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बदहाल आंगनबाड़ी केंद्रों पर क ख ग सीख रहे नौनिहाल : कई केंद्रों में पांच साल से नहीं बिजली के प्रबंध तो कई की इमारत हो चुकी है कंडम

Tue, 02 May 2023 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Tue, 02 May 2023 11:21 PM IST
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Naunihal are learning at the dilapidated Anganwadi centers: In many centers there is no electricity arrangement for five years and many buildings have been built condom
बीईओ कार्यालय में बने आंगनबाड़ी केंद्र पर लगा कंडम का बोर्ड। संवाद
अनुपमा जाखड़
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सिरसा। शहर में बने आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल हो चुके हैं। डर के साए में नौनिहाल कखग सीख रहे हैं। केंद्रों पर एक तरफ जहां बच्चे अक्षर ज्ञान सीख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हेल्पर्स उसी जगह पर खाना बना रही हैं। कई आंगनबाड़ी केंद्रों में तो पिछले पांच साल से बिजली तक के प्रबंध नहीं है, तो कई की इमारत कंडम हो चुकी है। इसके कारण हमेशा कोई अप्रिय घटना होने का भय बना रहता है।
मंगलवार को संवाददाता ने शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल कर स्थिति को जांचा। इस दौरान केंद्रों में अनेक कमियां देखने को मिलीं।
जिले में करीब 1 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र को संचालित किया जा रहा है। सिरसा ब्लॉक की बात करें ताे इसमें 78 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसके से शिक्षा विभाग ने दो साल पहले 17 केंद्रों को प्ले स्कूल में बदल दिया, लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी सिर्फ तीन ही प्ले स्कूल में सामान पहुंचा है। अगर बात आंगनबाड़ी केंद्रों की करें तो इन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। केंद्रों में पिछले तीन महीने से चीनी नहीं आई है। पिछले एक महीने से बच्चों के लिए दूध भी नहीं दिया जा रहा। विभाग की ओर मई में बच्चों के लिए बाजरा भेजा गया है। अब कार्यकर्ताओं को समझ में नहीं आ रहा कि गर्मी के मौसम में वे इस बाजरे से बच्चों के लिए क्या बनाए। आइए जानते हैं आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति...
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बीईओ कार्यालय में बना आंगनबाड़ी केंद्र, समय साढ़े 11
आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर देखा तो इमारत पर कंडम लिखा हुआ था, लेकिन केंद्र में बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं। इस दौरान आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता मौजूद नहीं थी। हेल्पर थी, लेकिन वह बच्चों के लिए खाना बना रही थी। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के खेलने के लिए कोई भी सुविधा नहीं थी। इसमें सिर्फ कुर्सियां थीं वो भी आंगन में डाली गई थी। कमरे में न तो पंखे चल रहे थे न ही खेल कूद व पढ़ाने के लिए कोई सामग्री मौजूद थी।
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अनाज मंडी प्राइमरी स्कूल, समय 11:20,
इस आंगनबाड़ी केंद्र को पिछले साल प्ले स्कूल में शामिल किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को कखग सीखा रही थी। दूसरी ओर पास में ही बच्चों को दिया जाने वाला खाना भी कुछ समय पहले बनाया गया था। कमरे में कबाड़ का अन्य सामान पड़ा था। प्ले स्कूल में प्रयोग होने वाले खिलौने, चित्र, झूले, कुर्सियां व अन्य सामान मौजूद नहीं था। बच्चों के लिए शौचालय भी केंद्र में नहीं है।

प्राइमरी स्कूल नंबर 5, समय 12 बजे
इस आंगनबाड़ी केंद्र को भी प्ले स्कूल बनाया गया है। केंद्र की हालत बाकियों से कुछ ठीक मिली। इस केंद्र में बच्चों के लिए खिलौने पिछले सप्ताह ही विभाग द्वारा भेजे गए। इस केंद्र में जहां बच्चे खिलौने के साथ खेल रहे थे, उसी जगह हेल्पर खाना बना रही थी। केंद्र में बच्चों के लिए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। छोटे बच्चों को स्कूल के मुख्यद्वार पर बने स्कूल के शौचालय में जाना पड़ता है। यह केंद्र से दूर है। इसके कारण बच्चों पर कार्यकर्ता का ध्यान नहीं रह पाता।

एकता नगर में स्थित धर्मशाला में, समय 12:30,
एकता नगर स्थित निजी धर्मशाला में किराए के भवन में आंगनबाड़ी केंद्र को चलाया जा रहा है। इस केंद्र में बच्चे बिना पंखे के गर्मी में पढ़ रहे थे। कार्यकर्ता से बात की तो पता चला कि पिछले काफी सालों से केंद्र में बिजली ही नहीं है। गर्मी में भी बच्चों को बिना पंखे व लाइट के पढ़ना पड़ता है। इस आंगनबाड़ी केंद्र में भी शौचालय की समस्या है। बच्चों के लिए यहां न तो शौचालय है और न ही खिलौने व अन्य सामान।


संजय कॉलोनी, समय 12: 40
संजय कॉलोनी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र किसी के घर के बाहर वाली साइड बने कमरे में चल रहा है। यह बहुत ही छोटा है। इस कमरे में कोई सुविधा नहीं है। न ही खिलौने है, न ही चित्र, न ही कोई अन्य एक्टिविटी करने के लिए सामान। इसी कमरे में बच्चों को पढ़ाया जाता है और इसी में खाना बनाया जाता है।
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