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सरकारी अस्पतालों में भगवान भरोसे मरीजों की देखभाल, एंबुलेंस के पहिए थमे

Tue, 09 Aug 2016 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा Updated Tue, 09 Aug 2016 10:47 PM IST
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NHM worker strike, health, hospital, ambulance, strike, health service
स्वास्‍थ्य कार्यकर्ता - फोटो : Bureau

अगर आपका स्वास्थ्य खराब है फिर भी वीरवार तक सरकारी अस्पताल का रुख न करने में ही भलाई है। अगर उपचार के लिए चले भी आए तो देखभाल नहीं हो पाएगी क्योंकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अस्पताल में कार्यरत नर्सें, डिलीवरी स्टाफ, दवाई देने वालों से लेकर एंबुलेंस चालक तक सभी हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल में मरीज भगवान भरोसे रहेंगे।

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मंगलवार को शुरू हुई कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी असर पड़ा है। वार्डों में मरीजों की देखभाल करने वाली नर्सें अस्पताल परिसर में मुर्दाबाद के नारे लगाने में बिजी रहीं। पूरे अस्पताल की व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनिंदा नियमित कर्मचारियों के कंधों पर है।
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एंबुलेंस चालकों ने सुबह ही अस्पताल परिसर में सारी एंबुलेंस खड़ी कर दीं। जिस रोगी को अपने घर जाने में एंबुलेंस की जरूरत पड़ी उसे प्राइवेट एंबुलेंस किराए पर लानी पड़ी। गनीमत बस इतनी रही कि जिले में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ जिस वजह से किसी तरह अस्पताल में कार्यरत नियमित कर्मचारियों ने व्यवस्था को संभाले रखा।
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हड़ताल के चलते टीबी विभाग, डिलीवरी विभाग, आईएमआर, सीपीआर, एमएमआर, टीएफआर, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, स्कूल व आंगनबाड़ी बच्चों के स्वास्थ्य जांच आदि का कार्य प्रभावित रहा। हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

अस्पताल में गूंजे सरकार मुर्दाबाद के नारे
एनएचएम एंप्लाइज एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर सिरसा में कार्यरत कर्मचारी मंगलवार को हड़ताल पर रहे। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 550 अनुबंधित कर्मचारी काम करते हैं। अस्पताल परिसर सुबह जिलेभर से अनुबंधित कर्मचारी एकत्रित हुए। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र बैनीवाल ने कहा कि सरकार दमनकारी नीतियों पर उतर आई है। सरकार हर रोज किसी न किसी कारण से कर्मचारियों को हटाने का प्रयास कर रही है। अब सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत 20 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाने का मन बनाया है जिससे हजारों कर्मचारियों को अपना भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलने वाली योजनाओं में विभिन्न पदों पर काम करने वाले कर्मचारी आज प्रदेश की लाइफ लाइन बने हुए हैं लेकिन इनके प्रति हरियाणा सरकार की उदासीनता के चलते इनका भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा। पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  के तहत 12 हजार कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हड़ताल के चलते प्रधानमंत्री द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए शुरू किया गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भी प्रभावित हुआ। हर महीने की नौ तारीख को यह अभियान चलाया जाता है। हड़ताली कर्मचारियों को एसोसिएशन के प्रवक्ता अनिल मलिक, डॉ. राजप्रीत बराड़, परमजीत बराड़, कविंद्र अरोड़ा, जीवन सिंह, सुमन रानी, अमित कुमार, अरुण अरोड़ा, राकेश कुमार ने भी संबोधित किया।

अनुबंधित कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान सरकार ने चुनाव के समय अपने घोषण पत्र में वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का आश्वासन दिया था। जिस पूरा करने की बजाए प्रदेश सरकार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को ठेका प्रथा में धकेलने पर आमादा हो रही है। इस कारण कर्मचारियों के पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा।

ये है मुख्य मांगे
1. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत कर्मचारियों को सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर नियमित करने की पॉलिसी तुरंत लागू की जाए।
2. सभी कर्मचारियों को वेतन हर महीने की सात तारीख को प्रदान करना सुनिश्चित करें।
3. सभी कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन प्रदान किया जाए।
4. सरकार भविष्य में किसी भी कर्मचारी को नौकरी से न निकाले।

नियमित कर्मचारी देंगे 16 घंटे ड्यूटी
हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों इसके लिए नियमित कर्मचारियों की डबल ड्यूटियां लगाई गई हैं। ज्यादा परेशानी एंबुलेंस को लेकर है। इसके समाधान के लिए समाज सेवी संस्थाओं की सहायता ली जा रही है। उनकी एंबुलेंस में मरीजों को लाया और ले जाया जाएगा। कोशिश यही की जा रही है कि हड़ताल के चलते लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़े।

- सूरजभान कंबोज, सिविल सर्जन, सिरसा।


चोपटा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं ठप
राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत नियुक्त कर्मचारियों के दो दिवसीय हड़ताल पर चले जाने के बाद चोपटा पीएचसी व गांवों के उपस्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई। इसके अलावा वहां मिलने वाली अन्य सुविधाएं भी मंगलवार को बंद रही, जिसके कारण आम पब्लिक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां बता दें कि चोपटा पीएचसी कार्यालय में कार्यरत आईए सुरेंद्र कुमार, लेखा लिपिक मांगेराम, आयुष विभाग के डॉ. विजय और डॉ. अमित, स्टाफ नर्स रीना, मुक्ता, निर्मला व एंबुलेंस ड्राइवर राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत अनुबंधित कर्मचारी के रूप में नियुक्त थे। नियमित करने की मांग को लेकर एसोसिएशन ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी थीं। सरकार से वार्ता विफल होने के कारण अनुबंधित कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इस वजह से चोपटा की पीएचसी में स्थित डिलीवरी हट पर मंगलवार को ताला लगा रहा।

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