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हाईटेक सिस्टम : अब बटन दबाते ही बदल जाएगा ट्रैक, तेजी से गुजर सकेगी ट्रेन
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रेलवे ट्रैक बदलने के लिए लाइन पर लगाया गया मैनुअल पैनल।
- फोटो : Sirsa
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सिरसा। बठिंडा से हिसार तक रेलवे लाइन को इलेक्ट्रिक करने का काम पूरा हो चुका है। अब लाइन पर इंटरलॉकिंग पैनल लगाए जा रहे हैं। जिसके चलते कार्यालय में बैठे-बैठे ही कर्मचारी रेल के ट्रैक को बदल सकेंगे और रेल तेज गति से दूसरी ट्रैक पर दौड़ेगी। इससे पहले मैनुअल तौर पर कर्मचारी मौके पर खड़े होते थे और रेल के गुजरने के बाद ट्रैक में बदलाव करते थे। इंटरलॉकिंग पैनल होने के बाद तेज रफ्तार से गाड़ी दूसरे ट्रैक पर दौड़ सकेगी।
नए वर्ष में बिजली चलित ट्रेन पटरी पर दौड़ती हुए नजर आएगी। जिससे दैनिक यात्रियों को इसका लाभ मिलने लगेगा। हालांकि इससे पहले अब मालगाड़ी का ट्रायल लिया जा रहा है। एक सप्ताह से इलेक्ट्रिक मालगाड़ी बठिंडा से सिरसा और हिसार तक पहुंच रही है। इंटरलॉकिंग पैनलों का कार्य पूरा न होने के कारण यात्री गाड़ियों को इलेक्ट्रिक नहीं किया गया है। डीजल इंजन पर ही सिरसा से हिसार और अन्य स्थानों पर ट्रेनें पहुंच रही है। जबकि हिसार से रेवाड़ी और दिल्ली की लाइन पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां लंबे समय से चल रही हैं। इंटरलॉकिंग पैनल का काम पूूरा न होने के बाद ही इलेक्ट्रिक ट्रेन की आवाजाही शुरू की जाएगी।
रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली सभी ट्रेनें होंगी इलेक्ट्रिक
सिरसा से हिसार, बठिंडा, दिल्ली, श्रीगंगानगर, फाजिल्का, अमृतसर और अन्य स्थानों तक जाने वाली ट्रेनें भी इलेक्ट्रिक होंगी। इसके लिए मुख्यालय से मंजूरी भी आ चुकी है। लेकिन पैनल के चल रहे कार्य के कारण इन ट्रेनों के इंजनों को इलेक्ट्रिक नहीं किया गया है। हालांकि सिरसा में पहुंचने वाले अधिकतर मालगाड़ियां बिजली की सहायता से ही सिरसा पहुंच रही हैं।
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बठिंडा से हिसार तक बिजली लाइन बिछाने का चल रहा था कार्य
बठिंडा से हिसार के बीच इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के काम में देरी होने के कारण पैसेंजर ट्रेनों को इलेक्ट्रिक नहीं किया जा सका था। लेकिन दो माह पहले लाइन को दुरुस्त कर दिया गया था। जिसके बाद रेलवे के महाप्रबंधक सहित अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया और सभी स्थानों की बारिकी से जांच की गई थी। जिसके बाद से मालगाड़ी को चलाने की प्रक्रिया अब शुरू की गई है।
तेजी से दूसरे ट्रैक पर जाएगी रेल
रेल को दूसरी लाइन से गुजारने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पैनल लगे हुए है। जिसके माध्यम से रेल की पटरी में बदलाव किया जाता हैै। अब इन पैनलों को इलेक्ट्रिक किया जा रहा है। सिरसा, बड़ागुढ़ा और डिंग मंडी में पैनलों को इलेक्ट्रिक करने का कार्य किया जा रहा है। पैनलों के इलेक्ट्रिक होने के बाद कार्यालय में बैठे ही पटरी के ट्रैक में बदलाव किया जा सकेगा। इसका कार्य पूरा होने में करीब दो माह का समय लगना है। इससे पहले कर्मचारी रेल के आने से पहले मौके पर खड़े होते थे और दूसरी ट्रेन को क्रॉसिंग करवाने, पटरी में बदलाव करने का कार्य करते थे। इलेक्ट्रिक पैनल होने के बाद ट्रेनें भी तेज गति से इन स्थानों से गुजर सकेंगी।
बठिंडा से हिसार तक इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। ट्रेन को दूसरी पटरी पर भेजने और क्रॉसिंग करवाने के लिए इंटरलॉकिंग पैनल लगाए जा रहे हैं। जिससे कर्मचारी कार्यालय में बैठे ही ट्रेन के ट्रैक में बदलाव कर सकेंगे। सिरसा, डिंग मंडी और बड़ागुढ़ा लाइन पर कार्य किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद सभी ट्रेनों को बिजली से चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-नरेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन सिरसा ।
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नए वर्ष में बिजली चलित ट्रेन पटरी पर दौड़ती हुए नजर आएगी। जिससे दैनिक यात्रियों को इसका लाभ मिलने लगेगा। हालांकि इससे पहले अब मालगाड़ी का ट्रायल लिया जा रहा है। एक सप्ताह से इलेक्ट्रिक मालगाड़ी बठिंडा से सिरसा और हिसार तक पहुंच रही है। इंटरलॉकिंग पैनलों का कार्य पूरा न होने के कारण यात्री गाड़ियों को इलेक्ट्रिक नहीं किया गया है। डीजल इंजन पर ही सिरसा से हिसार और अन्य स्थानों पर ट्रेनें पहुंच रही है। जबकि हिसार से रेवाड़ी और दिल्ली की लाइन पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां लंबे समय से चल रही हैं। इंटरलॉकिंग पैनल का काम पूूरा न होने के बाद ही इलेक्ट्रिक ट्रेन की आवाजाही शुरू की जाएगी।
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रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली सभी ट्रेनें होंगी इलेक्ट्रिक
सिरसा से हिसार, बठिंडा, दिल्ली, श्रीगंगानगर, फाजिल्का, अमृतसर और अन्य स्थानों तक जाने वाली ट्रेनें भी इलेक्ट्रिक होंगी। इसके लिए मुख्यालय से मंजूरी भी आ चुकी है। लेकिन पैनल के चल रहे कार्य के कारण इन ट्रेनों के इंजनों को इलेक्ट्रिक नहीं किया गया है। हालांकि सिरसा में पहुंचने वाले अधिकतर मालगाड़ियां बिजली की सहायता से ही सिरसा पहुंच रही हैं।
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बठिंडा से हिसार तक बिजली लाइन बिछाने का चल रहा था कार्य
बठिंडा से हिसार के बीच इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने के काम में देरी होने के कारण पैसेंजर ट्रेनों को इलेक्ट्रिक नहीं किया जा सका था। लेकिन दो माह पहले लाइन को दुरुस्त कर दिया गया था। जिसके बाद रेलवे के महाप्रबंधक सहित अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया और सभी स्थानों की बारिकी से जांच की गई थी। जिसके बाद से मालगाड़ी को चलाने की प्रक्रिया अब शुरू की गई है।
तेजी से दूसरे ट्रैक पर जाएगी रेल
रेल को दूसरी लाइन से गुजारने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पैनल लगे हुए है। जिसके माध्यम से रेल की पटरी में बदलाव किया जाता हैै। अब इन पैनलों को इलेक्ट्रिक किया जा रहा है। सिरसा, बड़ागुढ़ा और डिंग मंडी में पैनलों को इलेक्ट्रिक करने का कार्य किया जा रहा है। पैनलों के इलेक्ट्रिक होने के बाद कार्यालय में बैठे ही पटरी के ट्रैक में बदलाव किया जा सकेगा। इसका कार्य पूरा होने में करीब दो माह का समय लगना है। इससे पहले कर्मचारी रेल के आने से पहले मौके पर खड़े होते थे और दूसरी ट्रेन को क्रॉसिंग करवाने, पटरी में बदलाव करने का कार्य करते थे। इलेक्ट्रिक पैनल होने के बाद ट्रेनें भी तेज गति से इन स्थानों से गुजर सकेंगी।
बठिंडा से हिसार तक इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। ट्रेन को दूसरी पटरी पर भेजने और क्रॉसिंग करवाने के लिए इंटरलॉकिंग पैनल लगाए जा रहे हैं। जिससे कर्मचारी कार्यालय में बैठे ही ट्रेन के ट्रैक में बदलाव कर सकेंगे। सिरसा, डिंग मंडी और बड़ागुढ़ा लाइन पर कार्य किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद सभी ट्रेनों को बिजली से चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-नरेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन सिरसा ।