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टिड्डियों का प्रकोपः कृषि विभाग ने कंट्रोल रूम बनाया कल से किसानों को मिलेगा कीटनाशक

Sat, 25 Jan 2020 10:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 10:39 PM IST
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locust outbreak agriculture department set up control room, farmers will get pesticides from tomorrow
locust outbreak agriculture department set up control room, farmers will get pesticides from tomorrow - फोटो : Sirsa
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में फसलों को खाने वाले टिड्डी दल ने डबवाली व कालांवाली के सीमावर्ती गांवों में दस्तक दे दी है। हवा की दिशा बदलने के कारण इनकी दस्तक से कृषि विभाग अलर्ट हो गया है और विभागीय टीमों ने सीमावर्ती गांवों का दौरा किया। अभी इनकी संख्या गिनी-चुनी ही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि ये सिरसा का मौसम व मिट्टी इनके प्रतिकूल है, इसलिए किसानों को अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है। विभागीय टीम ने शनिवार को फिर से गांव चौटाला, भारूखेड़ा का निरीक्षण किया। विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष भी बनाया है।
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डबवाली व कालांवाली के चट्ठा, देसूजोधा, नौरंग, पन्नीवाला मोरिका गांवों में टिड्डियां पाई गई हैं। देसूजोधा के किसान कुलदीप सिंह ने बताया कि उनके खेतों में अभी गिनी-चुनी टिड्डियां हैं। लेकिन पांच किलोमीटर दूर फुल्लों व पंजाब के सुखलदी गांव में इनकी संख्या काफी है। वहां के किसानों ने एक वीडियो भी भेजी है, जिसमें टिड्डी को पकड़ने पर वह काटता है और खून निकाल देते हैं।
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यह बोले किसान
गांव चट्ठा के किसान कौर सिंह, मोदन सिंह, गुरदेव सिंह, छोटा सिंह, आत्मा सिंह, बलजीत सिंह, मदनलाल, बलकार सिंह, सुखवीर सिंह, धर्म सिंह, बलकरण सिंह, राजवंत सिंह व सुखवीर सिंह ने बताया कि उनके खेतों में कहीं-कहीं पर टिड्डियां मिली हैं, लेकिन नुकसान कुछ नहीं हुआ। कृषि अधिकारियों ने एक एकड़ में 250 एमएल क्लोरो दवाई छिड़कने को कहा है। कौर सिंह ने बताया कि धुआं करने, स्प्रे का ढोल भरकर रखने व खड़का करने के लिए कहा गया है।
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हिसार से वैज्ञानिकों की टीम भी करेगी निरीक्षण
कृषि विभाग के एसडीओ अजय कुमार यादव ने बताया कि बीते दिवस उन्होंने चौटाला के साथ लगते गांव भारूखेड़ा व बणी के 150 से 200 एकड़ का निरीक्षण किया था। तब एक, दो या चार टिड्डी दिखाई दी थीं, लेकिन आज उन्हें कुछ नहीं दिखा। गांव चट्ठा से सूचना मिलने पर हमने मौके पर पहुंचकर वहां का निरीक्षण किया। कुल मिलाकर स्थिति शुक्रवार जैसी ही थी। कहीं-कहीं पर टिड्डी दिखी। उन्होंने बताया कि गांव के साथ लगते पंजाब क्षेत्र के गांव सेखू तथा फुल्लों की सीमा पर निरीक्षण किया है। हिसार से वैज्ञानिकों की एक टीम आ रही है। वह टीम भी निरीक्षण करेगी। घबराने की कोई बात नहीं है। संख्या कम होने के कारण अभी कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जा सकता।
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. बाबू लाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर आदि जिलों मे टिड्डी का प्रकोप चल रहा था, जोकि गत दो तीन दिनों से सिरसा के सीमावर्ती गांव चौटाला, भारूखेड़ा, मम्मड़खेड़ा में 5 से 7 टिड्डियां देखी गई थीं। सूचना प्राप्त होते ही विभाग की टीमों द्वारा इन गांवों का निरीक्षण किया गया तो कुछ खेतों में कुछ टिड्डियां पाई गई हैं। निरीक्षण के लिए विभाग द्वारा टीमें गठित कर दी गई हैं व टीम किसानों के संपर्क में है।

ढोल-नगाड़े व खाली पीपों से आवाज कर पाया जा सकता है काबू
उप निदेशक कृषि बाबू लाल का कहना है कि टिड्डी दल सूरतगढ़ (राजस्थान) के पास है इसलिए चिंता का विषय नहीं है। अगर किसी कारण हवा की दिशा के साथ यह टिड्डी दल सीमा के साथ लगते गांवों में प्रवेश करता है तो किसान ढोल, नगाड़े व खाली पीपों से आवाज करके टिड्डी दल बैठने से रोका जा सकता है व कीटनाशकों के प्रयोग द्वारा भी इस पर काबू पाया जा सकता है। यदि किसी भी किसान को अगर कहीं टिड्डी दल देखने व होने की सूचना मिलती है तो तुरंत नियंत्रण कक्ष में सूचित करें। उप मंडल कृषि अधिकारी सिरसा के मोबाइल नंबर 94162-51690, उप मंडल कृषि अधिकारी डबवाली के मोबाइल नंबर 94162-49481 तथा सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी सिरसा के मोबाइल नंबर 94666-12403 पर टिड्डी दल की सूचना दी जा सकती है।
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