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डीएफएससी को मांगी गई सूचना देने में देरी के आरोप में नोटिस जारी
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जनसूचना के अधिकार अधिनियम के उल्लंघन करने करने तथा समय पर सूचना प्रदान न करने पर राज्य सूचना आयोग ने सिरसा के जिला खाद्य आपूर्ति खाद्य नियंत्रक (डीएफएससी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे पूछा गया है कि सूचना देने में देरी करने पर क्यो न उन पर 25 हजार रुपये जुर्माना किया जाए। आयोग ने इस संबंध में डीएफएससी से लिखित में जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि एडवोकेट पवन पारिक ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से कुछ जानकारी हासिल करने के लिए बीते वर्ष 7 मार्च 2020 को सूचना के अधिकार के तहत याचिका लगाई थी। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक द्वारा निर्धारित समयावधि में सूचना प्रदान न करने पर पवन ने राज्य सूचना आयोग में 4 सितंबर 2020 को इस संबंध में शिकायत की। जिसके बाद ये मामला सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी के पास पहुंचा। आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए 18 जनवरी की तिथि निर्धारित की।
आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान डीएफएससी सुरेंद्र सैनी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि 7 मार्च 2020 को भेजा गया पत्र विभाग को 16 मार्च को प्राप्त हुआ। जिसे उन्होंने संबंधित कर्मी को भेज दिया। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने अपना पता जिला कोर्ट बताया था। चूंकि कोविड-19 की वजह से कोर्ट बंद थी, इसलिए इसे भेजा नहीं गया। बाद में इसे 22 अक्टूबर 2020 को भेजा गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। अवलोकन करने पर डीएफएससी की ओर से 22 अक्टूबर को पत्र भेजने का कोई रिकार्ड नहीं पाया गया। आयोग ने इसे सूचना देने में देरी मानकर और आरटीआई एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस देने का आदेश दिया है।
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उल्लेखनीय है कि एडवोकेट पवन पारिक ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से कुछ जानकारी हासिल करने के लिए बीते वर्ष 7 मार्च 2020 को सूचना के अधिकार के तहत याचिका लगाई थी। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक द्वारा निर्धारित समयावधि में सूचना प्रदान न करने पर पवन ने राज्य सूचना आयोग में 4 सितंबर 2020 को इस संबंध में शिकायत की। जिसके बाद ये मामला सुनवाई के लिए राज्य सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी के पास पहुंचा। आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए 18 जनवरी की तिथि निर्धारित की।
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आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान डीएफएससी सुरेंद्र सैनी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि 7 मार्च 2020 को भेजा गया पत्र विभाग को 16 मार्च को प्राप्त हुआ। जिसे उन्होंने संबंधित कर्मी को भेज दिया। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने अपना पता जिला कोर्ट बताया था। चूंकि कोविड-19 की वजह से कोर्ट बंद थी, इसलिए इसे भेजा नहीं गया। बाद में इसे 22 अक्टूबर 2020 को भेजा गया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुना। अवलोकन करने पर डीएफएससी की ओर से 22 अक्टूबर को पत्र भेजने का कोई रिकार्ड नहीं पाया गया। आयोग ने इसे सूचना देने में देरी मानकर और आरटीआई एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस देने का आदेश दिया है।
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