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बहेलिया ने भूलवश छोड़ा जहरीला तीर, श्रीकृष्ण ने किया गोलोक प्रस्थान : जयदेव दाधीच

Tue, 12 Mar 2024 10:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Tue, 12 Mar 2024 10:13 AM IST
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Fowler accidentally released poisonous arrow, Shri Krishna departed to Goloka: Jaidev Dadhich
बडागुढ़ा। गांव छतरियां में स्थित श्रीकृष्ण गोशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच ने कथा में श्रीकृष्ण के गोलोक गमन तथा राजा परीक्षित को तक्षक नाग के दंश का प्रसंग सुनाया।
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कथा उपरांत पंच कुंडीय हवन यज्ञ हुआ। वहीं इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने लंगर-प्रसाद ग्रहण किया। वहीं महिलाओं ने गांव में कलश यात्रा भी निकाली। ये कलश यात्रा गांव के विभिन्न गली-मोहल्लों, बस स्टैंड व फिरनी सहित अनेक जगहों से होकर गुजरी। शास्त्री जयदेव दाधीच ने श्री कृष्ण के गोलोक गमन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने क्रोधवश भगवान कृष्ण को 36 वर्ष बाद मृत्यु का श्राप दे दिया। एक बार भगवान श्री कृष्ण पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। तभी वहां एक बहेलिया शिकार के लिए पहुंचा। श्रीकृष्ण के पैर में पद्ममणि चमकने के कारण दूर से उसे लगा कि वृक्ष के नीचे कोई हिरण है, इसलिए उसने श्रीकृष्ण पर तीर चला दिया।
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फिर जब बहेलिया वहां पहुंचा तो वह रोते हुए श्रीकृष्ण से क्षमा याचना करने लगा। जहरीला तीर लगने के कारण श्रीकृष्ण बुरी तरह से जख्मी हो गए। उन्हें आभास हो गया था कि अब उनका धरती से विदा लेने का समय आ गया है। फिर श्रीकृष्ण ने बहेलिये से बड़े प्रेम से कहा कि इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है। तुम पूर्व जन्म में बाली थे और मैं श्रीराम। मैंने छिपकर तीर से तुम्हारा वध किया था। तुमने इस जन्म में अपना बदला ले लिया। जिसके बाद श्रीकृष्ण ने मानव शरीर का त्याग कर दिया।
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वहीं कथावाचक ने तक्षक नाग के दंश का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षित को शृंगी ऋषि ने श्राप दिया था कि 7 दिन बाद उसकी मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हो जाएगी। जिसके बाद राजा परीक्षित ने 7 दिन तक शुकदेव मुनि से श्रीमद्भागवत कथा सुनी। कथा के बाद उन्हें जीवन का असली उद्देश्य समझ आया और मृत्यु का भय समाप्त हो गया। श्राप के अनुसार 7वें दिन तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को काट लिया और उनको मोक्ष पद प्राप्त हुआ। कथा के दौरान गाए गए सुंदर-सुंदर भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे।
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