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Sirsa: कोर्ट कॉलोनी की 23 वर्षीय जैसमीन प्रीत कौर बनीं जज, सोशल मीडिया से रखी दूरी, पढ़िए सफलता की कहानी

Tue, 18 Oct 2022 11:44 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 18 Oct 2022 11:44 PM IST
सार

जैसमीन प्रीत कौर दिन में दो मिनट ही घर पर बात करती थीं। इस उपलब्धि से पूरा परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। जैसमीन का भाई आर्यन यूएस कैलिफोर्निया में इंजीनियर की पढ़ाई कर रहा है।

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Jasmin Preet Kaur of Sirsa became the judge
जैसमीन प्रीत कौर को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर करते माता-पिता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सोशल मीडिया से दूरी और अपनी कड़ी मेहनत से हरियाणा के सिरसा शहर की कोर्ट कॉलोनी निवासी जैसमीन प्रीत कौर ने छोटी सी उम्र में बड़ी उपाधि हासिल की है। 23 वर्षीय जैसमीन सिविल सेवा न्यायिक परीक्षा उत्तीर्ण कर जज बनी हैं। इस उपलब्धि से पूरा परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।  

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जैसमीन कोर्ट कॉलोनी निवासी हरप्रीत सिंह की पुत्री एवं सरदार बलवंत सिंह की पोती हैं। संपन्न परिवार से होते हुए भी जैसमीन ने अपने पास साधारण मोबाइल फोन रखकर निरंतर पढ़ाई जारी रखी। इसमें परिवार ने खूब साथ दिया। जैसमीन ने वर्ष 2021 में बीए एलएलबी की परीक्षा प्रीतमपुरा दिल्ली से उत्तीर्ण की है। इसके बाद 2022 में पहली बार में ही सिविल सेवा न्यायिक परीक्षा उत्तीर्ण की। जैसमीन का भाई आर्यन यूएस कैलिफोर्निया में इंजीनियर की पढ़ाई कर रहा है।
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दिन में 19 घंटे की पढ़ाई 
जैसमीन कौर बताती हैं कि उन्होंने इस उपलब्धि को पाने के लिए पूरा-पूरा दिन पढ़ाई की है। वह दिन में 19 घंटे पढ़ाई किया करती थीं और केवल 3 से 4 घंटे ही सोती थीं। जैसमीन ने बताया कि उन्हें नींद तो आती थी, लेकिन सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने आप हमेशा प्रेरित किया। जैसमीन ने बताया कि उनकी माता दिवेंद्र कौर भी सिरसा की कोर्ट में एडवोकेट हैं। इनको देखकर बचपन से ही उनके मन में जज्बा भर जाता था। 
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दिन में सिर्फ परिवार से दो मिनट ही करतीं बात
जिस उम्र में युवा सोशल मीडिया और फोन में लगे रहते हैं, उस समय में जैसमीन कौर इनसे दूरी रखी। घर वालों से बात करने के लिए साधारण मोबाइल फोन रखा हुआ था। परिवार से एक दिन में एक ही कॉल आता था वो भी सिर्फ 2 मिनट के लिए। इस कॉल में घर वाले हालचाल, खाना खाया, तबीयत के बारे में पूछकर कॉल काट दिया करते थे। 
 
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नौवीं कक्षा में देखा था सपना
जैसमीन कौर ने बताया कि उनका बचपन से सपना था कि वो कोई बड़ी उपलब्धि हासिल करें। नौवीं कक्षा में वह आईएएस या फिर ज्यूडिशरी में जाना चाहती थीं, लेकिन इसके बाद वो चीफ जस्टिज ऑफ इंडिया और उनके परिवार को फॉलो करने लगीं। वो हमेशा सोचती थीं कि इनकी फैमिली में हर कोई नए मुकाम पर रहा है तो मैं भी कुछ बड़ा करूंगी। जैसमीन ने बताया कि इसके बाद उन्होंने जज बनने का फैसला किया। इसके बाद उनका सपना था कि पहली कोशिश में ही वह अपनी मंजिल पा लें। 

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