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Sirsa News: 22 साल अनुबंध पर डंपिंग प्वाइंट देना प्रशासन के लिए बना चुनौती, एजेंसी निजी लोगों के प्लांट में डाल रही कचरा

Mon, 16 Oct 2023 10:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Mon, 16 Oct 2023 10:48 PM IST
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Giving dumping point on 22 year contract has become a challenge for the administration, the agency is dumping garbage in the plants of private people
सिरसा।
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शहर की मुख्य सड़कों पर बने डंपिंग प्वाइंट अब देखने को नहीं मिलेंगे। यदि कोई प्वाइंट नजर आता है तो उसे पूर्ण रूप से साफ सुथरा बनाना होगा। इतना ही नहीं विभाग किसी निजी व्यक्ति के खाली प्लाॅट में भी कचरा नहीं डाल सकता है। क्योंकि एजेंसी के अनुबंध में साफ लिखा है कि सरकारी जमीन पर ही डंपिंग प्वाइंट होना चाहिए। वह भी एजेंसी को 22 साल के लिए अनुबंध पर दिया जाएगा। जहां पर एजेंसी सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट बनाएगी। यह व्यवस्था सिरसा शहर के लिए नहीं,बल्कि पूरे जिले के लिए बनानी होगी।
क्योंकि सरकार ने क्लस्टर स्तर पर एजेंसी को कचरा निस्तारण का टेंडर दिया है। ऐसे में सरकारी जमीन पर सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट बनाकर देना प्रशासन के लिए सरदर्द बन गया है। बता दें कि मौजूदा समय में लोगों के खाली प्लाॅटों में विभाग ने एजेंसी को सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट दिए हुए है। जो एजेंसी के लिए भी परेशानी बन रहे है। क्याेंकि कई जगहों पर लोग अपनी आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं। वहीं बरनाला रोड पर मुख्य रोड के साथ पड़े खाली प्लॉटों में डंपिंग प्वाइंट बनाए गए है। जिससे आसपास के एरिया में गंदगी फैल रही है और बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहते है। इतना ही नहीं नियमानुसार इन खाली प्लॉट में कचरा डालने के बजाय इन डंपिंग प्वाइंटों को विभाग ने खत्म करना था। इन्हीं ही विभाग एजेंसी को देकर स्वयं पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है।
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इन प्वाइंटों को बदलने की जरूरत

1 सरकारी तौर पर बस स्टैंड के साथ डंपिंग प्वाइंट बनाया गया है। जो शहर की सुंदरता को खराब कर रहा है। इन प्वाइंट को कवर नहीं किया गया है।



2 डाकघर के साथ मुख्य रोड पर बनाया गया कचरा प्वाइंट खत्म होना चाहिए। यहां पर बदबू भरा माहौल रहता है और लोग उसी के पास बैठकर सामान बेचते हैं।

3 गोशाला पर मुख्य सड़क पर ही डंपिंग प्वाइंट बनाया गया है। इसे भी खत्म किया जाना चाहिए। इस प्वाइंट को खत्म करने के लिए कई बार लोग मांग उठा चुके हैं।




यह है नियम
सरकार के नियमानुसार जहां पर भी सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट बनाया जाएगा। वह पूर्ण रूप से कवर होगा और उसे नियमित रूप से दोनों वक्त खाली किया जाएगा। वहां पर चूना व अन्य कीटनाशक का प्रयोग किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन अर्बन के अंतर्गत डंपिंग प्वाइंट को खत्म किया जाना चाहिए। ताकि स्वच्छता रैंकिग में अच्छे अंक प्राप्त हो सके।
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यह है मौजूदा व्यवस्था
1 कॉलोनियों में लोगों के खाली प्लॉट में बना रखे हैं डंपिंग प्वाइंट

2 मुख्य सड़कों के साथ लंबे समय से खाली पड़े प्लाॅट में बने हैं डंपिंग प्वाइंट
3 सड़कों पर सरकारी शौचालयों के साथ बना रखे हैं डंपिंग प्वाइंट





बढ़ाई कचरा उठाने वाली गाड़ियों की संख्या
एजेंसी के अधिकारियों की माने तो एजेंसी ने कचरा उठाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ा दी है। पूर्व में सिरसा शहर में 26 वाहन चल रहे थे। अब इनकी संख्या 36 कर दी गई है। इतना ही नहीं, नियमित उठान के लिए बड़े वाहनों की संख्या भी बढ़ाई गई है।




20 प्रतिशत कचरे का किया जा रहा सेग्रीगेशन
एजेंसी की लगाई गई गाड़ियों में आने वाले कचरे में से 20 प्रतिशत कचरे का सेग्रीगेशन कर्मचारी कर देते है। गाड़ी में ही दो बड़े बैग लगाए हुए हैं जिनमें बिकने वाला सामान जैसे प्लास्टिक बोतल, गता, लोहा, प्लास्टिक का टूटा हुआ सामान, पिज्जा बॉक्स आदि को अलग कर लिया जाता है। जिसे नियमित रूप से बेचकर कर्मचारी पैसा काम रहे है। वहीं रैक पीकर भी डंपिंग प्वाइंटों से कचरा चुनकर 20 फीसदी बेचने योग्य माल बेच देते है। जिससे उनका रोजगार चल रहा है।




सरकारी जमीन देना रहेगा चुनौती
विभाग के अधिकारियों को अब शहर और जिले भर में सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट बनाने को लेकर सरकारी जमीन देनी होगी। सड़क पर डंपिंग प्वाइंट की चारदीवारी बनाकर विभाग नहीं दे सकता है। क्योंकि यह सड़क दूसरे विभाग के अंतर्गत आती है और यह नियमों के खिलाफ भी है। ऐसे में विभाग को अब हर कॉलोनी या दो कॉलोनियों के आसपास सरकारी जमीन तलाशनी होगी। भले ही वह दूसरे विभाग से उनकी जमीन पर डंपिंग प्वाइंट बनाने की अनुमति ही क्यों न ले।






डंपिंग प्वाइंट को लेकर विभाग को जगह देनी है। 22 साल तक हमें लिखित में जगह मिलेगी। जहां पर हम नियमानुसार सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंटों का रख रखाव करेंगे। पूर्व में जहां कचरे के सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट बनाए गए थे हमारी एजेंसी को भी विभाग ने वहीं प्वाइंट दिए हैं। निजी लोगों के प्लॉट है या नहीं। यह विभाग ही जानता है।
मंयक अग्रवाल, पूजा कंसल्टेंट एजेंसी,
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