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कृषि कानूनों से किसानों में भ्रम पैदा कर रही सरकार : मेधा पाटेकर

Sat, 10 Oct 2020 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 11:33 PM IST
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Government creating confusion among farmers due to agricultural laws: Medha Patekar
सिरसा में किसानों के धरने पर समर्थन देने पहुंची मेधा पाटेकर। - फोटो : Sirsa
तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों द्वारा शहीद भगत सिंह स्टेडियम में दिए जा रहे धरने पर शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर पहुंचीं। उन्होंने 45 मिनट के भाषण में पीएम और हरियाणा के डिप्टी सीएम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार 2014 तक स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात कहती थी, लेकिन बाद में भूल गई। पार्टी जो भी घोषणा पत्र लाती है, उसे लागू करना चाहिए, क्योंकि घोषणा पत्र का नशा शराब के नशे से ज्यादा होता है। पार्टी घोषणा पत्र में जो वादा करती है, चुनाव आयोग को उसे लागू करवाना चाहिए।
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मेधा पाटेकर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ये प्रचार कर रही है कि इन तीन कृषि कानूनों से मंडी को खत्म नहीं किया जाएगा, जबकि इसके उलट मंडियां तो अपने आप समाप्त हो जाएंगी, क्योंकि किसान की फसल को कॉन्ट्रेक्टर खरीद करेंगे। सरकार का तर्क है कि मंडियों में आढ़ती भ्रष्टाचार करते हैं और किसानों को मंडियों में लूटते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। आढ़ती और किसानों का शुरू से ही गहरा नाता रहा है। सरकार इस रिश्ते को तोड़ने के लिए किसानों में भ्रम पैदा कर रही है।
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कृषि कानूनों के लागू होने के बाद एमएसपी बिल्कुल खत्म हो जाएगा
वहीं एमएसपी के लेकर मेधा पाटेकर ने कहा कि केंद्र सरकार एमएसपी को लेकर भी किसानों में भ्रम डाल रही है, जबकि इन कानूनों के लागू हो जाने के बाद एमएसपी बिल्कुल खत्म हो जाएगा। जिसका सीधा फायदा औद्योगिक घरानों को होगा। यह काला कानून लागू होते ही किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है, बल्कि पूंजीपतियों को लाभान्वित करने के लिए नए-नए प्रयोग कर रही है। किसानों की इस लड़ाई में समाज के सभी वर्गों को मिलकर साथ देना होगा।
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जहां आपसी संवाद खत्म, वहां संवेदनाएं भी समाप्त
पीएम मोदी सिर्फ और सिर्फ अपने मन की बात करते हैं। जहां आपसी संवाद खत्म हो जाता है, वहां संवेदनाएं भी खत्म हो जाती हैं। इस सरकार में न तो संवाद है और न ही संवेदना। उन्होंने सरकार से मांग की है कि गेहूं का भाव तीन हजार तो कपास का नौ हजार रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। मेधा पाटेकर ने किसानों से कहा कि जहां डटकर लड़ते हैं, वहां हर हाल में जीत हासिल होती है।
दुष्यंत मोदी शक्ति का प्रतीक बनना चाहते हैं या किसान शक्ति का
मेधा पाटेकर ने कहा कि हरियाणा के किसानों के सवालों का जवाब देने के लिए दुष्यंत चौटाला किसानों के बीच नहीं आते हैं। ऐसे में लोग यह भी देखेंगे कि दुष्यंत की कुर्सी कितने दिन बचती है? उन्होंने कहा कि दुष्यंत चौटाला मोदी शक्ति का प्रतीक बनना चाहते हैं या फिर किसान शक्ति का प्रतीक।
हाथरस कांड : पुलिस को लाश जलाने का अधिकार नहीं
मेधा पाटेकर ने कहा कि हाथरस में पुलिस ने जो किया है, सांप्रदायिक सोच का नतीजा है। लाश को परिवार को जलाने का अधिकार होता है, लेकिन किसी भी धर्म में पुलिस को लाश जलाने का अधिकार नहीं है।

....तो खत्म हो जाएगा मंडी सिस्टम
मेधा पाटेकर ने तीन कृषि कानूनों को गोरे कानूनों की संज्ञा देते हुए कहा कि इस कदम से बाजार खुलेगा तो मंडी सिस्टम खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने केंद्र सरकार से नाता तोड़कर महिला शक्ति की प्रतीक बनी हैं। वह अब पंजाब में मानसा जिले में किसानों के धरने पर जा रही हैं। हरियाणा ने किसान आंदोलन चलाकर देश के किसानों को दिशा दी है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए मेधा पाटेकर ने कहा कि अगर इनको कारपोरेट घरानों से इतना प्यार है तो अपनी कुर्सी ही उन्हें दे दें। अब तक उद्योगपतियों के 68 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा चुका है।
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