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मेडिटेशन से बढ़ती है फसल, नहीं लगते रोग

Tue, 17 Nov 2015 01:40 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Tue, 17 Nov 2015 01:40 AM IST
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Meditation is a crop-growing

मेडिटेशन का असर मानव पर ही नहीं पौधों पर भी होता है। इससे फसलों को रोग मुक्त रखकर पैदावार बढ़ाई जा सकती है।

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बेशक सुनने में यह बात अटपटी लगे लेकिन एक विश्वविद्यालय ने गेहूं तथा धान की फसल पर रिसर्च कर इसकी पुष्टि की है।

इस रिसर्च को मध्यप्रदेश की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बीके जमीला ने किया किया है। उनकी रिसर्च का 140 देशों की भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है।

डबवाली में इस संवाददाता से विशेष बातचीत में डॉ. जमीला ने बताया कि वर्ष 2003-04 में उसकी एक सहयोगी ने मेडिटेशन के जरिये पौधों को हीलिंग पावर देकर अच्छा उत्पाद लिया।

इसे आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने रिसर्च करना शुरू कर दिया। इसी दौरान महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक किसान से भूमि का छोटा सा प्लाट प्रयोग के लिए लिया। उन्होंने गन्ने की खेती की।
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फसल को मेडिटेशन से हीलिंग पावर दी। गन्ने का उत्पादन पहले से ज्यादा हुआ। कटाई के बाद भी गन्ना पैदा हो गया। हालांकि उन दिनों महाराष्ट्र में एक विशेष बीमारी के चलते गन्ने की फसल तबाह हो गई थी।
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इसके बाद टमाटर की खेती की। मेडिटेशन वाली फसल में उत्पादन सबसे ज्यादा हुआ। जो फल प्राप्त हुआ, उसमें मिनरल, विटामिन तथा खनिज दूसरे के मुकाबले चार गुणा थे।

उन्होंने इस पूरी फसल को पुणे स्थित एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में दिखाया। डॉ. जमीला अपने रिसर्च को आगे बढ़ाते हुए दांतेवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय में ले गईं।

विश्वविद्यालय ने इसकी पुष्टि के लिए गेहूं और धान उगाया। मेडिटेशन से इसे हिलिंग दी गई। जब फसल पककर तैयार हुई। इसका उत्पादन पहले की अपेक्षा 38 फीसदी अधिक हुआ। विश्वविद्यालय ने इस बात की पुष्टि की कि मेडिटेशन से फसल पर प्रभाव पड़ता है।

108 एपीसोड बनाए
दांतेवाड़ा विश्वविद्यालय से मेडिटेशन से खेती पर प्रभाव होने का प्रमाण पाकर डॉ. जमीला ने 108 डॉक्यूमेंट्री तैयार की हैं। इसके अतिरिक्त दो फिल्में भी बनाई हैं।

उन्होंने अपनी रिसर्च को शाश्वत यौगिक खेती नाम दिया है। इस खेती पर उनका टॉक शो 140 देशों की भाषाओं में अनुवादित किया जा रहा है, ताकि किसान सात्विक खेती कर दवाओं और खादों पर होने वाले भारी खर्च से बच सकें।

छोड़ दी राजनीति
डॉ. जमीला के अनुसार राजनीति में झूठ ही झूठ भरा हुआ है। ईमानदार आदमी की तो राजनीति में चलती नहीं। अगर राजनीतिक रिश्वत न भी लें, तो रिश्वतखोर अफसरशाही उसे बदनाम कर देती है।

डॉ. जमीला के अनुसार उन्होंने प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू में जाकर तीन दिवसीय योग शिविर जो ज्ञान प्राप्त किया, उसके बाद से राजनीति से संन्यास लेकर आध्यात्मिकता का मार्ग अपना लिया।


बागवानी में भी असरदार
मुझे बागवानी का बहुत शौक है। मैंने अपने ही घर में पपीता के दो पौधे लगाए। एक पौधे को मेडिटेशन से हीलिंग देकर यह संकल्प लिया कि इस पौधे पर 108 फल आने चाहिए। जब फल आया तो 108 नहीं, बल्कि 140 थे। जबकि दूसरे पौधे पर केवल 38 फल ही थे।
-डॉ. बीके जमीला

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