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पीएचडी दाखिला प्रकरण : वीआईपी के लिए फिर बदला नियम, अब ऑनलाइन-ऑफलाइन कक्षाएं लगाने का विकल्प

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Mar 2022 11:48 PM IST
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PhD Admission Case: Rules changed again for VIPs, now option to conduct online-offline classes
विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन। - फोटो : Sirsa
सिरसा। चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी ने पीएचडी के वीआईपी स्कॉलर्स को राहत देने के लिए एक और अहम फैसला लिया है। पूर्व के नियम में बदलाव करते हुए अब फैसला लिया है कि पीएचडी कोर्स वर्क के लिए सभी विभागों में कक्षाएं बलेंडेड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में चलेंगी। इस फैसले से पीएचडी स्कॉलर्स को राहत मिली है लेकिन प्राध्यापकों के लिए नई समस्या आ गई है। अब प्राध्यापकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में कक्षाएं लेनी पड़ेंगी। इससे उनका वर्कलोड दोगुना होगा। इससे पहले वीआईपी दाखिला के लिए पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने मेरिट सूची का स्वरूप ही बदल डाला था। इस कारण मामला विवादित हो गया।
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सीडीएलयू के डीन ऑफ अकेडमिक की ओर से 21 मार्च को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके अनुसार अब पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाएं बलेंडेड मोड में चलेंगी। इस संबंध में सभी डीन और विभागों के चेयरमैन की बैठक हुई थी। उस नोटिफिकेशन में उस बैठक का हवाला दिया गया है जो कोरोनाकाल को देखते हुए ऑनलाइन-ऑफलाइन कक्षाओं के लिए हुई थी। लेकिन अब कोरोना का ज्यादा प्रभाव नहीं है और सभी कक्षाएं ऑफलाइन मोड में चल रही हैं। इतना ही नहीं परीक्षाएं भी सभी ऑफलाइन मोड में हुई। हालांकि सामान्य परीक्षाओं से पहले कुछ विद्यार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षा करवाए जाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किए लेकिन उस समय सीडीएलयू प्रशासन का स्पष्ट रूप से कहना था कि कोई भी कक्षा और परीक्षा ऑनलाइन नहीं होगी लेकिन अब विश्वविद्यालय ने अपना ही फैसला बदल डाला। संवाद
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ये है पूरा मामला
सीडीएलयू ने पीएचडी में दाखिले के लिए फरवरी में प्रक्रिया शुरू की। 16 विभागों में पीएचडी की सीटों के लिए दाखिला लेने के लिए आवेदन हुए। आवेदन के बाद 20 फरवरी को सभी विभागों में पीएचडी में दाखिला के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवारों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया और इसके बाद प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों के आधार पर मेरिट बनाकर सूची सार्वजनिक की गई। लेकिन पत्रकारिता विभाग की परीक्षा के बाद एक उम्मीदवार ने शिकायत कर दी जिसमें हिंदी और अंग्रेजी में प्रश्नपत्र की मांग की गई। इस पर कमेटी का गठन कर दोबारा प्रवेश परीक्षा का फैसला सीडीएलयू ने लिया। 6 मार्च को दोबारा परीक्षा हुई। खास बात ये रही कि दोबारा हुई प्रवेश परीक्षा में वीआईपी भी शामिल हुए।
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पक्ष रखने से कतराते रहे अधिकारी
इस संबंध में जब सीडीएलयू के अधिकारियों का पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो कोई भी अधिकारी अधिकारिक रूप से सामने नहीं आया। कुलपति डॉ. अजमेर सिंह मलिक ने भी फोन रिसीव नहीं किया।
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