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Sirsa News: मैं पुस्तक हूं, मुझसे ज्ञान लीजिए, जितना लोगे, उतना आगे बढ़ोगे
Mon, 22 Apr 2024 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 22 Apr 2024 11:48 PM IST
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पुस्तकालय में पढ़ाई करते बच्चे।
सिरसा। पुस्तक एक ऐसा जरिया है, जो हमारे ज्ञान को बढ़ाती है। भले ही आज सोशल मीडिया का जमाना आ गया हो अथवा ऑनलाइन कक्षाएं भी लग रही हैं, लेकिन पुस्तकों के बिना ज्ञान अभी भी पूरा नहीं होता। सिरसा की एकमात्र जिला लाइब्रेरी ऐसे इच्छुक लोगों के लिए खुली हुई है, जो अपना ज्ञान बढ़ाने चाहते हैं। 35 हजार पुस्तकों का भंडार लिए इस लाइब्रेरी में प्रतिदिन 300 के करीब युवा अपनी पढ़ाई करते हैं। यहां पर आने वाले युवाओं में सबसे अधिक बच्चे प्रतियोगी तैयारियों वाले होते हैं।
कखग से लेकर आईआरएस, आईएएस, आईपीएस, डॉक्टरेट सहित तकनीकी विज्ञान से लेकर हर वह कोर्स जो हम पूरा करना चाहते हैं, उनमें पुस्तकें ही हमारा सहारा है। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे सरकारी नौकरी हो अथवा बड़े संस्थानों में एडमिशन लेने की बात। पुस्तकें हमारे बीच में ही रहती हैं। पुस्तकें खरीदना हर बच्चे के बस की बात नहीं होती, कई पुस्तकें काफी महंगी भी होती हैं, लेकिन सिरसा की एकमात्र जिला लाइब्रेरी में बच्चों को हर प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं। यहां पर केवल विद्यार्थी ही नहीं बल्कि समाज का हर व्यक्ति मुफ्त में आकर पुस्तकें पढ़ सकता है। सिरसा में इस लाइब्रेरी को वर्ष 1984 में आरंभ किया गया था। तब से लेकर अब तक यह लाइब्रेरी निर्बाध गति से चल रही है। प्रतिदिन 250 से 300 बच्चे यहां आकर पढ़ते हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए यहां अच्छा वातावरण दिया गया है। दो बड़े हॉल हैं, जिसमें 250 बच्चों के एक साथ पढ़ने की क्षमता है। यही नहीं गर्मी के दिनों में वातानुकूलित वातावरण बच्चों को मिल रहा है। संवाद
-शोध से लेकर हर प्रकार की पुस्तकें
जिला लाइब्रेरी में प्रेरक प्रसंग, महान लोगों की ऑटो बायोग्राफी, शेक्सपीयर से लेकर मुंशी प्रेमचंद जैसे सरीखे हिंदी के लेखकों की किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर प्रकार की किताबें, तकनीकी शिक्षा से संबंधित किताबें, सभी प्रकार के विषयों की किताबें, हिंदी व अंग्रेजी के सभी अखबार आसानी से मिलते हैं। यहां पर वातावरण ऐसा है कि बच्चे शांत वातावरण में यहां पर शिक्षा ग्रहण करते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई बच्चे तो सुबह 10 बजे लाइब्रेरी आ जाते हैं। वे दोपहर का खाना साथ लेकर आते हैं और शाम को 5 बजे लाइब्रेरी बंद होने के समय ही यहां ेस बाहर निकलते हैं।
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-मांग के अनुसार, पहुंच जाती हैं किताबें
लाइब्रेरी में उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से मांग के अनुसार हर साल किताबें भेजी जाती हैं। यहां पर बच्चों की जिन किताबों की मांग होती है, उनकी लिस्ट बनाकर उच्चतर शिक्षा विभाग को भेज दी जाती है। उसके बाद वह उन्हें उपलब्ध हो जाती है। इसके अलावा स्टाफ के रख-रखाव के लिए अलग से बजट जारी होता है। यही नहीं इस लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी की सुविधा है, जिसमें बच्चों को ई-शोध गंगा, ईपीजी पाठशाला, ई-शोध सिंधू, एनडीसी, विद्वान व ई-कोष के लिंक मिलते हैं। ई- शोध गंगा में बड़े-बड़े शोधकर्ताओं के शोध रखे हुए हैं, जिसको पीएचडी करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे आसानी से पढ़ सकते हैं।
जिला लाइब्रेरी में बच्चों को हर प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। बच्चे अपनी मनमर्जी से कभी भी आकर यहां पर पढ़ सकते हैं। इसके अलावा आम जनता के लिए भी यहां पर फ्री में पढ़ने की छूट है। लाइब्रेरी के कई सदस्य भी बने हुए हैं, जो 500 रुपये देकर इसके सदस्य बने हैं। अब तक 1907 सदस्य बन चुके हैं और वह घर ले जाकर भी लिटरेचर व उपन्यास आदि पढ़ते हैं। इनमें व्यापारी, कामकाजी महिलाएं, गृहिणियां, अधिकारी भी शामिल हैं।
-सुनील मेहता, लाइब्रेरियन एवं इंचार्ज, जिला लाइब्रेरी, सिरसा।
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कखग से लेकर आईआरएस, आईएएस, आईपीएस, डॉक्टरेट सहित तकनीकी विज्ञान से लेकर हर वह कोर्स जो हम पूरा करना चाहते हैं, उनमें पुस्तकें ही हमारा सहारा है। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे सरकारी नौकरी हो अथवा बड़े संस्थानों में एडमिशन लेने की बात। पुस्तकें हमारे बीच में ही रहती हैं। पुस्तकें खरीदना हर बच्चे के बस की बात नहीं होती, कई पुस्तकें काफी महंगी भी होती हैं, लेकिन सिरसा की एकमात्र जिला लाइब्रेरी में बच्चों को हर प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं। यहां पर केवल विद्यार्थी ही नहीं बल्कि समाज का हर व्यक्ति मुफ्त में आकर पुस्तकें पढ़ सकता है। सिरसा में इस लाइब्रेरी को वर्ष 1984 में आरंभ किया गया था। तब से लेकर अब तक यह लाइब्रेरी निर्बाध गति से चल रही है। प्रतिदिन 250 से 300 बच्चे यहां आकर पढ़ते हैं। बच्चों को पढ़ाई के लिए यहां अच्छा वातावरण दिया गया है। दो बड़े हॉल हैं, जिसमें 250 बच्चों के एक साथ पढ़ने की क्षमता है। यही नहीं गर्मी के दिनों में वातानुकूलित वातावरण बच्चों को मिल रहा है। संवाद
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-शोध से लेकर हर प्रकार की पुस्तकें
जिला लाइब्रेरी में प्रेरक प्रसंग, महान लोगों की ऑटो बायोग्राफी, शेक्सपीयर से लेकर मुंशी प्रेमचंद जैसे सरीखे हिंदी के लेखकों की किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर प्रकार की किताबें, तकनीकी शिक्षा से संबंधित किताबें, सभी प्रकार के विषयों की किताबें, हिंदी व अंग्रेजी के सभी अखबार आसानी से मिलते हैं। यहां पर वातावरण ऐसा है कि बच्चे शांत वातावरण में यहां पर शिक्षा ग्रहण करते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई बच्चे तो सुबह 10 बजे लाइब्रेरी आ जाते हैं। वे दोपहर का खाना साथ लेकर आते हैं और शाम को 5 बजे लाइब्रेरी बंद होने के समय ही यहां ेस बाहर निकलते हैं।
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-मांग के अनुसार, पहुंच जाती हैं किताबें
लाइब्रेरी में उच्चतर शिक्षा निदेशालय की ओर से मांग के अनुसार हर साल किताबें भेजी जाती हैं। यहां पर बच्चों की जिन किताबों की मांग होती है, उनकी लिस्ट बनाकर उच्चतर शिक्षा विभाग को भेज दी जाती है। उसके बाद वह उन्हें उपलब्ध हो जाती है। इसके अलावा स्टाफ के रख-रखाव के लिए अलग से बजट जारी होता है। यही नहीं इस लाइब्रेरी में ई-लाइब्रेरी की सुविधा है, जिसमें बच्चों को ई-शोध गंगा, ईपीजी पाठशाला, ई-शोध सिंधू, एनडीसी, विद्वान व ई-कोष के लिंक मिलते हैं। ई- शोध गंगा में बड़े-बड़े शोधकर्ताओं के शोध रखे हुए हैं, जिसको पीएचडी करने के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे आसानी से पढ़ सकते हैं।
जिला लाइब्रेरी में बच्चों को हर प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। बच्चे अपनी मनमर्जी से कभी भी आकर यहां पर पढ़ सकते हैं। इसके अलावा आम जनता के लिए भी यहां पर फ्री में पढ़ने की छूट है। लाइब्रेरी के कई सदस्य भी बने हुए हैं, जो 500 रुपये देकर इसके सदस्य बने हैं। अब तक 1907 सदस्य बन चुके हैं और वह घर ले जाकर भी लिटरेचर व उपन्यास आदि पढ़ते हैं। इनमें व्यापारी, कामकाजी महिलाएं, गृहिणियां, अधिकारी भी शामिल हैं।
-सुनील मेहता, लाइब्रेरियन एवं इंचार्ज, जिला लाइब्रेरी, सिरसा।