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Sirsa News: राष्ट्रीय लोक अदालत में 4110 केसों में से 3932 का हुआ निपटारा
Sat, 09 Mar 2024 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 09 Mar 2024 11:48 PM IST
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सिरसा। न्यायालय परिसर सिरसा, उपमंडल न्यायालय परिसर डबवाली व ऐलनाबाद में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनुराधा ने बताया कि इस लोक अदालत में सभी तरह के न्यायालयों में विचाराधीन केस निपटारे के लिए रखे गए। जिनमें मुख्यतः चेक बाउंस, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना, घरेलू विवाद, बिजली व पानी से संबंधित विवाद, दीवानी व फौजदारी विवाद शामिल थे।
इस लोक अदालत में न्यायालयों में विचाराधीन कुल 4110 केसों में से 3932 का निपटारा किया गया। जिनमें 19,84,82,495/-की राशि समायोजित की गई। इस दौरान कुल 6 बेंचों का गठन किया गया। जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन किनरा, प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुमित गर्ग, सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सलोनी गुप्ता, सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विशाल श्योकंद, सब-डिविजन ऐलनाबाद में सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मनोज दहिया तथा डबवाली में सिविल जज (सीनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार शामिल रहे। लोक अदालत की प्रक्रिया बड़ी सरल एवं संक्षिप्त है। क्योंकि इसमें दोनों पक्षों आमने-सामने बैठाकर बातचीत द्वारा समझौता करवाया जाता है। जिससे उनका आपसी मनमुटाव समाप्त हो जाता है। लोक अदालत में हुए समझौते की कोई अपील भी नहीं की जा सकती है। प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर लोक अदालत करवाई जाती है।
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इस लोक अदालत में न्यायालयों में विचाराधीन कुल 4110 केसों में से 3932 का निपटारा किया गया। जिनमें 19,84,82,495/-की राशि समायोजित की गई। इस दौरान कुल 6 बेंचों का गठन किया गया। जिसमें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन किनरा, प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुमित गर्ग, सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सलोनी गुप्ता, सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी विशाल श्योकंद, सब-डिविजन ऐलनाबाद में सिविल जज (जूनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मनोज दहिया तथा डबवाली में सिविल जज (सीनियर डिविजन) एवं न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार शामिल रहे। लोक अदालत की प्रक्रिया बड़ी सरल एवं संक्षिप्त है। क्योंकि इसमें दोनों पक्षों आमने-सामने बैठाकर बातचीत द्वारा समझौता करवाया जाता है। जिससे उनका आपसी मनमुटाव समाप्त हो जाता है। लोक अदालत में हुए समझौते की कोई अपील भी नहीं की जा सकती है। प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर लोक अदालत करवाई जाती है।
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