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Sirsa News: बाढ़ का पानी उतरा, दिखे तबाही के निशान

Sun, 30 Jul 2023 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sun, 30 Jul 2023 11:31 PM IST
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Flood waters receded, visible signs of devastation
गांव पनिहारी के खेत में खड़ी नरमे की लकड़ियां ।
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिरसा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पानी उतरने के बाद तबाही के निशान दिखाई देने लगे हैं। किसी किसान के खेत में दो से तीन फुट तक रेत चढ़ गई है, तोे कही कटाव होने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। घग्गर नदी का पानी अभी 20 फीसदी खेतों से ही निकल पाया है।
गांव मुसाहिबवाला, पनिहारी, बुर्जकर्मगढ़ और फरवाई के किसानों व ग्रामीणों को सबसे अधिक घग्गर नदी ने नुकसान पहुंचाया है। इस क्षेत्र के खेतों में सबसे पहले घग्गर का पानी आया था और गांवों के चारों तरफ फैल गया था। जिसके पश्चात नदी का जलस्तर कम होने के बाद खेतों व गांव के आसपास के क्षेत्र से पानी की निकासी हो रही है। जिले में अब तक नदी के बाहर करीब 12 हजार एकड़ में फसल खराब हो चुकी है। जिसमें से अभी तक केवल 20 फीसदी ही क्षेत्र से पानी की निकासी हो पाई गई है। गांव पनिहारी क्षेत्र के खेतों में स्थिति अब काफी खराब हो चुकी है। यहां के खेतों में दो से तीन फुट तक काली रेत जमा हो गई है। जबकि किसी स्थान से खेत का कटाव होने के कारण उसकी मिट्टी भी बह गई है। नदी के साथ लगते खेत बुरी तरह से प्रभावित हुए है। खेतों से पानी की निकासी होने के बाद भी किसान अब खेत से रेत हटाने व कटाव हुई मिट्टी के कारण खेत को समतल करने की चिंता में डूबे हुए है। वहीं पनिहारी व बुर्जकर्मगढ़ के किसान गुरचरण सिंह, तरसेम सिंह, सुरेंद्र सिंह, सुनील कुमार, जसवीर, गुरमीत ने बताया कि उनके खेतों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। खेत में रेत चढ़ने के कारण उनकी जमीन बंजर हो चुकी है। अगर वह खेत से रेत को हटाकर साफ करते है तो ही वह धान की बिजाई कर पाएंगे। अगर वह रेत को नहीं हटा पाए तो उनकी इस स्थान पर फसल भी नहीं हो पाएगी।
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घग्गर के कारण 216 ट्यूबवेल और 183 कमरे हो चुके है क्षतिग्रस्त, बुर्ज कर्मगढ़ के सभी मकानों क्षतिग्रस्त
खेत से पानी कम होने के बाद किसान खेतों की स्थिति जांचने के लिए पहुंच रहे है। इनमें से किसी किसान के खेत की मोटर धंस गई है तो किसी के खेत में बना हुआ कमरा गिर गया है या उसमें दरार आ चुकी है। जिसके कारण किसानों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में अब किसानों को सिंचाई के लिए नए सिरे से ट्यूबवेल और मकान तैयार करना पड़ेगा। जिसपर किसानों को चार से पांच लाख रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार घग्गर नदी के कारण अब तक 216 ट्यूबवेल और उनके साथ बने हुए 183 कमरे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। हालांकि अभी अधिक क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा है। वहीं गांव बुर्जकर्मगढ़ के 53 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन मकानों के फर्श, छत और दीवारों में दरारें आ चुकी है जबकि कई मकानों की तो छतें भी गिर गई है, जिसका ग्रामीणों का खासा नुकसान हुआ है।
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धान की फसल हुई गायब तो नरमे की रह गई खेत में केवल लकड़ी
घग्गर के पानी के कारण धान की फसल खेतों से ही हो चुकी है। जबकि नरमे की फसल वाले खेत में केवल अब नरमे की लकड़ी ही देखने को मिल रही है। वहीं इन क्षेत्रों में ऊंचाई वाले स्थानों पर जमीन पर कोई प्रभाव न पड़ने के कारण किसानों ने उस क्षेत्र में दोबारा से भी धान की रोपाई करने काम भी शुरू कर दिया है।


घग्गर नदी की अब यह है स्थिति
स्थान क्यूसेक
गुहला चीका, 40551
खनौरी, 12275
चांदपुरा, 12100
रंगोई नाला, 2800
सरदूलगढ़, 22520
ओटू हेड, 18041
राजस्थान साइफन, 10420

वर्जन
घग्गर नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। जिले में अब स्थिति सामान्य है। नदी के पानी की अब खेतों से भी निकासी हो रही है। नुकसान का आंकलन भी किया जा रहा है।
-अजीत हुड्डा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग सिरसा।
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