{"_id":"692c8f2695aa086cf50e97f0","slug":"neither-the-pond-was-saved-nor-a-park-was-built-bhadra-johad-lost-its-existence-sirsa-news-c-128-1-sir1002-148624-2025-12-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: तालाब बचा न पार्क बना... अपना वजूद खो गया भादरा जोहड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: तालाब बचा न पार्क बना... अपना वजूद खो गया भादरा जोहड़
Mon, 01 Dec 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 01 Dec 2025 12:08 AM IST
विज्ञापन
सिरसा।भादरा पार्क में टूटे पड़े झूले
सिरसा। शहर का ऐतिहासिक भादरा जोहड़ या कहें भादरा पार्क, आज बदहाली की कगार पर है। कभी यह तालाब शहर की शान हुआ करता था, जिसकी खूबसूरती दूर-दूर तक मशहूर थी और जो राजा-महाराजाओं के दौर में रानियों का स्नान स्थल माना जाता था। वक्त बदला तो न तालाब बचा, न उसकी पहचान। उसकी जगह बना पार्क आज नशेड़ियों का अड्डा बनकर रह गया है और चारों ओर कचरे के ढेर दिखाई देते हैं।
नगर परिषद इस पार्क के सुधार पर अब तक कई टेंडर जारी कर लाखों रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन हालात जस के तस हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह कि जिस जमीन पर यह पार्क बना है, वह अब तक नगर परिषद के नाम नहीं हो पाई। ऐसे में भादरा पार्क सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बनता जा रहा है। वर्ष 2002 में चौटाला सरकार के दौरान यहां बुनियादी ढांचे की नींव रखी गई थी, लेकिन विकास कार्य वहीं ठहरकर रह गए।
इसे शहर का सबसे आकर्षक पार्क बनाने का प्रयास किया गया था। इस पार्क के चारों ओर कई मंदिर हैं और यह स्थान कभी धार्मिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। अब यहां नशेड़ी बिना किसी डर के नशा करते हैं और इस पार्क का नाम अब किसी और कारण से नहीं, बल्कि उसकी गंदगी और अव्यवस्था के कारण लिया जाता है। भादरा पार्क का जो गौरव था, वह अब मिट चुका है और अब यह कचरे का घर बन चुका है।
विज्ञापन
पार्क में आने वाले सुभाष सैनी ने बताया कि पार्क में शाम साढ़े पांच बजे के बाद नशेड़ी आने शुरू हो जाते हैं। इस दौरान आमजन यहां पर आ नहीं सकता है। पार्क में सफाई नहीं है, जगह-जगह गंदगी पड़ी है और कूड़े के ढेर हैं। बेसहारा पशु घूमते रहे हैं। वहीं राजेंद्र कुमार और राजकुमार ने बताया कि पार्क के लिए पैसा आता है, लेकिन रखरखाव के नाम पर कुछ नहीं है। दीवारें, बेंच और झूले टूटे हुए हैं। इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नगर परिषद में सुनवाई नहीं है, कई बार शिकायत की जा चुकी है। संवाद
-- --
यह है भादरा पार्क का इतिहास
कभी तीर्थ मानते हुए श्रद्धा के साथ दूर-दूर से लोग स्नान करने के लिए सिरसा के प्रसिद्ध भादरा तालाब में पहुंचते थे। बारिश होने के बाद पूरे शहर का पानी भादरा तालाब में संचय होता था। तालाब जल संरक्षण के लिए मिसाल था। भादरा तालाब के चारों तरफ आज भी मंदिर बने हुए हैं। यहां पर पास में ही बने माता मावड़ी मंदिर में दूसरे प्रदेशों से भी लोग माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। इसी के साथ शिव मंदिर, बंसीवट मंदिर, खजांचिया मंदिर व अनेक धर्मशाला बनी हुई है। सिरसा निवासी तुलसी राम ने बताया कि भादरा तालाब तीर्थ था। यहां पर दूर-दूर से लोग स्नान करने पहुंचते थे। आज भी यहां आसपास करीब 20 मंदिर बने हुए हैं।
ऐसे खत्म हुआ तालाब का अस्तित्व व बना पार्क
बारिश के मौसम में पानी से तालाब लबालब भरा रहता था। इसके बाद सीवरेज न होने के कारण नालियों का पानी तालाब में डाला जाने लगा। इसके बाद तालाब का पानी दूषित हो गया। वर्ष 2002 में तालाब की जगह पर पार्क बना दिया। यहां पर जिस समय तालाब था, उस समय भूमिगत जलस्तर भी सही था। इसके बाद से भूमिगत जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आई है।
-- -
वर्जन :भादरा पार्क के सुंदरीकरण के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। नशा करने वाले को रोकने के लिए पुलिस से संपर्क साधा जाएगा और गश्त लगवाई जाएगी। पार्क को सुंदर बनाना हमारा दायित्व है। पार्क की जमीन संबंधी कुछ मामला है, जिसका जल्द ही समाधान हो जाएगा।
- वीर शांति स्वरूप, चेयरमैन, नगर परिषद।
--
पार्क के सुदंरीकरण के लिए जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। पार्क को डिजाइन के अनुसार तैयार किया जाएगा। बारिश के पानी की निकासी का स्थायी समाधान होगा। सफाई के लिए सफाई शाखा को निर्देश दिए जाएंगे। 30 नवंबर के बाद पार्क समितियों का अनुबंध भी खत्म हो जाएगा।
- प्रवेश कौशिक, एमई, नगर परिषद।
विज्ञापन
नगर परिषद इस पार्क के सुधार पर अब तक कई टेंडर जारी कर लाखों रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन हालात जस के तस हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह कि जिस जमीन पर यह पार्क बना है, वह अब तक नगर परिषद के नाम नहीं हो पाई। ऐसे में भादरा पार्क सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बनता जा रहा है। वर्ष 2002 में चौटाला सरकार के दौरान यहां बुनियादी ढांचे की नींव रखी गई थी, लेकिन विकास कार्य वहीं ठहरकर रह गए।
विज्ञापन
इसे शहर का सबसे आकर्षक पार्क बनाने का प्रयास किया गया था। इस पार्क के चारों ओर कई मंदिर हैं और यह स्थान कभी धार्मिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। अब यहां नशेड़ी बिना किसी डर के नशा करते हैं और इस पार्क का नाम अब किसी और कारण से नहीं, बल्कि उसकी गंदगी और अव्यवस्था के कारण लिया जाता है। भादरा पार्क का जो गौरव था, वह अब मिट चुका है और अब यह कचरे का घर बन चुका है।
विज्ञापन
पार्क में आने वाले सुभाष सैनी ने बताया कि पार्क में शाम साढ़े पांच बजे के बाद नशेड़ी आने शुरू हो जाते हैं। इस दौरान आमजन यहां पर आ नहीं सकता है। पार्क में सफाई नहीं है, जगह-जगह गंदगी पड़ी है और कूड़े के ढेर हैं। बेसहारा पशु घूमते रहे हैं। वहीं राजेंद्र कुमार और राजकुमार ने बताया कि पार्क के लिए पैसा आता है, लेकिन रखरखाव के नाम पर कुछ नहीं है। दीवारें, बेंच और झूले टूटे हुए हैं। इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नगर परिषद में सुनवाई नहीं है, कई बार शिकायत की जा चुकी है। संवाद
यह है भादरा पार्क का इतिहास
कभी तीर्थ मानते हुए श्रद्धा के साथ दूर-दूर से लोग स्नान करने के लिए सिरसा के प्रसिद्ध भादरा तालाब में पहुंचते थे। बारिश होने के बाद पूरे शहर का पानी भादरा तालाब में संचय होता था। तालाब जल संरक्षण के लिए मिसाल था। भादरा तालाब के चारों तरफ आज भी मंदिर बने हुए हैं। यहां पर पास में ही बने माता मावड़ी मंदिर में दूसरे प्रदेशों से भी लोग माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। इसी के साथ शिव मंदिर, बंसीवट मंदिर, खजांचिया मंदिर व अनेक धर्मशाला बनी हुई है। सिरसा निवासी तुलसी राम ने बताया कि भादरा तालाब तीर्थ था। यहां पर दूर-दूर से लोग स्नान करने पहुंचते थे। आज भी यहां आसपास करीब 20 मंदिर बने हुए हैं।
ऐसे खत्म हुआ तालाब का अस्तित्व व बना पार्क
बारिश के मौसम में पानी से तालाब लबालब भरा रहता था। इसके बाद सीवरेज न होने के कारण नालियों का पानी तालाब में डाला जाने लगा। इसके बाद तालाब का पानी दूषित हो गया। वर्ष 2002 में तालाब की जगह पर पार्क बना दिया। यहां पर जिस समय तालाब था, उस समय भूमिगत जलस्तर भी सही था। इसके बाद से भूमिगत जलस्तर में भी तेजी से गिरावट आई है।
वर्जन :भादरा पार्क के सुंदरीकरण के लिए प्रोजेक्ट बनाए गए हैं। नशा करने वाले को रोकने के लिए पुलिस से संपर्क साधा जाएगा और गश्त लगवाई जाएगी। पार्क को सुंदर बनाना हमारा दायित्व है। पार्क की जमीन संबंधी कुछ मामला है, जिसका जल्द ही समाधान हो जाएगा।
- वीर शांति स्वरूप, चेयरमैन, नगर परिषद।
पार्क के सुदंरीकरण के लिए जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। पार्क को डिजाइन के अनुसार तैयार किया जाएगा। बारिश के पानी की निकासी का स्थायी समाधान होगा। सफाई के लिए सफाई शाखा को निर्देश दिए जाएंगे। 30 नवंबर के बाद पार्क समितियों का अनुबंध भी खत्म हो जाएगा।
- प्रवेश कौशिक, एमई, नगर परिषद।