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लेटकर दूध पिलाने से फट सकता है बच्चे के कान का पर्दा

Wed, 02 Dec 2015 12:43 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Wed, 02 Dec 2015 12:43 AM IST
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Feeding the baby can lie down burst eardrum

हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एनजीओ अपने 10 दिसंबर को सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन करेगा।

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जिसमें ईएनटी विशेषज्ञ अमनदीप मित्तल नाक, कान तथा गला संबंधी रोगों की जांच करेंगे। एनजीओ की ओर से रोगियों को दवा भी मुफ्त बांटी जाएगी।

एसएमओ एमके भादू तथा अपने के अध्यक्ष मथरा दास चलाना ने बताया कि डबवाली तथा आसपास के क्षेत्र में नाक, कान तथा गला संबंधी रोगियों की तादाद काफी ज्यादा है।

लोग बेहतर इलाज के लिए पंजाब तथा राजस्थान के बड़े शहरों का रूख करते हैं। ऐसे में सिविल अस्पताल में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है।
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डॉ. अमनदीप मित्तल ने ईएनटी से संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए बताया कि अक्सर कान के पर्दे फटे होने तथा कान के भीतर फंगल इंफेक्शन होने के मरीज मिलते हैं।
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महज जागरुकता के चलते दोनों रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। कान का पर्दा बचपन में ही फट जाता है। चूंकि अक्सर माताएं अपने बच्चे को लेटकर दूध पिलाती हैं।

जिससे दूध कान के पीछे चला जाता है। जिससे कान का पर्दा फट जाता है। जितनी भी इमरजेंसी हो, माताएं अपने बच्चे को दूध गोद में लिटाकर पिलाएं। उसका मुंह ऊपर हो, पेट नीचे। ताकि दूध सीधा पेट में जाए।

फंगल इंफेक्शन के संबंध में डॉ. मित्तल ने बताया कि कुछ लोगों को तीली से कान खुजाने की लत होती है। ऐसा होने से कान के भीतर घाव हो जाता है।

धीरे-धीरे इंफेक्शन होने लगती है। जिससे सुनने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। नाक संबंधी बीमारियों का जिक्र करते हुए चिकित्सक ने बताया कि अक्सर जन्म के समय बच्चे की नाक टेढ़ी हो जाती है। ध्यान न देने के कारण यह बीमारी नासूर बन जाती है।

बचपन में ही इसे मेडिसन से ठीक किया जा सकता है। वरना बालिग होने पर ऑपरेशन ही जरिया होता है। बार-बार जुकाम लगने से हृदय पर भी असर पड़ता है।

इससे हृदय संबंधी बीमारी हो सकती है। ऐसे कई मामले सामने आते हैं। उन्होंने गले संबंधी बीमारियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में सूखी तथा रेशे वाली खांसी हो जाती है। मामूली जागरुकता से ही इससे बचा जा सकता है।

ये टिप्स अजमाएं
डॉ. अमनदीप मित्तल ने बताया कि जुकाम, खांसी से बचने के लिए प्रतिदिन सुबह तथा शाम को गर्म पानी की भांप लेते रहें। गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाकर कुरला या गरारे करते रहें। गुनगुने पानी में नीम का पता डालकर गरारे करने से भी गले संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है।


यहां करवा सकते हैं रजिस्ट्रेशन
अपने के अध्यक्ष मथरा दास चलाना ने बताया कि नाक, कान तथा गले संबंधी बीमारियों के मुफ्त जांच शिविर के लिए चलाना मेडिकोज, जस्सी अस्पताल के सामने, चौटाला रोड पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। कैंप के दौरान मरीजों को दवाइयां मुफ्त वितरित की जाएंगी।

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