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Sirsa News: तापमान बढ़ने व नहरी पानी में कटौती से लोग परेशान, सूखने लगी गेहूं की फसल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2025 11:35 PM IST
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People worried due to increase in temperature and cut in canal water, wheat crop started drying up
तापमान बढ़ने के कारण गेहूं में आया पीलापन दिखाता किसान। संवाद
नरेश बैनीवाल
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चोपटा। तापमान बढ़ने और नहरी पानी में कटौती से चोपटा क्षेत्र में गेहूं और सरसों की फसलों में नुकसान होने लगा है। गेहूं में पीलापन आने लगा है, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

किसान की मानें तो सरकार ने नहरी पानी की कटौती कर विश्वासघात किया है। पानी नहीं मिलने के कारण फसल सूखने लगी है। भूमिगत पानी की गुणवत्ता बेहतर नहीं होने के कारण फसलों में उसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। पानी की कमी का सीधा असर गेहूं , सरसों और चने की उत्पादन क्षमता पर पड़ेगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि वह फसलों के लिए पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी उपलब्ध करवाए।
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राजस्थान की सीमा से सटे चोपटा खंड के गांव जोगीवाला, चाहरवाला, रामपुरा बगड़िया, कुम्हारिया, कागदाना, खेड़ी, गुसाईंआना, राजपुरा साहनी, रामपुरा ढिल्लों, जोड़किया, बरासरी, जमाल, रुपावास, रायपुर, गिगोरानी, शाहपुरिया सहित कई गांवों में नहरी पानी में कटौती के कारण फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार चोपटा खंड में करीब 60000 एकड़ में रबी की फसल सिंचाई के अभाव में पकने से पहले ही सूखने लग गई है।
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किसान रामकुमार, जगदीश, महेंद्र सिंह, विक्रम सिंह आदि ने बताया कि पहले किसानोंं को नहर का पानी 15 दिनों तक मिलता था। अब इस सीजन में एक सप्ताह यानी सात दिन नहरी पानी कर दिया गया है। फरवरी में मौसम गर्म होने के कारण नहरी पानी फसलों की सिंचाई के लिए नहीं मिल रहा है। इससे फसलों पर बुरा असर देखने को मिल रहा है।





दो सप्ताह नहरों में पानी उपलब्ध करवाने की मांग

किसान कृष्ण कुमार, राजेश कुमार, कुलदीप का कहना है कि रबी की फसल को बचाने के लिए उन्हें जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इस क्षेत्र में अधिकतर ट्यूबवेलों का पानी खारा है। इसका फसलों में सिंचाई के लिए प्रयोग नहीं कर सकते हैं। सरकार इसी तरह नहरी पानी में कटौती करती रही तो सरसों, गेहूं व चने का उत्पादन बिल्कुल ही काफी कम होगा। किसान सुल्तान सिंह, विकास कुमार, हरदत्त का कहना है कि पहले महीने में 2 सप्ताह के लिए नहर में पानी आता था, अब नहर में एक सप्ताह पानी आता है। सरकार से अपील है कि दो सप्ताह पानी नहरों में उपलब्ध करवाए। सरसों गेहूं चने इत्यादि की फसल में सिंचाई के पानी की सख्त आवश्यकता है ।



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सरकार ने नहरी पानी में कटौती कर दी है। सिरसा और फतेहाबाद में नहरी पानी की कमी के कारण फसल खराब हो रही है। इसके लिए 23 फरवरी को रैली भी रखी गई। इसमें सरकार से मांग की जाएगी कि नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में दिया जाए व कई अन्य मांगों को भी उठाया जाएगा। - मुकेश चाहरवाला, ब्लॉक प्रधान, पगड़ी संभाल जटा किसान संघर्ष समिति। फोटो - 23


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इस समय सरसों व गेंहू की फसल को सिंचाई की सख्त आवश्यकता है। चोपटा खंड में 38000 हेक्टेयर में गेहूं, 23000 हेक्टेयर में सरसों, 2050 हेक्टेयर में चना व 1200 हेक्टेयर में जौ, चारा व अन्य फसलों की बिजाई की गई है। पानी की कमी से फसलों का उत्पादन गिर जाएगा। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए समय पर सिंचाई करना जरूरी है। डॉ. शलैंद्र सहारण, कृषि विकास अधिकारी।
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