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Sirsa News: मेजर कर्मजीत कौर रंधावा और महिला अधिकारियों की टीम ने इतिहास रच पूरी की समुद्री यात्रा
Mon, 09 Jun 2025 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 09 Jun 2025 11:39 PM IST
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सिरसा। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों की टीम ने मेजर कर्मजीत कौर रंधावा के नेतृत्व में समुद्री यात्रा का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है। जिले के गांव कंगनपुर निवासी मेजर कर्मजीत कौर ने इस यात्रा में भाग लिया और 6500 किलोमीटर की समुद्री यात्रा पूरी की। उनके इस उपलब्धि से गांव में जश्न का माहौल है।
मेजर कर्मजीत कौर के पिता एडवोकेट रिछपाल सिंह बेटी की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं। मेजर ने यह यात्रा स्वदेश निर्मित 56 फुट लंबे जहाज त्रिवेणी पर की, जिसमें टीम को तूफानों, समुद्र की ऊंची लहरों और थकान का सामना करना पड़ा। इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद टीम मुंबई लौट आई।
बतौर मेजर कर्मजीत कौर रंधावा ने बताया कि उनका शुरू से ही लक्ष्य था सेना में नौकरी कर देश सेवा की जाए। आखिरकार मेहनत रंग लाई और वर्ष 2015 में चयन फौज में हो गया। अभी मेरी तैनाती मुंबई में है। उसने बताया कि 7 अप्रैल को मुंबई से इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। यह बोट ऐसी थी, जो कि हवा से ही चलती थी, न तो डीजल था, न लाइट और न ही अत्यधिक सामान साथ ले जा सकते थे।
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लाइट सोलर सिस्टम से ही जलती थी, जिस लाइट की जरूरत थी, वहीं जलाते थे। हालांकि इस अभियान के दौरान अनेक परेशानियां भी आई, लेकिन मन में एक जुनून था और दृढ़ निश्चय था कि चाहे कुछ भी हो, बस आगे जाना है। पूरी टीम ने हौसले के साथ इस अभियान को पूरा कर देश का नाम रोशन किया।
मील का पत्थर साबित होगी यह समुद्री यात्रा
यह यात्रा भारतीय सेना की महिलाओं की परिचालन शक्ति और तालमेल को प्रदर्शित करती है। इस यात्रा में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों का दल शामिल था, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा, मेजर तान्या, कैप्टन ओमिता, कैप्टन दौली, कैप्टन प्राजक्ता, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका, स्क्वाड्रन लीडर विभा, स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा, और अन्य शामिल थीं। यह मिशन भारत के रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है और भारत की समुद्री यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया मुकाम देने का लक्ष्य रखता है।
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मेजर कर्मजीत कौर के पिता एडवोकेट रिछपाल सिंह बेटी की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं। मेजर ने यह यात्रा स्वदेश निर्मित 56 फुट लंबे जहाज त्रिवेणी पर की, जिसमें टीम को तूफानों, समुद्र की ऊंची लहरों और थकान का सामना करना पड़ा। इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद टीम मुंबई लौट आई।
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बतौर मेजर कर्मजीत कौर रंधावा ने बताया कि उनका शुरू से ही लक्ष्य था सेना में नौकरी कर देश सेवा की जाए। आखिरकार मेहनत रंग लाई और वर्ष 2015 में चयन फौज में हो गया। अभी मेरी तैनाती मुंबई में है। उसने बताया कि 7 अप्रैल को मुंबई से इस अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। यह बोट ऐसी थी, जो कि हवा से ही चलती थी, न तो डीजल था, न लाइट और न ही अत्यधिक सामान साथ ले जा सकते थे।
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लाइट सोलर सिस्टम से ही जलती थी, जिस लाइट की जरूरत थी, वहीं जलाते थे। हालांकि इस अभियान के दौरान अनेक परेशानियां भी आई, लेकिन मन में एक जुनून था और दृढ़ निश्चय था कि चाहे कुछ भी हो, बस आगे जाना है। पूरी टीम ने हौसले के साथ इस अभियान को पूरा कर देश का नाम रोशन किया।
मील का पत्थर साबित होगी यह समुद्री यात्रा
यह यात्रा भारतीय सेना की महिलाओं की परिचालन शक्ति और तालमेल को प्रदर्शित करती है। इस यात्रा में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों का दल शामिल था, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा, मेजर तान्या, कैप्टन ओमिता, कैप्टन दौली, कैप्टन प्राजक्ता, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका, स्क्वाड्रन लीडर विभा, स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा, और अन्य शामिल थीं। यह मिशन भारत के रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है और भारत की समुद्री यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया मुकाम देने का लक्ष्य रखता है।