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कनाडा से पढ़ाई कर लौटीं ईशा गांव के ही 60 बच्चों को कर रही शिक्षित
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ात्राओं के साथ ईशा गोदारा व अन्य।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अच्छे मौके देने के उद्देश्य से कैनेडा में अपनी पढ़ाई पूरी कर लौटी ईशा अपने गांव के करीब 60 बच्चों को शिक्षा दे रही है। वह बच्चों को किताबों के साथ जोड़ रही है, जिसके लिए उन्होंने गांव में ही एक लाइब्रेरी बनाई है। जिसमें बैठकर बच्चे किताबें पढ़ते हैं।
ओढ़ा खंड के गावं ख्योली के जमींदार परिवार में पैदा हुई ईशा का कहना है कि बच्चों के लिए कुछ करने के जज्बे में उनके दादा चौधरी जगदीश गोदारा का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने ही मुझे किताबें व सामाजिक हित करने जैसे कार्यों में जोड़ा। ईशा स्नातक की पढ़ाई करने के लिए 2016 में कैनेडा गई। इस दौरान उन्होंने वहां चल रही समाज सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने देखा कि सामाजिक संस्थाएं वहां के यूथ को जागरूक करने के साथ अच्छी शिक्षा देती है। वह यह कार्य छोटी उम्र के बच्चों से शुरू करते है ताकि नींव मजबूत बनी रहे।
पिछले वर्ष 2020 में वह अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर अपने गांव ख्योली लौटी। विदेश की समाजसेवी संस्थाओं से प्रभावित ईशा गोदारा ने 5 सितंबर, 2020 को शिक्षक दिवस के मौके पर अच्छी शिक्षा देने के प्रयास से गांव के ही छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। यह प्रयास सफल रहा और बच्चे साथ जुड़ने लगे। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य बेहतर शिक्षा देना है ना कि बच्चों को किताबी ज्ञान देना। करीब दस महीनों तक गांव के बच्चों को पढ़ाने के बाद जीवम फाउंडेशन के नाम से संस्था बनाई। अब इसमें ईशा के साथ तीन और अध्यापक भी संस्था से जुड़े बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का काम कर रहे है। उनका उद्देश्य है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों व स्कूल ना जा पाने वाले बच्चों को जीवन में कुछ बेहतर करने का मौका देना है। इस उद्देश्य को पाने के लिए किताबों से प्रेम होना जरूरी है। हमारे पास जितना ज्ञान होगा उतना ही जीवन में सफलता पाना आसान होगा।
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इसी दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों से कामयाब लोगों एवं मार्गदर्शकों द्वारा बच्चों के भविष्य व उनकी शिक्षा के बारे में 10 से भी ज्यादा कॅरियर टॉक प्रदान की गई।
बच्चों की रुचि देख खोला पुस्तकालय व कला केंद्र
ईशा गोदारा द्वारा एक साल के प्रयास के बाद जब बच्चे पढ़ने में रूची लेने लगे तो उन्होंने बच्चों के लिए सामुदायिक सेवा केंद्र में निशुल्क पुस्तकालय व कला केंद्र खोला है। पुस्तकालय में जीवम फाउंडेशन की ओर से 500 से अधिक पुस्तकें व कला के सामान का प्रबंध किया है। बच्चे यहां किताबें पढ़ सकते है व साथ ही साथ खेल और कला जैसी चीजों में भाग लेकर अपना हुनर भी निखार सकते हैं।
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ओढ़ा खंड के गावं ख्योली के जमींदार परिवार में पैदा हुई ईशा का कहना है कि बच्चों के लिए कुछ करने के जज्बे में उनके दादा चौधरी जगदीश गोदारा का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने ही मुझे किताबें व सामाजिक हित करने जैसे कार्यों में जोड़ा। ईशा स्नातक की पढ़ाई करने के लिए 2016 में कैनेडा गई। इस दौरान उन्होंने वहां चल रही समाज सेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने देखा कि सामाजिक संस्थाएं वहां के यूथ को जागरूक करने के साथ अच्छी शिक्षा देती है। वह यह कार्य छोटी उम्र के बच्चों से शुरू करते है ताकि नींव मजबूत बनी रहे।
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पिछले वर्ष 2020 में वह अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर अपने गांव ख्योली लौटी। विदेश की समाजसेवी संस्थाओं से प्रभावित ईशा गोदारा ने 5 सितंबर, 2020 को शिक्षक दिवस के मौके पर अच्छी शिक्षा देने के प्रयास से गांव के ही छोटे बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। यह प्रयास सफल रहा और बच्चे साथ जुड़ने लगे। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य बेहतर शिक्षा देना है ना कि बच्चों को किताबी ज्ञान देना। करीब दस महीनों तक गांव के बच्चों को पढ़ाने के बाद जीवम फाउंडेशन के नाम से संस्था बनाई। अब इसमें ईशा के साथ तीन और अध्यापक भी संस्था से जुड़े बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का काम कर रहे है। उनका उद्देश्य है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों व स्कूल ना जा पाने वाले बच्चों को जीवन में कुछ बेहतर करने का मौका देना है। इस उद्देश्य को पाने के लिए किताबों से प्रेम होना जरूरी है। हमारे पास जितना ज्ञान होगा उतना ही जीवन में सफलता पाना आसान होगा।
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इसी दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों से कामयाब लोगों एवं मार्गदर्शकों द्वारा बच्चों के भविष्य व उनकी शिक्षा के बारे में 10 से भी ज्यादा कॅरियर टॉक प्रदान की गई।
बच्चों की रुचि देख खोला पुस्तकालय व कला केंद्र
ईशा गोदारा द्वारा एक साल के प्रयास के बाद जब बच्चे पढ़ने में रूची लेने लगे तो उन्होंने बच्चों के लिए सामुदायिक सेवा केंद्र में निशुल्क पुस्तकालय व कला केंद्र खोला है। पुस्तकालय में जीवम फाउंडेशन की ओर से 500 से अधिक पुस्तकें व कला के सामान का प्रबंध किया है। बच्चे यहां किताबें पढ़ सकते है व साथ ही साथ खेल और कला जैसी चीजों में भाग लेकर अपना हुनर भी निखार सकते हैं।