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किसान आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ : कंवरपाल गुर्जर

Sun, 07 Feb 2021 10:10 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2021 10:10 PM IST
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Foreign forces are behind the peasant movement: Kanwarpal Gurjar
प्रदेश के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने रविवार को सिरसा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कृषि कानून में कांटेक्ट फार्मिंग की कोई बाध्यता नहीं है। विकल्प सीधा किसान के हाथ में है। उन्होंने किसान आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होना बताया। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद चीन से बड़ी संख्या में उद्योग पलायन कर रहे हैं। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि भारत में उद्योग स्थापित हों। चीन का भी हाथ किसान आंदोलन के पीछे है।
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कंवर पाल गुर्जर ने कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक पार्टियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपने हित साधने के लिए राजनीतिक पार्टियां इस आंदोलन में शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन सीधे रूप में किसानों के खिलाफ हैं। आंदोलन से केवल किसानों को डराने का काम किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे अडानी हो या अंबानी किसी में ताकत नहीं है कि वह हिंदुस्तान के किसानों की जमीनों पर कब्जा कर सके। शिक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में केवल संवाद से ही प्रत्येक समस्या का समाधान हो सकता है। सरकार ने किसानों को मंडी के साथ-साथ अन्य जगह अपनी फसल बेचने का मजबूत विकल्प दिया है। तीनों कानून किसानों पर थोपे नहीं जा रहे इसमें किसानों के हित में सभी विकल्प मौजूद हैं। कृषि कानून सही मायने में किसानों के हितों के लिए बनाए गए हैं ।
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उन्होंने अभय सिंह चौटाला के इस्तीफे के बाद सरकार गिरने संबंधी बयान पर कहा कि खवाब में हलवा खाने में कोई दिक्कत नहीं है। सरकार बढ़िया चल रही है और आगे भी चलेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बातें सुननी भी चाहिए। अभय सिंह चौटाला ने भी केवल वाकआउट किया था। गुर्जर ने जोड़ा कि अभय सिंह चौटाला विधानसभा में अपनी बात तो कह गए लेकिन जब सुनने की बात आई तो वॉकआउट कर गए। इसी तरह कांग्रेस ने भी चर्चा करने की वजह वाकआउट किया। पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल के राज्यपाल पद को समाप्त करने संबंधी बयान पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेसी लंबे समय तक सत्ता में रहे, तब उन्हें राज्यपाल पद को समाप्त करना क्यों नहीं याद आया। अब वे इस तरह के बयान हताशा में दे रहे हैं।
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