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Sirsa News: नहरों में 16 दिन बंदी के बाद 8 दिन पानी देने के फैसले पर किसानों में रोष
Sun, 01 Nov 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:32 PM IST
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चोपटा। शिव मंदिर धर्मशाला में नहरों में पानी की बाराबंदी के विरोध में बैठक कर आंदोलन की रणनीति
सिंचाई के साथ पेयजल संकट की भी जताई आशंका, 3 नवंबर को फतेहाबाद लघु सचिवालय में करेंगे प्रदर्शन
संयुक्त किसान संगठन ने बैठक कर सौंपी जिम्मेदारियां
फोटो-- 30
संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। नहरों और माइनरों में पानी की बाराबंदी को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को शिव मंदिर धर्मशाला में संयुक्त किसान संगठन की एक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में 3 नवंबर को फतेहाबाद स्थित लघु सचिवालय में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की तैयारियों पर चर्चा की गई। किसानों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं की ड्यूटियां भी लगाईं।
बैठक में कई किसान नेता और समाजसेवी उपस्थित थे। इनमें प्रकाश मेमरा, रघुबीर कड़वासरा, जगदीश चाडीवाल, हवा सिंह चाडीवाल, पूर्व सरपंच हरसिंह मंडा शामिल थे। कृष्ण ज्याणी खेड़ी, रोहताश पुनिया शाहुपरिया, नरेंद्र सिद्धू कैंरावाली, कुलदीप कासनियां भी मौजूद थे।
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मुकेश चाहरवाला, अशोक पुनिया, महावीर गुड़ियाखेड़ा और दलीप बैनीवाल ने भी अपने विचार रखे। इन सभी नेताओं ने कहा कि नहरों और माइनरों में 16 दिन पानी बंद रखने के बाद केवल आठ दिन पानी छोड़ने की व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
गेहूं और सरसों की बिजाई का यह महत्वपूर्ण सीजन है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में पीने के पानी की समस्या भी सामने आने लगी है।
सिंचाई और पेयजल संकट
किसान नेताओं ने बताया कि मौजूदा बाराबंदी व्यवस्था के चलते किसानों को पानी की अगली बारी के लिए करीब 40 दिन इंतजार करना पड़ेगा। इतने लंबे अंतराल में फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई करना मुश्किल हो जाएगा। इससे गेहूं और सरसों की बिजाई बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। फसलों की पैदावार पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट भी गहरा सकता है। दिवाली जैसे त्योहार के सीजन में भी ग्रामीणों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। किसानों और आम लोगों को अपनी मूलभूत जरूरत के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान नेताओं ने पानी की मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने मांग की कि नहरों और माइनरों में पानी की आपूर्ति का शेड्यूल किसानों और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। साथ ही, पेयजल की समस्या का भी स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि यह किसानों का हक है और सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।
फतेहाबाद में धरना-प्रदर्शन
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पानी की बाराबंदी के विरोध में 3 नवंबर को फतेहाबाद लघु सचिवालय में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संयुक्त किसान संगठन ने क्षेत्र के सभी किसानों से अपील की है। उन्होंने किसानों से अपने हकों की आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। पानी की समस्या के समाधान की मांग को लेकर अधिक से अधिक संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल होने को कहा गया। यह प्रदर्शन किसानों की एकजुटता का प्रतीक होगा।
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संयुक्त किसान संगठन ने बैठक कर सौंपी जिम्मेदारियां
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। नहरों और माइनरों में पानी की बाराबंदी को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को शिव मंदिर धर्मशाला में संयुक्त किसान संगठन की एक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में 3 नवंबर को फतेहाबाद स्थित लघु सचिवालय में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की तैयारियों पर चर्चा की गई। किसानों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं की ड्यूटियां भी लगाईं।
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बैठक में कई किसान नेता और समाजसेवी उपस्थित थे। इनमें प्रकाश मेमरा, रघुबीर कड़वासरा, जगदीश चाडीवाल, हवा सिंह चाडीवाल, पूर्व सरपंच हरसिंह मंडा शामिल थे। कृष्ण ज्याणी खेड़ी, रोहताश पुनिया शाहुपरिया, नरेंद्र सिद्धू कैंरावाली, कुलदीप कासनियां भी मौजूद थे।
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मुकेश चाहरवाला, अशोक पुनिया, महावीर गुड़ियाखेड़ा और दलीप बैनीवाल ने भी अपने विचार रखे। इन सभी नेताओं ने कहा कि नहरों और माइनरों में 16 दिन पानी बंद रखने के बाद केवल आठ दिन पानी छोड़ने की व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
गेहूं और सरसों की बिजाई का यह महत्वपूर्ण सीजन है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में पीने के पानी की समस्या भी सामने आने लगी है।
सिंचाई और पेयजल संकट
किसान नेताओं ने बताया कि मौजूदा बाराबंदी व्यवस्था के चलते किसानों को पानी की अगली बारी के लिए करीब 40 दिन इंतजार करना पड़ेगा। इतने लंबे अंतराल में फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई करना मुश्किल हो जाएगा। इससे गेहूं और सरसों की बिजाई बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। फसलों की पैदावार पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट भी गहरा सकता है। दिवाली जैसे त्योहार के सीजन में भी ग्रामीणों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। किसानों और आम लोगों को अपनी मूलभूत जरूरत के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसान नेताओं ने पानी की मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उन्होंने मांग की कि नहरों और माइनरों में पानी की आपूर्ति का शेड्यूल किसानों और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। साथ ही, पेयजल की समस्या का भी स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि यह किसानों का हक है और सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।
फतेहाबाद में धरना-प्रदर्शन
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पानी की बाराबंदी के विरोध में 3 नवंबर को फतेहाबाद लघु सचिवालय में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संयुक्त किसान संगठन ने क्षेत्र के सभी किसानों से अपील की है। उन्होंने किसानों से अपने हकों की आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। पानी की समस्या के समाधान की मांग को लेकर अधिक से अधिक संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल होने को कहा गया। यह प्रदर्शन किसानों की एकजुटता का प्रतीक होगा।