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आंखों की जांच के लिए अस्पताल में आई आधुनिक एनसीटी मशीन
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सिविल अस्पताल में रखी आधुनिक मशीन।
- फोटो : Sirsa
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सिविल अस्पताल सिरसा में आंखों की जांच के लिए नई तकनीक आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने यह आधुनिक मशीनें जिले के अधिकतर अस्पतालों में भेजी है। सिविल अस्पताल सिरसा में आंखों में काला मोतिया जांच करने के लिए विभाग ने नॉन कांटेक्ट टोनोमीटर (एनसीटी) मशीन उपलब्ध करवाई है। जिससे आंखों के मरीजों का बेहतर तरीके से इलाज किया जा सकेगा।
इस मशीन द्वारा मरीज की आंखों में काला मोतिया की जांच की जाती है। इस मशीन के द्वारा मरीज की जांच दूर से ही की जाती है जबकि जो पहले मशीन उपयोग में लाई जाती थी उसमें मरीज की आंखों के ऊपर रखकर उसकी जांच की जाती थी। जिससे किसी भी समय कोई अनहोनी का खतरा रहता था। इस मशीन के द्वारा जांच के दौरान यह मरीज की आंखों से दूर ही रखी जाएगी तथा उसमें उसकी जांच हो जाएगी। जिससे मरीज की आंखों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। आंखों रोग के विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि काला मोतिया के मरीजों को हर सात से दस दिन में अपने आंखों की जांच करवानी पड़ती है। जिस कारण से इस मशीन के द्वारा जांच करने तथा सूक्ष्म रोग के बारे में भी आसानी से पता लग जाएगा। जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। डॉ. संदीप ने बताया कि पहले जो मशीन का प्रयोग करते थे वह आंखों के उपर रखी जाती थी। जिससे मरीज की आंखों में कांच या अन्य कुछ लगने की संभावना रहती थी। जिससे इस मशीन के आने से मरीज की सुरक्षित तरीके से जांच की जा सकेगी।
पटाखों की रोशनी नंगी आंखों से ना देखें
डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि दीपावली के त्योहार के दिन लोग पटाखे जलाते हैं जिससे उसका धुआं तथा रोशनी सीधे तौर पर आंखों को प्रभावित करती है। हमें इससे बचना चाहिए। इसके लिए सभी को अपनी आंखों पर चश्मे का प्रयोग करना चाहिए, जिससे हमारी आंखें सुरक्षित रह सके। अगर धुएं तथा अन्य कारणों से आंखों में खुजली या लाल हो जाती है तो उस समय हमें ठंडे पानी से आंखें धो लेनी चाहिए।
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इस मशीन द्वारा मरीज की आंखों में काला मोतिया की जांच की जाती है। इस मशीन के द्वारा मरीज की जांच दूर से ही की जाती है जबकि जो पहले मशीन उपयोग में लाई जाती थी उसमें मरीज की आंखों के ऊपर रखकर उसकी जांच की जाती थी। जिससे किसी भी समय कोई अनहोनी का खतरा रहता था। इस मशीन के द्वारा जांच के दौरान यह मरीज की आंखों से दूर ही रखी जाएगी तथा उसमें उसकी जांच हो जाएगी। जिससे मरीज की आंखों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। आंखों रोग के विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि काला मोतिया के मरीजों को हर सात से दस दिन में अपने आंखों की जांच करवानी पड़ती है। जिस कारण से इस मशीन के द्वारा जांच करने तथा सूक्ष्म रोग के बारे में भी आसानी से पता लग जाएगा। जबकि पहले ऐसा नहीं होता था। डॉ. संदीप ने बताया कि पहले जो मशीन का प्रयोग करते थे वह आंखों के उपर रखी जाती थी। जिससे मरीज की आंखों में कांच या अन्य कुछ लगने की संभावना रहती थी। जिससे इस मशीन के आने से मरीज की सुरक्षित तरीके से जांच की जा सकेगी।
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पटाखों की रोशनी नंगी आंखों से ना देखें
डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि दीपावली के त्योहार के दिन लोग पटाखे जलाते हैं जिससे उसका धुआं तथा रोशनी सीधे तौर पर आंखों को प्रभावित करती है। हमें इससे बचना चाहिए। इसके लिए सभी को अपनी आंखों पर चश्मे का प्रयोग करना चाहिए, जिससे हमारी आंखें सुरक्षित रह सके। अगर धुएं तथा अन्य कारणों से आंखों में खुजली या लाल हो जाती है तो उस समय हमें ठंडे पानी से आंखें धो लेनी चाहिए।
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