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अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस : आटा चक्की से शुरू किया काम, अब बेकरी चला प्रेरणा स्त्रोत बनी गांव की महिलाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 11:21 PM IST
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International Rural Women's Day: Work started from flour mill, now the women of the village became a source of inspiration for the bakery
डबवाली गांव में स्थापित बेकरी में काम करती महिलाएं। संवाद - फोटो : Sirsa
सिरसा। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। चाहे आसमान में नया कीर्तिमान स्थापित करना हो या फिर जमीन पर रहकर स्वावलंबी बनकर घर के आर्थिक खर्च में सहयोग करना हो। महिलाओं ने हमेशा खुद को साबित किया है। वहीं जिला के डबवाली गांव की महिलाएं स्वावलंबी बनकर खुद की आटे की चक्की व बेकरी चला रही है। एक साल पहले एक महिला द्वारा शुरू किए गए काम में अब गांव की 10 महिलाएं काम कर रही है।
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डबवाली गांव की कमलजीत कौर ने एक साल पहले आटा की चक्की चलाने का काम शुरू किया। जिसमें वह आटा पीसने का कार्य करती थी। इसी दौरान वह स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से मिली और संगठन का हिस्सा बनी। जिसमें उसे विभाग द्वारा ऋण देने के बारे में पता चला। जिसके बाद कमलजीत के साथ इस कार्य में संगठन का एक समूह जुड़ा और महिलाओं ने आटा चक्की के साथ तेल निकालने व खल बनाने का काम भी शुरू कर दिया। जिसमें 6 से 7 महिलाओं ने स्वावलंबी बनकर काम शुरू किया। इसके बाद डबवाली गांव की 10 महिलाओं ने ग्रामीण आजीविका मिशन से ऋण लेकर व स्वयं की बचत से एक बेकरी स्थापित जिसका नाम महिलाओं द्वारा गुरुनानक उद्यमी रखा गया है।
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आर्थिक संकट ने महिलाओं को बनाया स्वावलंबी
डबवाली गांव की महिलाओं ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके मन में कुछ करने की ठानी। ऐसे में स्वयं सहायता समूह में जुड़कर ऋण तो ले लेते थे, लेकिन उसे कहीं न कहीं घर के कामों में ही प्रयोग कर देते थे। ऐसे में ऋण को वापिस करने का संकट खड़ा हो जाता था। महिलाओं ने इस संकट से लड़ने के लिए रोजगार चलाकर ऋण उतारने की ठानी। महिलाओं का कहना है ऋण उतारने के साथ- साथ घर पर भी सहयोग कर रही है।
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बेकरी के लिए सभी महिलाओं ने दी साझेदारी
महिलाओं के मुताबिक बेकरी स्थापित करने के लिए लगभग 10 लाख रुपये का खर्चा आया है। जिसमें संगठन की 10 महिलाएं काम करती है। बेकरी स्थापित करने के लिए महिलाओं ने 4 लाख रुपये अपने निजी कोष से लगाएं है। वहीं बाकी 6 लाख रुपये महिलाओं ने विभाग से ऋण लेकर लगाया है।

प्रतिदिन खर्चा निकालकर होती है 2000 रुपये की बचत
महिलाओं द्वारा आटा की चक्की और बेकरी से प्रतिदिन 2000 रुपये की आमदन होती है। जिसके हिसाब से प्रत्येक महिला को 200 रुपये दिहाड़ी पड़ती है। वहीं सभी महिलाओं को लीड कर रही कमलजीत का कहना है कि यह आंकड़ा बदल भी जाता है। कभी बेकरी की आमदन कम होती है तो महिलाओं की आमदन भी कम होती है। वहीं बेकरी की आमदन ज्यादा होती है तो सभी महिलाओं को सामान रूप से मुनाफा होता है।
लघु उद्योग में ये सब बनाती महिलाएं
1. आटा पिसाई का काम
2. तेल निकालने का काम
3. खल बनाने का काम
4. बिस्कुट बनाना
5. पेटिज बनाने का काम
6. ब्रेड बनाने का काम
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