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Sirsa News: मोह काे त्याग कर परमात्मा को करना चाहिए याद
Mon, 08 Sep 2025 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 08 Sep 2025 10:58 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद। स्रोत : आयोजक
सिरसा। अखिल भारतीय धर्म सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद महाराज ने अनाज मंडी स्थित श्री श्याम बगीची धाम में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा का पाठ किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण एक सिद्धस्त कर्मयोगी थे। उन्होंने लुप्त हुई कर्मयोग विद्या का पुर्नद्धार किया। विश्व को गीता के ज्ञान का अमर संदेश देकर उन्होंने मानवता पर महान उपकार किया। गीता ज्ञान के कर्मयोग की अनूठी कला को मानव अपने जीवन में उतार कर देवता बन सकता है।
स्वामी ने कहा कि मानव को इस सांसारिक बंधनों के मोह को त्याग कर परमात्मा को याद करना चाहिए ताकि वो दुख के समय मानव को तार सके। मनुष्य को आज भगवान की प्राप्ति के लिए जंगलों व पर्वतों पर जाने की आवश्यकता नहीं है। मानव गृहस्थी का पालन करते हुए भी अपनी मंजिल पा सकता है।
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उन्होंने भगवान राम, कृष्ण और राजा जनक का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने गृहस्थ में रहते हुए भी निर्लेप नारायण रहकर मोक्ष की मंंजिल को पा लिया। वैसे ही यदि मानव भी इस भाग-दौड़ की जिंदगी में से थोड़ा सा समय निकालकर भक्ति में लगाए तो वो अपना जीवन संवार सकता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में कोई भी अपना नही है सभी स्वार्थी है। अपना कोई है तो वह भगवान है जो जीव को दुख में याद करने पर संकट की घड़ी से उबारता है।
इस मौके पर अखिल भारतीय धर्मसभा के संरक्षक महेश सुरेकां, प्रधान गौरव स्वामी, रतन सिंगला, हनुमान बंसल, हेमंत दड़ोलिया, पवन मित्तल, धनश्याम बंसल, अशोक गोयल, रवि मरोदिया, पूर्ण जोशी, योगेश शर्मा, अशोक गोयल व अन्य मौजूद रहे।
उन्होंने हाथी और मगरमच्छ का प्रकरण सुनाते हुए कहा कि गजेंद्र नाम का हाथी त्रिकुट पर्वत पर अपने परिवार के साथ रहता था। उन्होंने कहा कि एक समय की बात है हाथी का परिवार प्यास लगने पर पर्वत के साथ लगते सरोवर में पानी पीने गया। वहां पानी पीने के बाद हाथी का परिवार जलक्रीड़ा करने लगा ,इतने में पानी में रहने वाले मगरमच्छ ने हाथी का पांव पकड़ लिया और पानी के भीतर ले गया।
जब हाथी का पूरा शरीर पानी में चला गया तो उसके परिवार के लोग पत्नी, भाई, बच्चे उसे छोड़कर अपने घर को चल दिए। हाथी गजेंद्र ने जब देखा कि इस संकट की घड़ी में तेरे अपने तुझे छोड़ गए तो उसने भगवान को याद किया । तब भगवान श्री कृष्ण ने आकर सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ की गर्दन काट कर गजेंद्र नाम के हाथी को बचाया। हाथी तब यह अहसास हुआ कि बुरे समय में कोई भी अपना नही होता, संकट के समय सभी संगी-साथी साथ छोड़ देते है।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण एक सिद्धस्त कर्मयोगी थे। उन्होंने लुप्त हुई कर्मयोग विद्या का पुर्नद्धार किया। विश्व को गीता के ज्ञान का अमर संदेश देकर उन्होंने मानवता पर महान उपकार किया। गीता ज्ञान के कर्मयोग की अनूठी कला को मानव अपने जीवन में उतार कर देवता बन सकता है।
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स्वामी ने कहा कि मानव को इस सांसारिक बंधनों के मोह को त्याग कर परमात्मा को याद करना चाहिए ताकि वो दुख के समय मानव को तार सके। मनुष्य को आज भगवान की प्राप्ति के लिए जंगलों व पर्वतों पर जाने की आवश्यकता नहीं है। मानव गृहस्थी का पालन करते हुए भी अपनी मंजिल पा सकता है।
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उन्होंने भगवान राम, कृष्ण और राजा जनक का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने गृहस्थ में रहते हुए भी निर्लेप नारायण रहकर मोक्ष की मंंजिल को पा लिया। वैसे ही यदि मानव भी इस भाग-दौड़ की जिंदगी में से थोड़ा सा समय निकालकर भक्ति में लगाए तो वो अपना जीवन संवार सकता है। उन्होंने कहा कि इस संसार में कोई भी अपना नही है सभी स्वार्थी है। अपना कोई है तो वह भगवान है जो जीव को दुख में याद करने पर संकट की घड़ी से उबारता है।
इस मौके पर अखिल भारतीय धर्मसभा के संरक्षक महेश सुरेकां, प्रधान गौरव स्वामी, रतन सिंगला, हनुमान बंसल, हेमंत दड़ोलिया, पवन मित्तल, धनश्याम बंसल, अशोक गोयल, रवि मरोदिया, पूर्ण जोशी, योगेश शर्मा, अशोक गोयल व अन्य मौजूद रहे।
उन्होंने हाथी और मगरमच्छ का प्रकरण सुनाते हुए कहा कि गजेंद्र नाम का हाथी त्रिकुट पर्वत पर अपने परिवार के साथ रहता था। उन्होंने कहा कि एक समय की बात है हाथी का परिवार प्यास लगने पर पर्वत के साथ लगते सरोवर में पानी पीने गया। वहां पानी पीने के बाद हाथी का परिवार जलक्रीड़ा करने लगा ,इतने में पानी में रहने वाले मगरमच्छ ने हाथी का पांव पकड़ लिया और पानी के भीतर ले गया।
जब हाथी का पूरा शरीर पानी में चला गया तो उसके परिवार के लोग पत्नी, भाई, बच्चे उसे छोड़कर अपने घर को चल दिए। हाथी गजेंद्र ने जब देखा कि इस संकट की घड़ी में तेरे अपने तुझे छोड़ गए तो उसने भगवान को याद किया । तब भगवान श्री कृष्ण ने आकर सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ की गर्दन काट कर गजेंद्र नाम के हाथी को बचाया। हाथी तब यह अहसास हुआ कि बुरे समय में कोई भी अपना नही होता, संकट के समय सभी संगी-साथी साथ छोड़ देते है।