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बेटियों का घर बसाने के लिए माई ने समर्पित किया जीवन
sirsa
Updated Fri, 25 Apr 2014 12:38 AM IST
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अपनी मदद तो सभी करते हैं, दूसरों की मदद करने वाला ही समाज को प्रेरणा दे सकता है। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है शहर के वार्ड पांच में रह रही बिंदिया महंत ने। बिंदिया एक ऐसी किन्नर है, जो लड़कियों को समाज पर बोझ नहीं मानती।
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लड़की वाले परिवार का सारा गम खुद समेटकर बैंडबाजे के साथ बेटियों की डोली उठवाने में मदद करती हैं। शहर डबवाली के लोग उन्हें प्यार से माई कहकर पुकारते हैं। ये माई अब तक लगभग 700 लड़कियों की शादी करवाकर उनका घर बसा चुकी हैं। बिंदिया पिछले पच्चीस वर्षों से लड़कियों की शादियां करवा रही हैं। बिंदिया हरियाणा के साथ-साथ राजस्थान और पंजाब में भी जरुरतमंदों की मदद करती हैं।
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अपनी साफ छवि और दरियादिली के कारण माई लोगों के दिलों पर राज करती हैं। 30 दिसंबर 2008 को नगरपालिका डबवाली के चुनाव हुए थे। उनकी साफ छवि का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने उन्हें अपना समर्थन देते हुए इनेलो समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ खड़ा किया लेकिन एक राजनीतिक पार्टी के नेता की टिप्पणी ने उन्हें काफी आहत किया।
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किन्नरों पर की गई इस टिप्पणी से उन्होंने चुनाव से नाम वापस लेने की इच्छा जाहिर कर दी थी लेकिन नेता की टिप्पणी ने चिंगारी का काम किया। किन्नर होते हुए बिंदिया ने सामने खड़ी महिला प्रत्याशी को 422 मतों के अंतर से पराजित किया।
सभी 19 वार्डों में यह सबसे बड़ी जीत थी। 45 वर्षीय बिंदिया महंत का जन्म राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के गांव गुड़ियाखेड़ा में हुआ था। किन्नर होने के कारण माता-पिता ने उन्हें गुरनामों को सौंप दिया था। उनकी रहनुमाई में बिंदिया महंत ने किन्नर की दीक्षा प्राप्त की थी। तबसे अब तक बिंदिया महंत, जो भी शगुन लेकर आती हैं, वह लड़कियों की शादी में खर्च कर देती हैं।
बिंदिया ने बताया कि वे भगवान को कोसा करती थीं कि ऐसी जिंदगी क्यों दी रब्बा लेकिन डबवाली शहर के लोगों ने उन्हें इतना प्यार दिया कि वे इसका कर्ज नहीं चुका सकतीं। किसी ने बहन, किसी ने बेटी, किसी ने बुआ तो किसी ने माई कहकर पुकारा है। अब इन्हीं लोगों का कर्ज उतार रही हूं। आंगन कुंवारा न रहे, इसलिए लड़कियों की शादी डेरे में की। लड़कियों की शादी करके दिल को सुकून मिलता है।