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Sirsa News: ढुकड़ा में आजाद हिंद फौज के वीर सपूत सुरजाराम बिरड़ा की प्रतिमा का भव्य अनावरण, किसान नेता राकेश टिकैत और विधायक अर्जुन चौटाला पहुंचे
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चोपटा में आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय चौधरी सुरजाराम बिरड़ा की प्रतिमा का अनावर
चोपटा। चोपटा खंड के गांव ढुकड़ा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आजाद हिंद फौज के महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय चौधरी सुरजाराम बिरड़ा की प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। किसान नेता राकेश टिकैत और विधायक अर्जुन चौटाला ने मुख्य अतिथि के रूप में इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनानी की धर्मपत्नी माड़ी देवी ने की।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन देशभक्ति, बलिदान और त्याग का प्रतीक है। चौधरी सुरजाराम बिरड़ा की प्रतिमा स्थापित कर उनके परिवार और गांववासियों ने एक सराहनीय कार्य किया है। ऐसे प्रयासों से युवाओं में देशप्रेम की भावना मजबूत होती है और वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र सेवा की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सुरजाराम बिरड़ा अमर रहे के उद्घोष से पूरा वातावरण देशभक्ति के जज्बे से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस अवसर पर भाग लेकर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। ग्रामीणों ने बताया कि चौधरी सुरजाराम बिरड़ा 1941 में ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। बर्मा मोर्चे पर उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कठिन यातनाएं सहने के बाद वे 1946 में रिहा होकर गांव लौटे। उनका त्याग और बलिदान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी देशभक्ति की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर सरपंच राजेंद्र ढुकड़ा समेत अन्य माैजूद रहे।
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किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन देशभक्ति, बलिदान और त्याग का प्रतीक है। चौधरी सुरजाराम बिरड़ा की प्रतिमा स्थापित कर उनके परिवार और गांववासियों ने एक सराहनीय कार्य किया है। ऐसे प्रयासों से युवाओं में देशप्रेम की भावना मजबूत होती है और वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र सेवा की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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कार्यक्रम के दौरान सुरजाराम बिरड़ा अमर रहे के उद्घोष से पूरा वातावरण देशभक्ति के जज्बे से गूंज उठा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इस अवसर पर भाग लेकर स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। ग्रामीणों ने बताया कि चौधरी सुरजाराम बिरड़ा 1941 में ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। बर्मा मोर्चे पर उन्होंने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कठिन यातनाएं सहने के बाद वे 1946 में रिहा होकर गांव लौटे। उनका त्याग और बलिदान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी देशभक्ति की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर सरपंच राजेंद्र ढुकड़ा समेत अन्य माैजूद रहे।
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