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Sirsa News: बस यादें ही शेष...अपनों की तस्वीर देख छलका पीड़ित परिवारों का दर्द

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Dec 2025 11:02 PM IST
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Only memories remain... the pain of the affected families spilled out after seeing the pictures of their loved ones.
डबवाली।डबवाली में हुए अ​ग्नि कांड की30वीं बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद शहरवासी। संवाद
डबवाली। वक्त की रेत पर 30 साल बीत गए, लेकिन डबवाली के दिल पर लगी आग की तपिश आज भी वैसी ही महसूस होती है। 23 दिसंबर 1995 की वह दोपहर, जिसने सैकड़ों घरों के सपने राख में बदल दिए थे, मंगलवार को फिर आंखों में उतर आई। स्मारक स्थल पर जब मासूम बच्चों और दिवंगतों की तस्वीरों पर श्रद्धा के फूल चढ़े, तो सिसकियां खुद-ब-खुद हवा में घुल गईं।
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हर नम आंख, हर बुझा चेहरा यही गवाही दे रहा था कि यह त्रासदी सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आज भी डबवाली की धड़कनों में जिंदा एक दर्दनाक सच है। मंगलवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अग्नि पीड़ित परिवारों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शहरवासियों ने अग्निकांड स्मारक स्थल पर पहुंचकर दिवंगत आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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स्मारक स्थल पर लगी उन मासूम बच्चों और अन्य दिवंगतों की तस्वीरों को देखकर पीड़ित परिवारों का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा। कई परिजनों की आंखें नम हो गईं और माहौल गमगीन हो गया। हर चेहरा उस त्रासदी की यादों में खोया नजर आया, जिसे डबवाली आज भी भूल नहीं पाया है।
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इस श्रद्धांजलि सभा में विधायक आदित्य देवीलाल, पूर्व विधायक अमित सिहाग, चेयरमैन देव कुमार शर्मा, नगर परिषद चेयरमैन टेकचंद छाबड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष रेणु शर्मा, चेयरमैन सतीश जग्गा, सर्वजीत सिंह मसीतां, कुलदीप गदराणा, एसडीएम डबवाली अर्पित संगल, पुलिस अधीक्षक डबवाली निकिता खट्टर सहित विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने अग्निकांड में जान गंवाने वाले 442 लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए रखा मौन

अग्निकांड के समय दोपहर 1 बजकर 47 मिनट पर ठीक उसी क्षण, जब 30 वर्ष पूर्व आग की भयावह लपटों ने सैकड़ों जिंदगियों को लील लिया था, सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। इससे पहले सुबह स्मारक स्थल पर हवन-यज्ञ और श्री सुखमणी साहिब के पाठ का आयोजन किया गया व सरबत के भले की अरदास की गई। श्रद्धांजलि सभा के दौरान अग्निकांड पीड़ित संघ के प्रतिनिधि रमेश सचदेवा ने मंच संचालन करते हुए पीड़ितों की पीड़ा को एक बार फिर सामने रखा। उन्होंने अग्निकांड स्मारक को राजकीय स्मारक घोषित करने की मांग को उठाया। उन्होंने कहा कि बीते 30 वर्षों में प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों की सरकारें बनीं, लेकिन अग्नि पीड़ितों की मांगों को आज तक गंभीरता से नहीं लिया गया, जिससे पीड़ित परिवारों में गहरी निराशा है।


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23 दिसंबर को फायर सेफ्टी दिवस मनाने की उठाई मांग

डबवाली अग्निकांड में 442 लोगों की जान गई, वहीं अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जो आज भी शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं। अग्निकांड पीड़ित संघ की मांगों पर फायर विक्टिम एसोसिएशन की ओर से विनोद बंसल एवं अन्य सदस्य लंबे समय से इस स्मारक को राजकीय स्मारक घोषित करवाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस दर्दनाक घटना को इतिहास में सुरक्षित रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से सबक लेने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही वक्ताओं ने 23 दिसंबर को फायर सेफ्टी दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया। श्रद्धांजलि सभा का समापन दिवंगत आत्माओं की शांति और पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना के साथ हुआ। डबवाली ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यह त्रासदी भले ही 30 वर्ष पुरानी हो गई हो, लेकिन इसकी टीस आज भी हर दिल में जीवित है।
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