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60 फीसदी शहरी मुफ्त में बुझा रहे हैं प्यास
डीडी गाेयल/अमर उजाला डबवाली (सिरसा)
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:21 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अधिकार मिलने के बावजूद जनस्वास्थ्य विभाग डिफाल्टरों पर कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है। विभाग का पौने चार करोड़ रुपए डिफाल्टरों की ओर बकाया है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड अनुसार 53 हजार से ज्यादा आबादी वाले शहर डबवाली में 11490 पेयजल कनेक्शन हैं, जबकि सीवरेज कनेक्शनों की संख्या 7680 है। 60 फीसदी लोग पांच वर्षों से बिल अदा नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों को विभाग ने कागजों में डिफाल्टर घोषित कर रखा है। पेयजल कनेक्शन धारकों की ओर दो करोड़ 90 लाख 43 हजार 875 रुपए बकाया हैं। कमोबेश यही हालत सीवरेज बिलों की है।
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विभाग ने डिफाल्टरों से 80 लाख 28 हजार 731 रुपए लेने हैं। दोनों को जोड़ दिया जाए तो राशि करीब पौने चार करोड़ रुपए बैठती है। हालांकि विभाग ने बकाया जुटाने के लिए जेई सतपाल, प्रदीप तथा प्रेम कुमार पर आधारित तीन टीमों का गठन किया है, लेकिन लोग इन टीमों को भाव तक नहीं दे रहे। न ही टीमें बकायदारों के खिलाफ कार्रवाई के मूड में है। ऐसे में दिन-ब-दिन बकाया बढ़ता जा रहा है।
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विशेष बात यह है कि करीब डेढ़ साल पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने नई वॉटर पॉलिसी बनाते हुए डिफाल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विभाग को अधिकार दिए थे, लेकिन ये आदेश महज कागजों में सिमटकर रह गए हैं। शहर में अनाधिकृत कनेक्शनों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
एक नजर इधर भी
शहर में 11490 वैध पेयजल कनेक्शन हैं। इतने ही सीवरेज कनेक्शन होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। 7680 लोगों ने ही सीवरेज कनेक्शन वैध करवाया हुआ है। उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि 3810 रेगुलर कनेक्शन धारक ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिनकी कुंडली विभाग की मुट्ठी में है। इसके बावजूद विभाग आंखे मूंदे है।
डेढ़ साल पहले यह थी स्थिति
बिल न भरना लोगों की आदत बन चुका है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश से पहले जनस्वास्थ्य विभाग के पास ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार नहीं था। विभाग केवल नोटिस जारी कर सकता था। एक मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए थे। जिसके बाद सरकार ने नई वॉटर पॉलिसी बनाई थी। जिसके आधार पर रिकॉर्ड को ऑनलाइन किया गया। कागजों में उलझे विभाग को अब पता चला कि शहर में काफी लोगों ने बिल ही जमा नहीं करवाया है। इसके बावजूद विभाग ने डिफाल्टरों पर कार्रवाई नहीं की।
अब यह कर सकता है विभाग
विभागीय अधिकारी बताते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम करना आसान हो गया है। संबंधित डिफाल्टर को तीन नोटिस जारी करने के बाद उसका पेयजल या सीवरेज कनेक्शन काटा जा सकता है। अगर वह फिर भी न सुधरे तो संबंधित की रिपोर्ट तहसीलदार को करके प्रॉपर्टी के खरीद-बेच के समय जनस्वास्थ्य विभाग की एनओसी के बगैर रजिस्ट्री पर रोक लगाई जा सकती है।
शहर में करीब 40 फीसदी लोग बिल भर रहे हैं। 60 फीसदी लोगों को बिल भरने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ में अनाधिकृत कनेक्शन धारकों को कनेक्शन वैध करवाने के लिए भी मुहीम चलाई जा रही है। कम स्टाफ के कारण परेशानी आ रही है। -भानी राम, एसडीई जनस्वास्थ्य विभाग, डबवाली।