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Sirsa News: फाइनेंसर से 10 करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी डॉक्टर ने जीभ में कैंसर होने हवाला देकर मांगी अंंतरिम जमानत, कोर्ट ने ठुकराई याचिका

Wed, 08 Jan 2025 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 08 Jan 2025 11:38 PM IST
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In the case of demanding 10 crores extortion from a financier, the doctor accused sought interim bail citing tongue cancer, the court rejected the petition
हितेश चतुर्वेदी
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सिरसा। फाइनेंसर से व्हाट्सएप कॉल करके 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में आरोपी डॉक्टर संजीव कौशल को सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिली है। आरोपी डॉक्टर इस समय चंडीगढ़ पीजीआई में दाखिल है। उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में याचिका दायर कर अंतरिम जमानत मांगी थी।

याचिका में आरोपी डॉक्टर ने न्यायालय को बताया था कि उसकी जीभ के दाहिने किनारे पर ऐसा अल्सर है जोकि ठीक नहीं हो रहा। गंभीर दर्द होता है, जो कैंसर के संकेत हैं। इसलिए बड़े अस्पताल में तत्काल आधार पर चीरा बायोप्सी की जरूरत है। उपचार में देरी हुई तो कैंसर फैलने के साथ शरीर के अन्य भागों में मेटास्टेसिस हो सकता है। जिससे उसकी जीवन को खतरा हो सकता है।
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संजीव कौशल के अधिवक्ता ने न्यायाधीश वाणी गोपाल शर्मा से कहा कि डॉ. संजीव कौशल को 22 दिसंबर 2024 को शहर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसे जीभ के कैंसर के निदान के लिए 24 दिसंबर को सिविल अस्पताल सिरसा ले जाया गया। 27 दिसंबर को उसे अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। 28 दिसंबर को उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। याचिकाकर्ता वृद्ध व्यक्ति है और अस्थमा और अनिद्रा की समस्या से उसे है। याचिकाकर्ता का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड सिरसा जेल के पास उपलब्ध है। याचिकाकर्ता न तो जांच में हस्तक्षेप करेगा और न ही अभियोजन पक्ष के सबूतों से साथ छेड़छाड़ करेगा। इसलिए उसे अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। संवाद
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सरकारी वकील ने कहा- फरार हो सकता है आरोपी

सरकारी वकील ने न्यायाधीश से कहा कि सिरसा जेल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह द्वारा अपनी रिपोर्ट दाखिल की गई है। पुलिस ने भी अपना जवाब दाखिल किया है। जवाब में पुलिस ने कहा है कि याचिकाकर्ता का इलाज जेल प्रशासन द्वारा पीजीआई चंडीगढ़ में किया जा रहा है। यदि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह फरार हो सकता है। वह मुकदमे का सामना करने से बच सकता है और गवाहों को डरा सकता है।





घातक बीमारी की अभी पुष्टि नहीं हुई है : न्यायाधीश

बचाव व सरकारी पक्ष का तर्क सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश वाणी गोपाल शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता की घातक बीमारी की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है क्योंकि अभी तक कोई बायोप्सी नहीं की गई है। याचिकाकर्ता पर दंडनीय अपराध करने का मामला दर्ज है। इस मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता का चंडीगढ़ पीजीआई में उपचार चल रहा है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है उसे यहां पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है। हालांकि बायोप्सी किए जाने के बाद यदि कोई अन्य जटिलता पाई जाती है, जिसके लिए अधिक विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है तो याचिकाकर्ता को नया आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी।





ये है पूरा मामला

बता दें कि डॉ. संजीव कौशल का अपने पड़ोसी वीके फाइनेंसर के संचालक विनोद कुमार से झगड़ा चल रहा था। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. कौशल ने अपने पुराने साथी विनोद गोदारा जोकि इस समय कनाडा में रह रहा है से संपर्क किया। विनोद गोदारा ने आश्वासन दिया कि फाइनेंसर उसे जानता है और वह समझौता करवा देगा। गोदारा ने फाइनेंसर को व्हाट्सएप कॉल की तो बात समझौते तक नहीं पहुंची। इस पर विनोद ने अपने भतीजे गांव खाई शेरगढ़ निवासी सुशील को फाइनेंसर के पास भेजा और बात कराने को कहा। सुनील ने बात करवाई तो विनोद गोदारा ने फाइनेंसर को गालियां दीं। इसके बाद फाइनेंसर ने पुलिस को शिकायत दी कि उससे 10 करोड़ की रंगदारी मांगी गई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर डॉ. संजीव कौशल व सुशील को गिरफ्तार कर लिया।
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