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Sirsa News: रेलवे व बस स्टैंड से दो किलोमीटर दूर पर बना रैन बसेरा बना आफत
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सिरसा। यात्रियों के रात्रि ठहराव के लिए प्रशासन की ओर से रैन बसेरा बनाया गया। लेकिन ये रैन बसेरा सार्वजनिक स्थानों से इतना दूर है कि यात्री इस तक पहुंच नहीं पाते। शहर में प्रशासन की ओर से रैन बसेरा बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर बना हुआ है वो भी वार्ड के अंदर। इस कारण यात्री इस रैन बसेरे का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर काठ मंडी स्थित आर्य स्कूल के सामने बने रैन बसेरा बनाया गया है। इस रैन बसेरे तक कोई भी यात्री नहीं पहुंच पाता है। जिस कारण यात्रियों को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, टाउन पार्क व अन्य जगहों पर रात गुजारनी पड़ रही है।
प्रशासन की ओर से बनाए गए रैन बसेरों की हकीकत को जानने के लिए सोमवार रात को अमर उजाला की टीम द्वारा रात को शहर में पड़ताल की गई। इस दौरान टीम ने देखा कि रैन बसेरे को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है। वहीं इस रैन बसेरे का कोई सूचना बोर्ड भी प्रशासन द्वारा नहीं लगाया गया। जिससे यात्रियों को रैन बसेरे का पता चल सके। ऐसे में यात्री अपने सामान के साथ बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, टाउन पार्क, हुड्डा कॉम्पलेक्स व अन्य स्थानों पर अपनी रात गुजारते हुए नजर आए।
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जानिए रात के समय में शहर का हाल :
समय रात के 9:30 बजे, रेलवे स्टेशन
रात के करीब साढ़े 9 बजे रेलवे स्टेशन पर जाकर देखा तो वहां पर कुछ यात्री मुख्य हॉल में नीचे ही बैठे हुए मिले। वहीं कुछ यात्री सीटों पर बैठे हुए थे। इस दौरान यात्रियों ने कंबल लिए हुए थे। बाहर ठंड होने की वजह से मुख्य हॉल में ही यात्रियों की ज्यादा भीड़ दिखी। इस दौरान यात्रियों ने बताया कि उन्हें दिल्ली जाना है लेकिन कोई ट्रेन न होने के कारण रेलवे स्टेशन पर ही रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं रैन बसेरे के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें रैन बसेरे को लेकर कोई जानकारी नहीं है।
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समय : 10 बजे, रैन बसेरा, काठ मंडी।
रात को 9:50 पर टीम रैन बसेरा में पहुंची। यहां जाकर टीम ने रैन बसेरे का दरवाजा खटखटाया। गेट खटखटाते ही एक व्यक्ति बाहर आया और उसने नाम पता पूछा।
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शहर में कहीं भी नहीं बनाया गया है अस्थायी रैन बसेरा
जिला प्रशासन की ओर से शहरभर में कहीं भी अस्थायी रैन बसेरा नहीं बनाया गया। इस समय नवंबर खत्म होने वाला है। लेकिन अब तक प्रशासन ने एक भी रैन बसेरा नहीं बनाया है। पिछली साल को प्रशासन की ओर से बस स्टैंड, टाउन पार्क के पास, रेलवे स्टेशन के पास अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए थे। लेकिन इस बार प्रशासन ने अभी तक रैन बसेरे नहीं बनाए है। ये रैन बसेरे रोडवेज की पुरानी बसों में बनाए जाते हैं। जिसमें यात्रियों के ठहरने के लिए गर्म गद्दे, तकिया, ओढ़ने के लिए कंबल और बस के चारों तरफ पर्दे लगाए जाते हैं। इसे एक प्रकार का कमरे का रूप दिया जाता है।
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प्रशासन की ओर से बनाए गए रैन बसेरों की हकीकत को जानने के लिए सोमवार रात को अमर उजाला की टीम द्वारा रात को शहर में पड़ताल की गई। इस दौरान टीम ने देखा कि रैन बसेरे को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया गया है। वहीं इस रैन बसेरे का कोई सूचना बोर्ड भी प्रशासन द्वारा नहीं लगाया गया। जिससे यात्रियों को रैन बसेरे का पता चल सके। ऐसे में यात्री अपने सामान के साथ बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, टाउन पार्क, हुड्डा कॉम्पलेक्स व अन्य स्थानों पर अपनी रात गुजारते हुए नजर आए।
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जानिए रात के समय में शहर का हाल :
समय रात के 9:30 बजे, रेलवे स्टेशन
रात के करीब साढ़े 9 बजे रेलवे स्टेशन पर जाकर देखा तो वहां पर कुछ यात्री मुख्य हॉल में नीचे ही बैठे हुए मिले। वहीं कुछ यात्री सीटों पर बैठे हुए थे। इस दौरान यात्रियों ने कंबल लिए हुए थे। बाहर ठंड होने की वजह से मुख्य हॉल में ही यात्रियों की ज्यादा भीड़ दिखी। इस दौरान यात्रियों ने बताया कि उन्हें दिल्ली जाना है लेकिन कोई ट्रेन न होने के कारण रेलवे स्टेशन पर ही रात गुजारनी पड़ रही है। वहीं रैन बसेरे के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्हें रैन बसेरे को लेकर कोई जानकारी नहीं है।
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समय : 10 बजे, रैन बसेरा, काठ मंडी।
रात को 9:50 पर टीम रैन बसेरा में पहुंची। यहां जाकर टीम ने रैन बसेरे का दरवाजा खटखटाया। गेट खटखटाते ही एक व्यक्ति बाहर आया और उसने नाम पता पूछा।
शहर में कहीं भी नहीं बनाया गया है अस्थायी रैन बसेरा
जिला प्रशासन की ओर से शहरभर में कहीं भी अस्थायी रैन बसेरा नहीं बनाया गया। इस समय नवंबर खत्म होने वाला है। लेकिन अब तक प्रशासन ने एक भी रैन बसेरा नहीं बनाया है। पिछली साल को प्रशासन की ओर से बस स्टैंड, टाउन पार्क के पास, रेलवे स्टेशन के पास अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए थे। लेकिन इस बार प्रशासन ने अभी तक रैन बसेरे नहीं बनाए है। ये रैन बसेरे रोडवेज की पुरानी बसों में बनाए जाते हैं। जिसमें यात्रियों के ठहरने के लिए गर्म गद्दे, तकिया, ओढ़ने के लिए कंबल और बस के चारों तरफ पर्दे लगाए जाते हैं। इसे एक प्रकार का कमरे का रूप दिया जाता है।