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हिंदी भाषा हमारी सांस्कृतिक धरोहर : सुनीता रानी
Sun, 15 Sep 2024 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 15 Sep 2024 12:46 AM IST
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विवि में कार्यक्रम में भाग लेते हुए छात्र व छात्राएं। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें हिंदी का महत्व और इसकी समकालीन चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ। संचालन शोधार्थी शिमला रानी ने किया।
विभाग की प्राध्यापिका सुनीता रानी, डॉ. रजनी रानी और डाॅ. जसबीर सिंह ने हिंदी भाषा के महत्व और इसके विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। सुनीता रानी ने हिंदी को एकता का सूत्रधार बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। डॉ. रजनी रानी ने हिंदी के समक्ष आने वालीं चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के वैश्वीकरण के दौर में हिंदी को तकनीकी दृष्टिकोण से समृद्ध बनाने की आवश्यकता है, ताकि यह भाषा विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाए रख सके। प्राध्यापक डॉ. जसबीर सिंह भारत ने हिंदी की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि यह भाषा हमारे समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने में सहायक है। हिंदी विभाग की छात्र कविता व गजल ने भाषण के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति अपने विचारों को अभिव्यक्त किया।
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सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें हिंदी का महत्व और इसकी समकालीन चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई। यह कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजकुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ। संचालन शोधार्थी शिमला रानी ने किया।
विभाग की प्राध्यापिका सुनीता रानी, डॉ. रजनी रानी और डाॅ. जसबीर सिंह ने हिंदी भाषा के महत्व और इसके विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। सुनीता रानी ने हिंदी को एकता का सूत्रधार बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। डॉ. रजनी रानी ने हिंदी के समक्ष आने वालीं चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के वैश्वीकरण के दौर में हिंदी को तकनीकी दृष्टिकोण से समृद्ध बनाने की आवश्यकता है, ताकि यह भाषा विश्व मंच पर अपनी पहचान बनाए रख सके। प्राध्यापक डॉ. जसबीर सिंह भारत ने हिंदी की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि यह भाषा हमारे समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने में सहायक है। हिंदी विभाग की छात्र कविता व गजल ने भाषण के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति अपने विचारों को अभिव्यक्त किया।
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