, परीक्षा नियंत्रक, सीडीएलयू, सिरसा।

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