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Sirsa News: सेमिनार में देश की जनजातीय विरासत पर दिया व्याख्यान
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सिरसा।डिंग डाइट में आयोजित व्याख्यान में मुख्य अतिथि को सम्मानित करते हुए डाइट सदस्य । डिंग डा
सिरसा। जनजातीय गौरव दिवस व भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में डिंग डाइट में शनिवार को ज्ञानवर्धक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।सेमिनार का स्वरूप द्वि-विषयक रहा और इसे दो सत्रों में विभाजित किया गया।
पहले सत्र में राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा के अंग्रेजी विभाग के प्रो. सत्यपॉल बिश्नोई ने जनजातीय गौरव विषय पर अपना विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की जनजातीय विरासत, जनजातीय समुदायों का योगदान, उनकी विविध संस्कृति, संघर्षों और आजादी के आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर गहराई से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन समुदायों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने सदियों से देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया है। उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों को यह समझाया कि जनजातीय समाज भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण आधार रहा है और आज भी देश की विविधता में उनका योगदान अमूल्य है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाइट प्रभारी सुरेंद्र सिंह नूनिया ने की। संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी दलीप सिंह गोदारा व सह-समन्वयक डॉ. राजेश खुराना ने संभाली।
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दूसरे सत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल की दी जानकारी
दूसरे सत्र में राजकीय महिला महाविद्यालय के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रो. एवं अध्यक्ष डॉ. विक्रमजीत सिंह ने बारडोली सत्याग्रह विषय पर अत्यंत प्रेरक प्रस्तुति दी। उन्होंने पटेल के नेतृत्व कौशल, संगठन क्षमता और जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार बारडोली सत्याग्रह स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदलने वाला एक निर्णायक क्षण बना। सरदार पटेल न केवल किसान आंदोलनों के नेता थे, बल्कि स्वतंत्र भारत के एकीकरण में उनकी भूमिका अतुलनीय रही।
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पहले सत्र में राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा के अंग्रेजी विभाग के प्रो. सत्यपॉल बिश्नोई ने जनजातीय गौरव विषय पर अपना विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत की जनजातीय विरासत, जनजातीय समुदायों का योगदान, उनकी विविध संस्कृति, संघर्षों और आजादी के आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर गहराई से प्रकाश डाला।
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उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन समुदायों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने सदियों से देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया है। उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों को यह समझाया कि जनजातीय समाज भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण आधार रहा है और आज भी देश की विविधता में उनका योगदान अमूल्य है। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाइट प्रभारी सुरेंद्र सिंह नूनिया ने की। संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी नोडल अधिकारी दलीप सिंह गोदारा व सह-समन्वयक डॉ. राजेश खुराना ने संभाली।
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दूसरे सत्र में सरदार वल्लभभाई पटेल की दी जानकारी
दूसरे सत्र में राजकीय महिला महाविद्यालय के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रो. एवं अध्यक्ष डॉ. विक्रमजीत सिंह ने बारडोली सत्याग्रह विषय पर अत्यंत प्रेरक प्रस्तुति दी। उन्होंने पटेल के नेतृत्व कौशल, संगठन क्षमता और जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार बारडोली सत्याग्रह स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदलने वाला एक निर्णायक क्षण बना। सरदार पटेल न केवल किसान आंदोलनों के नेता थे, बल्कि स्वतंत्र भारत के एकीकरण में उनकी भूमिका अतुलनीय रही।