{"_id":"592485ae4f1c1bce26535af3","slug":"ghaghar-river-sirsa-nk-bhola-sirsa-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ प्रबंधन की तैयारियां को लेकर प्रशासन अभी ढिलाई में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ प्रबंधन की तैयारियां को लेकर प्रशासन अभी ढिलाई में
अमर उजाला ब्यूरो/सिरसा
Updated Wed, 24 May 2017 12:25 AM IST
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river
- फोटो : demo pic
घग्घर नदी की बाढ़ की संभावना को लेकर तैयारियां अभी ढीली हैं। अब मात्र एक माह शेष है तैयारियां पूरी करने में। कई बार जिले में कहर मचा चुकी घग्घर से शायद संबंधित विभाग ने सबक नहीं लिया है। अभी तक न तो तटबंधों की सफाई की गई है और न ही रैंप भरे गए हैं। इसके अलावा करीब सवा पांच सौ पाइप लाइन बांध के नीचे से निकाली गई हैं जहां से पानी का रिसाव हो सकता है उन प्वाइंट को भी मजबूत नहीं किया जा सका है। हालांकि पिछले दिनों डीसी ने तटबंधों का निरीक्षण किया था पर अब तक उन्होंने जिन प्वाइंट की मजबूती के सुझाव दिए थे उन पर भी काम नहीं हो सका है। यदि नदी में पानी जुलाई से पूर्व आ जाता है तो लोग परेशानी में पड़ सकते हैं।
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बाढ़ राहत के कार्य मई माह में शुरू हो जाते हैं पर जिले में अब तक तटबंधों की सफाई तक का काम भी शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा जो-जो तैयारियां करनी होती हैं उनमें से किसी पर काम शुरू नहीं हुआ अब तक। मई माह बीतने को हैं और 30 जून तक पूरा काम मुकम्मल होना चाहिए। यदि समय रहते बचाव कार्य पूरे नहीं हुए तो लोग जोखिम में पड़ सकते हैं। घग्घर नदी कई बार कहर बरपा चुकी है जिससे प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। डीसी शरणदीप कौर बराड़ ने मई माह के प्रथम सप्ताह में तटबंधों का निरीक्षण किया था और जहां-जहां भी तट कमजोर दिखाई दिया उसको मजबूत करने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिए। उसके बाद अब तक तटबंधों की मजबूती के लिए काम शुरू नहीं हो पाया है। एक जुलाई से 30 सितंबर तक ड्यूटी रोटरेट होगी। इस अवधि के दौरान सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम की स्थापना भी की जाएगी जो 24 घंटे खुला रहेगा।
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कमजोर हो रहे तटबंध
पंजाब सीमा से लेकर राजस्थान सीमा तक जिले के क्षेत्र में चार लाख फुट तटबांध हैं। इस बांध पर किसानाें ने जगह-जगह पर रैंप बना रखे हैं। बांध के नीचे से सवा पांच सौ पाइप लाइन निकाली हुई हैं। बाढ़ आने पर पाइप लाइन के साथ लीकेज की संभावना रहती है। वर्ष 2010 में भी पाइप लाइन की लीकेज के कारण बांध टूटा था जिसके बाद घग्घर ने खूब तबाही मचाई थी। हर वर्ष होने वाली बरसातों के कारण भी मिट्टी का रिसाव होने के कारण तटबांध कमजोर हो रहे हैं।
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कर्मचारियों की है कमी
घग्घर मंडल में कर्मचारियों की भारी कमी है। एक-तिहाही कर्मचारी कम हैं। हर तीन किलो मीटर की दूरी के अनुसार एक बेलदार होना चाहिए पर अब 10 किलो मीटर से भी अधिक क्षेत्र बेलदार के पास है। इसी प्रकार 21 जेई के पदों की जगह मात्र चार जेई हैं। तकनीकी और फील्ड स्टाफ की कमी के कारण तटबांध की सही देखभाल नहीं हो पाती।
जल्द पूरा कर लेंगे काम : भोला
घग्घर मंडल के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन की तैयारियां शुरू की जा चुकी है। एक-दो दिन में मनरेगा के तहत तटबंधों की सफाई और मजबूती का काम शुरू हो जाएगा। सभी रैंप पर मिट्टी के बैग भर कर रखवा दिए जाएंगे। टोटल स्टेशन मशीन से सर्वे करवाया जा रहा है, ताकि मालूम हो सके कि कहां से कितना बांध कमजोर हुआ है। इस सर्वे में पूरे बांध का पता चल जाएगा और जहां भी मिट्टी डलवाने या मजबूतीकरण के लिए कोई कदम उठाने की जरूरत होगी तो कार्य करवाया जाएगा। 30 जून से पहले सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके अलावा एक जून से 30 सितंबर तक ट्रैक्टर-ट्रॉली, जेसीबी आदि तैयार रखी जाएंगी और कंट्रोल रूम 24 घंटे खुला रहेगा। कर्मचारियों की रोटेशन में ड्यूटी रहेगी। इसके अलावा इस तीन माह की अवधि में संबंधित विभागों से भी तकनीकी और फील्ड स्टाफ की सेवाएं ली जाएंगी।
12 हजार क्यूसिक से अधिक होते रही पानी आ जाएगा नदी से बाहर
घग्घर नदी के अंदर 12 हजार क्यूसिक पानी ही बह सकता है। इससे अधिक पानी होते ही बाहर आ जाएगा और तटबंधों से सट जाएगा। उसके बाद जितना पानी बढ़ता जाएगा खतरा उतना ही अधिक हो जाता है। वर्ष 2010 में 26 हजार क्यूसिक पानी घग्घर में आया था जिसने जिले के अनेक गांवों में कहर बरपा दिया था।
घग्घर ने कब कब बरपाया है कहर (भयंकर बाढ़)
वर्ष क्यूसेक पानी
1962 37845
1988 35678
1993 42048
1995 41142
2010 25920