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हरियाणा के 20 जिलों का भूजल फ्लोराइड से दूषित : डाॅ. ढींढसा
Sun, 28 Jan 2024 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 28 Jan 2024 10:50 PM IST
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सिरसा। जननायक चौधरी देवीलाल विद्यापीठ के महानिदेशक डाॅ. कुलदीप सिंह ढींढसा ने बताया कि हरियाणा के 20 जिलों में 136 स्थान ऐसे हैं, जहां का भूजल फ्लोराइड से दूषित है। पीने के लिए पूर्णतया अयोग्य और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। यह निष्कर्ष केन्द्रीय भूजल बोर्ड द्वारा हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के साथ आर्सेनिक तथा फ्लोराइड से संबंधित डाटा साझा करने वाली रिपोर्ट में सामने आया हैं।
डाॅ. ढींढसा ने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार 1.5 लीटर से अधिक फ्लोराइड सांद्रता वाला पानी पीने के लिए उपयुक्त नहीं है। फ्लोराइड की उच्च सांद्रता 1.5 लीटर या अधिक के परिणामस्वरूप दांतों के इनेमल पर दाग पड़ जाते हैं। जबकि और अधिक स्तर 5 और 10 लीटर के बीच के कारण पीठ में कठोरता और प्राकृतिक गतिविधियों को करने में कठिनाई जैसे रोग हो जाते हैं।
डाॅ. ढींढसा का कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार सिरसा में 20, हिसार में 18, भिवानी में 13, जींद में 12 और पानीपत में 10 स्थान ऐसे हैं, जहां भूजल में फ्लोराइड अनुमेय स्तर से अधिक है। दूसरी ओर, हरियाणा के 18 जिलों की 51 बस्तियों में भूजल आर्सेनिक से दूषित है, जिसमें अकेले करनाल से नौ शामिल हैं। आर्सेनिक को भी एक विषैले तत्व के रूप में मान्यता दी गई है और इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा माना जाता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा पानी पीने तथा आर्सेनिक युक्त जल के संपर्क में रहने से कैंसर और त्वचा पर घाव हो सकते हैं। इसे हृदय रोग और मधुमेह से भी जोड़ा गया है। डाॅ. ढींढसा का कहना है कि समाज के स्वास्थ्य का ध्यान में रखते हुऐ सरकार को संबंधित वैज्ञानिकों से परामर्श कर युद्ध स्तर पर जनता को फ्लोराइड व आर्सेनिक रहित शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए एक योजनाबद्ध कार्यक्रम की शुरुआत करनी चाहिए।
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डाॅ. ढींढसा ने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार 1.5 लीटर से अधिक फ्लोराइड सांद्रता वाला पानी पीने के लिए उपयुक्त नहीं है। फ्लोराइड की उच्च सांद्रता 1.5 लीटर या अधिक के परिणामस्वरूप दांतों के इनेमल पर दाग पड़ जाते हैं। जबकि और अधिक स्तर 5 और 10 लीटर के बीच के कारण पीठ में कठोरता और प्राकृतिक गतिविधियों को करने में कठिनाई जैसे रोग हो जाते हैं।
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डाॅ. ढींढसा का कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार सिरसा में 20, हिसार में 18, भिवानी में 13, जींद में 12 और पानीपत में 10 स्थान ऐसे हैं, जहां भूजल में फ्लोराइड अनुमेय स्तर से अधिक है। दूसरी ओर, हरियाणा के 18 जिलों की 51 बस्तियों में भूजल आर्सेनिक से दूषित है, जिसमें अकेले करनाल से नौ शामिल हैं। आर्सेनिक को भी एक विषैले तत्व के रूप में मान्यता दी गई है और इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा माना जाता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा पानी पीने तथा आर्सेनिक युक्त जल के संपर्क में रहने से कैंसर और त्वचा पर घाव हो सकते हैं। इसे हृदय रोग और मधुमेह से भी जोड़ा गया है। डाॅ. ढींढसा का कहना है कि समाज के स्वास्थ्य का ध्यान में रखते हुऐ सरकार को संबंधित वैज्ञानिकों से परामर्श कर युद्ध स्तर पर जनता को फ्लोराइड व आर्सेनिक रहित शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए एक योजनाबद्ध कार्यक्रम की शुरुआत करनी चाहिए।
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